Q381.निम्नलिखित में से किस वाक्य में लिंग संबंधी अशुद्धि है?
- Aनदी सदैव बहती ही रहती है।
- Bमोहिनी की नृत्य अत्यंत ललित है।
- Cमेरी अभिलाषा है कि मेरे जन्मदिन पर आप अवश्य आयें।
- Dआपकी क्षति की पूर्ति कर दी जायेगी।
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अवधारणा: संज्ञा का लिंग देखकर ही का/की/के और क्रिया का रूप तय होता है।
- ‘नृत्य’ पुल्लिंग है (नृत्य होता है, नृत्य अच्छा लगा)।
- इसलिए ‘मोहिनी की नृत्य’ गलत, सही रूप – ‘मोहिनी का नृत्य बहुत ललित है’।
- नदी, अभिलाषा, क्षति – स्त्रीलिंग हैं और उनके साथ क्रियाएँ भी स्त्रीलिंग हैं, अतः बाकी वाक्य ठीक।
याद रखें: ‘-त्य’ अंत वाले संस्कृत शब्द – नृत्य, कृत्य, साहित्य – प्रायः पुल्लिंग होते हैं।
उत्तर: (B) मोहिनी की नृत्य अत्यंत ललित है।
SSC GDHindiGender agreement – nrityaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q382.निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें। मालती के दो छोटे-छोटे बच्चेन हैं।
- Aमालती के दो छोटे-छोटे बच्चेन हैं।
- Bमालती के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
- Cमालती की दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
- Dमालती कि दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
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अवधारणा: आकारांत पुल्लिंग शब्द का बहुवचन ‘-ए’ लगाकर बनता है।
- बच्चा → बच्चे; ‘बच्चेन’ कोई शुद्ध रूप नहीं।
- ‘बच्चे’ (पुं., बहु.) के साथ संबंध-चिह्न ‘के’ लगेगा – ‘की’ या ‘कि’ नहीं।
- इस तरह सिर्फ़ विकल्प B पूरी तरह शुद्ध है।
ट्रिक: दो जाँच एक साथ: शब्द-रूप (बच्चे) + संबंध-चिह्न (के) – दोनों जिसमें सही हों वही उत्तर।
उत्तर: (B) मालती के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
SSC GDHindiSpelling – plural of bachchaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q383.‘कलंक’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है-
- Aअपकीर्ति
- Bप्रतिष्ठा
- Cसम्मान
- Dसुकीर्ति
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अवधारणा: ‘कलंक’ = बदनामी, यश पर लगा धब्बा।
- अपकीर्ति = अप (बुरी) + कीर्ति (ख्याति) → बदनामी; यही समान अर्थ।
- प्रतिष्ठा, सम्मान, सुकीर्ति – तीनों अच्छे यश के सूचक, यानी उल्टा भाव।
ट्रिक: तीन विकल्प सकारात्मक, एक नकारात्मक – ‘कलंक’ नकारात्मक है, तो वही चुनें।
उत्तर: (A) अपकीर्ति
SSC GDHindiOne-word meaning – kalankSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q384.निम्नलिखित में से बहुवचन से संबंधित वाक्य है-
- Aमहिला बाजार जा रही है।
- Bकल कोई महिला आई थी।
- Cकुछ महिलाएँ बाहर खड़ी हैं।
- Dएक महिला आई है।
Show answer
अवधारणा: बहुवचन वाक्य में संज्ञा और क्रिया दोनों एक से अधिक का बोध कराती हैं।
- ‘कुछ महिलाएँ बाहर खड़ी हैं’ – ‘महिलाएँ’ बहुवचन संज्ञा, ‘हैं’ बहुवचन क्रिया।
- ‘महिला … जा रही है’, ‘कोई महिला आई थी’, ‘एक महिला आई है’ – सब एकवचन।
ट्रिक: ‘-एँ’ प्रत्यय वाली संज्ञा और ‘हैं’ – बहुवचन की पक्की निशानी।
