Q241.‘क्षीण’ का विलोम शब्द नीचे दिए विकल्पों में से चुनिए-
- Aपुष्ट
- Bअपुष्ट
- Cपापी
- Dकमजोर
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अवधारणा: विलोम = उलटे अर्थ वाला शब्द। 'क्षीण' = घटा हुआ, दुबला, बलहीन।
हल:
- दुबले/बलहीन का उलटा = तगड़ा, भरा-पूरा → पुष्ट।
- 'कमजोर' तो समान अर्थ वाला (पर्याय) है, 'अपुष्ट' भी कमज़ोरी ही बताता है।
- 'पापी' का इस अर्थ से कोई लेना-देना नहीं।
ट्रिक: पर्याय वाले विकल्प (कमजोर) को सबसे पहले काटें — परीक्षा में यही सबसे बड़ा जाल होता है।
उत्तर: (A) पुष्ट
SSC GDHindiAntonym – क्षीणSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q242.‘भारत को संधि प्रस्ताव अच्छा लगा।’ रेखांकित पद का विलोम कौन-सा है?
- Aविग्रह
- Bसमास
- Cअसंधि
- Dनिःसंदेह
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अवधारणा: यहाँ 'संधि' = दो पक्षों में समझौता/मेल।
हल:
- समझौते का उलटा = लड़ाई, अलगाव → विग्रह।
- 'समास' व्याकरण का अलग विषय है; 'असंधि' प्रचलित नहीं; 'निःसंदेह' = बेशक।
याद रखें: जोड़ी याद रखें: संधि ↔ विग्रह (व्याकरण में भी: संधि-विच्छेद, समास-विग्रह)।
उत्तर: (A) विग्रह
SSC GDHindiAntonym – संधिSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q243.‘पानी-वानी’ किस प्रकार के युग्म रूप के अंतर्गत आएँगे?
- Aविरोधी युग्म
- Bपर्यायवाची
- Cशब्द विलोम
- Dसार्थक-निरर्थक
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अवधारणा: जिस जोड़े का एक शब्द अर्थ वाला और दूसरा केवल तुक मिलाने को गढ़ा गया हो, वह सार्थक-निरर्थक युग्म है।
हल:
- 'पानी' का अर्थ है (जल), पर 'वानी' का अपना कोई अर्थ नहीं।
- बोलचाल में ऐसे जोड़े खूब बनते हैं: खाना-वाना, किताब-विताब, झूठ-मूठ।
- यह न विलोम है, न पर्याय, न विरोधी युग्म।
ट्रिक: दूसरे शब्द को अकेले बोलकर देखें — अर्थ न निकले तो युग्म सार्थक-निरर्थक है।
उत्तर: (D) सार्थक-निरर्थक
SSC GDHindiWord pair – meaningful + meaninglessSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q244.चौपाल ____। उपयुक्त वाक्य से रिक्त स्थान की पूर्ति करें।
- Aवह जगह होती है, जहाँ गाँव के लोग सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा हेतु एकत्र होते हैं।
- Bवह जगह होती है, जहाँ गाँव के लोग पशुओं का गोबर एकत्रित करते हैं।
- Cवह जगह होती है, जहाँ गाँव के लोग पानी भरते हैं।
- Dवह जगह होती है, जहाँ गाँव के लोग पशु चराते हैं।
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अवधारणा: 'चौपाल' गाँव का साझा बैठक-स्थल है।
हल:
- यहाँ गाँववाले मिलकर सामूहिक बातों/झगड़ों पर विचार करते हैं → विकल्प (a)।
- पानी भरने की जगह = पनघट; पशु चराने की जगह = चरागाह; गोबर इकट्ठा करने की जगह = घूरा।
याद रखें: चौपाल = गाँव की 'बैठक' — प्रेमचंद की कहानियों में पंचायत यहीं जुटती है।
उत्तर: (A) वह जगह होती है, जहाँ गाँव के लोग सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा हेतु एकत्र होते हैं।
SSC GDHindiMeaning – चौपालSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q245.इनमें से किस वाक्य में त्रुटि नहीं है?
- Aमैंने यह कहानी पढ़ी है।
- Bयह एक आम का है।
- Cयह मेरा पुस्तक है।
- Dगया था मैं कानपुर
Show answer
अवधारणा: शुद्ध वाक्य में लिंग-मेल, पूरा अर्थ और सही पदक्रम (कर्ता-कर्म-क्रिया) होना चाहिए।
हल:
- (a) 'ने' के साथ क्रिया कर्म के अनुसार: कहानी (स्त्री.) → पढ़ी ✓
- (b) 'आम का' के बाद कुछ नहीं — वाक्य अधूरा।
- (c) पुस्तक स्त्रीलिंग → 'मेरी पुस्तक'।
- (d) क्रम उलटा → 'मैं कानपुर गया था।'
ट्रिक: 'ने' वाले वाक्य में क्रिया का लिंग कर्ता से नहीं, कर्म से मिलाएँ।
उत्तर: (A) मैंने यह कहानी पढ़ी है।
SSC GDHindiSentence correctionSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q246.‘मुमुक्षु’ शब्द के लिए सही वाक्य होगा-
- Aमोक्ष प्राप्त करने वाला
- Bमोक्ष के मार्ग को सरल बनाने वाला
- Cमोक्ष की इच्छा करने वाला
- Dमोक्ष के पथ पर चलने वाला
Show answer
अवधारणा: 'मुमुक्षु' इच्छावाचक शब्द है — मोक्ष पाने की चाह रखने वाला।
हल:
- इच्छा बताने वाले ऐसे ही शब्द: जिज्ञासु (जानने की चाह), पिपासु (पीने की चाह)।
- जो मोक्ष पा चुका, वह 'मुक्त' कहलाता है — इसलिए (a) गलत।
ट्रिक: -'सु/क्षु' अंत वाले ऐसे शब्दों में 'चाह' छिपी होती है: बुभुक्षु = भूखा (खाने का इच्छुक)।
उत्तर: (C) मोक्ष की इच्छा करने वाला
SSC GDHindiOne-word meaning – मुमुक्षुSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q247.‘मैं आपका दर्शन करने आया हूँ।’ इस वाक्य में कहाँ अशुद्धि है?
- Aआया
- Bआपका
- Cदर्शन
- Dकरने
Show answer
अवधारणा: 'दर्शन', 'प्राण', 'होश' जैसे शब्द हमेशा बहुवचन में प्रयोग होते हैं।
हल:
- 'दर्शन' बहुवचन है, तो उससे पहले का सर्वनाम भी 'के' रूप लेगा: आपका → आपके।
- सुधार के बाद: '…आपके दर्शन…' — बाकी शब्द ठीक हैं।
ट्रिक: सदा बहुवचन: दर्शन, प्राण, होश, हस्ताक्षर, आँसू — इनके साथ 'के' लगेगा।
उत्तर: (B) आपका
SSC GDHindiError – दर्शन (always plural)SSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q248.निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है?
अधिकांस धन व्यर्थ गया।
- Aधन
- Bअधिकांस
- Cगया
- Dव्यर्थ
Show answer
अवधारणा: शब्द-रचना से सही वर्तनी पहचानें: अधिक + अंश = अधिकांश।
हल:
- 'अंश' में तालव्य 'श' है, इसलिए 'अधिकांस' गलत।
- केवल पहला खंड बदलेगा: अधिकांस → अधिकांश।
ट्रिक: अंश वाले शब्द: अधिकांश, अल्पांश, अक्षांश, देशांतर — सबमें 'श'।
उत्तर: (B) अधिकांस
SSC GDHindiSpelling – अधिकांशSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q249.‘इस क्षेत्र में मकान तो छोड़ो, उचित ढंग से ____।’ प्रतिदिन की बोलचाल में प्रयोग किए जाने वाले उचित सार्थक-निरर्थक शब्द-युग्म का चयन करके वाक्य पूर्ण करें-
- Aसड़कें-नालियाँ भी नहीं बनी हैं
- Bगलियाँ-पोखर भी नहीं बने हैं
- Cसड़कें-बड़के भी नहीं बनी हैं
- Dसड़क-गली भी नहीं बनी है
Show answer
अवधारणा: सार्थक-निरर्थक युग्म = पहला शब्द अर्थपूर्ण, दूसरा केवल ध्वनि-मेल के लिए।
हल:
- 'सड़कें-बड़के': 'बड़के' का कोई अर्थ नहीं → सही युग्म।
- सड़कें-नालियाँ, गलियाँ-पोखर, सड़क-गली — इन सबमें दोनों शब्द अर्थवान हैं।
ट्रिक: तुक मिलाता निरर्थक शब्द अक्सर पहले अक्षर को बदलकर बनता है (सड़कें → बड़के)।
उत्तर: (C) सड़कें-बड़के भी नहीं बनी हैं
SSC GDHindiWord pair – meaningful + meaninglessSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q250.‘नदी’ का पर्याय निम्न में से है-
- Aअब्धि
- Bगिरि
- Cतटिनी
- Dचपला
Show answer
अवधारणा: नदी के पर्याय: सरिता, तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निम्नगा।
हल:
- 'तटिनी' = तटों वाली → नदी।
- अब्धि = सागर, गिरि = पर्वत, चपला = बिजली।
ट्रिक: 'तट' (किनारा) जिसकी पहचान हो वह तटिनी — शब्द में ही अर्थ छिपा है।
उत्तर: (C) तटिनी
SSC GDHindiSynonym – नदीSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q251.‘मुझे रमेश से सहायता मिला थी।’ स्त्रीलिंग की दृष्टि से वाक्य का शुद्ध रूप है-