उत्तर: (C) कुछ महिलाएँ बाहर खड़ी हैं।
SSC GDHindiNumber – plural sentenceSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q385.रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए। आपकी उपस्थिति के बिना हम कुछ नहीं कर सकते थे।
- Aउपलब्धता
- Bप्रतिष्ठा
- Cसहायता
- Dअनुकम्पा
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अवधारणा: वाक्य का भाव देखकर वह शब्द चुनें जो सबसे सहज बैठे।
- भाव: ‘आपके साथ/मदद न मिलती तो काम न हो पाता’।
- ‘सहायता’ रखने पर वाक्य का अर्थ पूरा और स्वाभाविक बनता है।
- उपलब्धता (मिल पाना), प्रतिष्ठा (इज़्ज़त), अनुकम्पा (कृपा) यहाँ मेल नहीं खाते।
ट्रिक: हर विकल्प को वाक्य में रखकर ज़ोर से पढ़ें – जो सबसे बोलचाल-जैसा लगे, वही।
उत्तर: (C) सहायता
SSC GDHindiWord substitution – sahayataSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q386.निम्नलिखित में से कौन-सा ‘पेड़’ का पर्यायवाची शब्द नहीं है?
- Aपादप
- Bआशय
- Cतरु
- Dविटप
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अवधारणा: पेड़ के पर्याय: वृक्ष, तरु, पादप, विटप, द्रुम, रूख।
- पादप, तरु, विटप – तीनों पेड़ के पर्याय हैं।
- ‘आशय’ = मतलब, अभिप्राय – पेड़ से कोई संबंध नहीं।
याद रखें: ‘पादप’ = पैर (जड़) से पानी पीने वाला – इसलिए पेड़।
उत्तर: (B) आशय
SSC GDHindiSynonyms – treeSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q387.‘दीपावली का पर्व ____ की रात्रि को मनाया जाता है।’ उपर्युक्त वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम शब्द है-
- Aचौथ
- Bअमावस्या
- Cछठ
- Dतीज
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अवधारणा: दीवाली का त्योहार कार्तिक की अमावस वाली रात को होता है।
- संस्कृत रूप ‘अमावस्या’ (तत्सम) है; बोलचाल का रूप ‘अमावस’ (तद्भव)।
- चौथ (चतुर्थी), छठ (षष्ठी), तीज (तृतीया) – ये तद्भव रूप हैं, और दीवाली की तिथि भी नहीं।
ट्रिक: तत्सम पहचानें: संयुक्त अक्षर/संस्कृत रूप (अमावस्या) बनाम बोलचाल का छोटा रूप (चौथ, छठ, तीज)।
उत्तर: (B) अमावस्या
SSC GDHindiTatsam word – AmavasyaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q388.‘____ प्रमुख भारतीय व्यंजन है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम है-
- Aक्षीर
- Bहरिद्रा
- Cनिवात
- Dदही
Show answer
अवधारणा: उत्तर तत्सम भी हो और किसी व्यंजन का अर्थ भी दे।
- क्षीर (तत्सम) → खीर (तद्भव) – लोकप्रिय भारतीय मिठाई।
- ‘दही’ तद्भव है (तत्सम ‘दधि’); हरिद्रा = हल्दी (मसाला); निवात = हवा-रहित स्थान।
याद रखें: ‘क्ष’ वाले शब्द अक्सर तत्सम होते हैं – क्षीर→खीर, क्षेत्र→खेत, अक्षि→आँख।
उत्तर: (A) क्षीर
SSC GDHindiTatsam word – KsheerSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q389.निम्न वाक्य में रेखांकित पद को संशोधित कीजिए। एक बदमाश की मस्तिष्क पुलिस के डंडे से फट गयी।
- Aकपोल
- Bखोपड़ी
- Cदिमाग
- Dसिर
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अवधारणा: रेखांकित शब्द ऐसा हो जो अर्थ और लिंग दोनों में वाक्य से मेल खाए।