- Aमुझे रमेश से सहायता मिली थी।
- Bमुझे रमेश से सहायता मिलता था।
- Cमुझे रमेश से सहायता मिला था।
- Dमुझे रमेश से सहायता मिलती है।
Show answer
अवधारणा: बिना 'ने' वाले इस वाक्य में क्रिया का लिंग 'सहायता' शब्द तय करेगा, जो स्त्रीलिंग है।
हल:
- सहायता (स्त्री.) + बीता समय → 'मिली थी'।
- 'मिला था', 'मिलता था' पुल्लिंग; 'मिलती है' काल बदल देता है।
- इसलिए (a) ही सही है।
ट्रिक: काल न बदलें — केवल लिंग सुधारें; मूल 'थी' बना रहे।
उत्तर: (A) मुझे रमेश से सहायता मिली थी।
SSC GDHindiGender agreement of verbSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q252.‘इस जीवन में अनेक अध्याय हैं जो सम्पूर्ण सृष्टि को प्रभावित करते हैं।’ रेखांकित शब्द को अनेकार्थी शब्द से प्रतिस्थापित करें-
- Aउद्भव
- Bपृष्ठ
- Cसर्ग
- Dप्रवाह
Show answer
अवधारणा: 'सर्ग' अनेकार्थी है: (1) महाकाव्य का अध्याय, (2) सृष्टि/रचना।
हल:
- 'अध्याय' की जगह 'सर्ग' रखने पर अर्थ बना रहता है।
- पृष्ठ = पन्ना, उद्भव = उत्पत्ति, प्रवाह = बहाव — ये अध्याय नहीं।
याद रखें: महाकाव्य 'सर्गों' में, नाटक 'अंकों' में, पुस्तक 'अध्यायों' में बँटती है।
उत्तर: (C) सर्ग
SSC GDHindiMultiple-meaning word – सर्गSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q253.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
लम्बे पेट वाला
- Aलंपट
- Bलंबोघर
- Cलंबोदर
- Dलंबू
Show answer
अवधारणा: लंब + उदर (पेट) = लंबोदर — बड़े पेट वाला (गणेश जी का नाम)।
हल:
- 'लंबोघर' अशुद्ध वर्तनी है।
- लंपट = चरित्रहीन; लंबू = लंबे कद वाला।
याद रखें: उदर = पेट: लंबोदर, दामोदर (रस्सी से बँधे पेट वाले कृष्ण)।
उत्तर: (C) लंबोदर
SSC GDHindiOne-word substitution – लंबोदरSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q254.वाक्य के रेखांकित शब्द को नीचे दिए गए शब्दों में से संबंधित शब्द से परिवर्तित करें-
अँधेरे के पीछे ठीक से चल पाना कठिन था।
- Aसमीप
- Bनिकट
- Cसमय
- Dकारण
Show answer
अवधारणा: वाक्य में अँधेरा कठिनाई की वजह है — कारण बताने को 'के कारण' चाहिए।
हल:
- 'पीछे', 'समीप', 'निकट' स्थान बताते हैं; 'समय' काल बताता है।
- सुधरा अंश: '…अँधेरे के कारण…'।
ट्रिक: 'क्यों?' पूछें — उत्तर (अँधेरा) मिले तो 'के कारण' लगाएँ।
उत्तर: (D) कारण
SSC GDHindiCorrect word use – के कारणSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
Q255.‘छाती पर मूँग दलना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
- Aगुस्सा करना
- Bझगड़ा करना
- Cमारपीट करना
- Dकष्ट पहुँचाना
Show answer
अवधारणा: 'छाती पर मूँग दलना' = पास रहकर लगातार दुःख/कष्ट देना।
हल:
- इसमें बार-बार सताने का भाव है, एक बार के गुस्से या झगड़े का नहीं।
- उदाहरण: सौतेली माँ रोज़ ताने देकर उसकी छाती पर मूँग दलती रही।
याद रखें: छाती से जुड़े अन्य: 'छाती ठोकना' = साहस दिखाना, 'छाती फटना' = बहुत दुःख होना।
उत्तर: (D) कष्ट पहुँचाना
SSC GDHindiIdiom – छाती पर मूँग दलनाSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ का ज्ञान होता है। अस्तित्वगत मनुष्य में आदिकाल से यह जिज्ञासा रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गए। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गए। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसकी सत्ता को __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति __(80)__ ही है।
Q256.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aप्रवर्धक
- Bसंचालक
- Cनियंता
- Dनियामक
Show answer
अवधारणा: संसार की हर गतिविधि अनुशासित देखकर किसी 'नियंत्रण करने वाले' का अनुमान होता है।
हल:
- नियंता = नियंत्रण करने वाला (ईश्वर/ब्रह्म) — आगे गद्यांश उसी के रूप की चर्चा करता है।
- प्रवर्धक = बढ़ाने वाला; संचालक = चलाने वाला; नियामक = नियम/नियमन करने वाला।
ट्रिक: अगली पंक्तियाँ ('उसके रूप-निर्माण', 'ब्रह्म') पढ़कर रिक्त भरें — संदर्भ ईश्वर का है।