- ‘की … फट गयी’ स्त्रीलिंग माँगते हैं, जबकि ‘मस्तिष्क’ नर-लिंग शब्द है।
- चोट से सिर की ऊपरी हड्डी ही फटती है – वह है ‘खोपड़ी’, जो स्त्रीलिंग है।
- कपोल, दिमाग, सिर – ये भी पुं. हैं, अतः ‘की … गयी’ से मेल नहीं।
ट्रिक: ‘की’ और ‘गयी’ देखते ही केवल स्त्रीलिंग विकल्प खोजें – अकेला ‘खोपड़ी’ बचता है।
उत्तर: (B) खोपड़ी
SSC GDHindiWord correction – khopdiSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q390.रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए। उसे अभिमान है कि वह उच्चवर्णीय परिवार में पैदा हुआ है।
- Aआशंका
- Bगर्व
- Cकष्ट
- Dआनंद
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अवधारणा: ‘अभिमान’ के निकट अर्थ वाला शब्द चुनना है।
- ऊँचे कुल में जन्म पर मन में बड़प्पन का भाव = गर्व / अभिमान।
- आशंका (डर), कष्ट (दुख), आनंद (खुशी) – ये अर्थ नहीं देते।
याद रखें: अभिमान, गर्व, घमंड, दर्प, अहंकार – एक ही भाव-परिवार के शब्द हैं।
उत्तर: (B) गर्व
SSC GDHindiWord substitution – garvSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q391.‘बात में यूँ तो कोई बात नहीं होती पर फिर भी वह ____ की तरह चुभ जाती है।’ ‘तीर’ के पर्याय से वाक्य पूर्ण करें-
- Aशूल
- Bतलवार
- Cशर
- Dखंजर
Show answer
अवधारणा: तीर के पर्याय: बाण, शर, सायक, इषु, विशिख।
- ‘शर’ तीर का पर्याय है → ‘वह शर की तरह चुभ जाती है’।
- शूल = काँटा; तलवार और खंजर अलग हथियार हैं, तीर के पर्याय नहीं।
याद रखें: ‘शरशय्या’ (भीष्म) = बाणों की सेज – यहाँ ‘शर’ = तीर।
उत्तर: (C) शर
SSC GDHindiSynonym of teer – sharSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q392.निम्नांकित मुहावरे के रिक्त स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द कौन-सा है? ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं ____।
- Aपानी
- Bबारिश
- Cछाया
- Dसूखा
Show answer
अवधारणा: लोकोक्ति का प्रचलित रूप याद रखना होता है।
- पूरी लोकोक्ति में ‘धूप’ के बाद ‘छाया’ आता है।
- अर्थ: दुनिया में सुख-दुख, अमीरी-गरीबी साथ-साथ दिखते हैं।
- धूप का स्वाभाविक जोड़ा ‘छाया’ है; ‘माया’ से तुक भी मिलती है।
ट्रिक: तुक मिलाएँ: माया – छाया।
उत्तर: (C) छाया
SSC GDHindiProverb – kahin dhoop kahin chhayaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q393.निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएं कि प्रस्तुत विकल्पों में से कौन-सा विकल्प चिह्नित शब्द का विलोम शब्द है? आजादी के इतने वर्षों के बाद भी भारत की अधिकतर जनसंख्या साक्षरता दर के नीचे है।
- Aस्वच्छता
- Bसाक्षरता
- Cअक्षरता
- Dनिरक्षरता
Show answer
अवधारणा: उपसर्ग ‘निर्’ अभाव बताता है।
- साक्षरता = पढ़ना-लिखना जानना।
- निर् + अक्षरता = निरक्षरता → पढ़ना-लिखना न जानना।
- स्वच्छता असंबंधित; विकल्प B तो वही शब्द है।
याद रखें: सा- (साथ) बनाम निर्- (बिना): साकार–निराकार, सापेक्ष–निरपेक्ष।
उत्तर: (D) निरक्षरता