उत्तर: (C) नियंता
SSC GDHindiPassage cloze – नियंताSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ का ज्ञान होता है। अस्तित्वगत मनुष्य में आदिकाल से यह जिज्ञासा रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गए। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गए। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसकी सत्ता को __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति __(80)__ ही है।
Q257.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aनेति-नेति
- Bचेतनकी
- Cनेति-धेती
- Dवेद-वर्ती
Show answer
अवधारणा: उपनिषदों में ब्रह्म को शब्दों में न बाँध पाने पर ऋषियों ने कहा 'नेति-नेति'।
हल:
- अर्थ: 'न इति' = यह नहीं, यह भी नहीं।
- बाद में ऋषियों द्वारा ब्रह्म को 'अरूप' छोड़ देना भी यही दर्शाता है।
- बाकी तीनों विकल्प मान्य शब्द नहीं।
याद रखें: नेति = न + इति; ब्रह्म के अवर्णनीय होने का सूचक प्रसिद्ध वाक्य।
उत्तर: (A) नेति-नेति
SSC GDHindiPassage cloze – नेति-नेतिSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ का ज्ञान होता है। अस्तित्वगत मनुष्य में आदिकाल से यह जिज्ञासा रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गए। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गए। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसकी सत्ता को __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति __(80)__ ही है।
Q258.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aउदघाटन
- Bउद्धरण
- Cउद्घाटन
- Dउदजीवीकरण
Show answer
अवधारणा: रहस्य 'खुलने' के लिए शब्द है उद्घाटन (उत् + घाटन)।
हल:
- सही वर्तनी में 'द्' आधा: उद्घाटन; 'उदघाटन' अशुद्ध।
- उद्धरण = किसी का कथन उद्धृत करना; उदजीवीकरण का प्रसंग से संबंध नहीं।
ट्रिक: समान रूप वाले विकल्प हों तो हलंत (आधा अक्षर) ध्यान से देखें।
उत्तर: (C) उद्घाटन
SSC GDHindiPassage cloze – उद्घाटन (spelling)SSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ का ज्ञान होता है। अस्तित्वगत मनुष्य में आदिकाल से यह जिज्ञासा रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गए। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गए। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसकी सत्ता को __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति __(80)__ ही है।
Q259.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aजिहासा
- Bजिज्ञासा
- Cजिघांसा
- Dजिगीषा
Show answer
अवधारणा: 'जिज्ञासा' = जानने की इच्छा; गद्यांश की शुरुआत में भी यही शब्द आया है।
हल:
- प्रसंग: मन केवल उस सत्ता को जानने की चाह से संतुष्ट नहीं, उसकी ओर खिंचता जाता है।
- जिहासा = छोड़ने की इच्छा, जिघांसा = मार डालने की इच्छा, जिगीषा = जीतने की इच्छा।
याद रखें: इच्छावाचक चौकड़ी: जिज्ञासा (जानना), जिगीषा (जीतना), जिघांसा (मारना), पिपासा (पीना)।
उत्तर: (B) जिज्ञासा
SSC GDHindiPassage cloze – जिज्ञासाSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ का ज्ञान होता है। अस्तित्वगत मनुष्य में आदिकाल से यह जिज्ञासा रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गए। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गए। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसकी सत्ता को __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति __(80)__ ही है।
Q260.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसंगत
- Bसहंत
- Cशंकुत
- Dसंध
Show answer
अवधारणा: 'संगत' = उचित, प्रसंग से मेल खाने वाला।
हल:
- लेखक कहता है कि आलिंगन वाली उपमा भावना के उद्गम पर ठीक बैठती है → 'संगत'।
- सहंत, शंकुत, संध — शब्दकोश में ऐसे शब्द मिलते ही नहीं।
ट्रिक: तीन विकल्प निरर्थक हों तो बचा हुआ सार्थक शब्द ही उत्तर — पहले निरर्थक शब्द हटाएँ।
उत्तर: (A) संगत
SSC GDHindiPassage cloze – संगतSSC GD 2025 · 18 Feb Shift 3