SSC GDHindiAntonym – sakshartaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q394.निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है? इन दोनों में केवल यही अंतर है।
- Aयही
- Bअंतर
- Cकेवल
- Dदोनों
Show answer
अवधारणा: एक ही अर्थ वाले दो शब्द साथ आएँ तो पुनरुक्ति दोष होता है।
- ‘यही’ = यह + ही; ‘ही’ में पहले से ‘सिर्फ़’ का भाव है।
- साथ में ‘केवल’ लिखना दोहराव है → ‘केवल’ हटाएँ।
- शुद्ध: ‘इन दोनों में यही अंतर है।’
ट्रिक: ‘केवल … ही’, ‘सिर्फ़ … ही’ एक साथ दिखें तो एक को काटें।
उत्तर: (C) केवल
SSC GDHindiRedundancy – keval + hiSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
Q395.निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शब्द कौन-सा है? जिंदगी सबसे ____ है।
- Aदया
- Bरोती
- Cसजा
- Dमांगती
Show answer
अवधारणा: ‘है’ से पहले स्त्रीलिंग कर्ता ‘जिंदगी’ के अनुरूप सकर्मक क्रिया चाहिए; ‘माँगना’ के साथ ‘से’ परसर्ग आता है।
- रिक्त के बाद ‘है’ → यहाँ ‘-ती’ वाली क्रिया चाहिए; ‘दया’ और ‘सजा’ संज्ञा हैं।
- ‘रोती’ अकर्मक है, ‘सबसे’ के साथ सार्थक अर्थ नहीं बनता।
- ‘जिंदगी सबसे मांगती है’ – जीवन हर किसी से कुछ न कुछ (मेहनत, धैर्य) माँगता है।
ट्रिक: किसी ‘से’ माँगा जाता है, किसी ‘को’ दिया जाता है।
उत्तर: (D) मांगती
SSC GDHindiFill in the blank – verb formSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
Q396.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- A‘सादा जीवन उच्च विचार’
- B‘सादा जीवन उत्तम विचार’
- C‘सादा जीवन अच्छा विचार’
- D‘सादा जीवन नेक विचार’
Show answer
अवधारणा: ‘महावाक्य’ शब्द से पता चलता है कि यहाँ कोई प्रसिद्ध कथन आएगा।
- जानी-मानी सूक्ति में ‘सादा जीवन’ के बाद ‘उच्च विचार’ ही आता है।
- उत्तम, अच्छा, नेक – ये बदले हुए शब्द हैं, असली कथन नहीं।
याद रखें: यह सूक्ति प्रायः गांधीजी के जीवन से जोड़ी जाती है।
उत्तर: (A) ‘सादा जीवन उच्च विचार’
SSC GDHindiPassage – famous maximSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
Q397.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aभारतीयता
- Bलौकिकता
- Cप्रभुता
- Dमानवता
Show answer
अवधारणा: पूरे अनुच्छेद का स्वर जात-पाँत के विरोध और इंसानियत के पक्ष में है।
- जातिप्रथा के शोर में जिसकी ‘सरसता’ खोई, वह है ‘मानवता’।
- भारतीयता, लौकिकता, प्रभुता – जाति-भेद से हुई हानि का यह भाव नहीं देते।
ट्रिक: गद्यांश का मुख्य विचार पहचानें – जाति बनाम इंसान → मानवता।
उत्तर: (D) मानवता
SSC GDHindiPassage – manavtaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
Q398.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aकर्म
- Bशर्म
- Cमर्म
- Dधर्म
Show answer
अवधारणा: ‘___ था, जन्म नहीं’ – रिक्त में जन्म का विरोधी आधार चाहिए।
- लेखक के अनुसार वर्ण का निर्धारण काम से होता था – यानी ‘कर्म’।
- आगे दिए दोनों ऋषियों के उदाहरण भी बताते हैं कि पहचान काम से बनी।
- शर्म, मर्म, धर्म – सिर्फ़ तुकबंदी वाले शब्द हैं।
ट्रिक: ‘जन्म नहीं’ पढ़ते ही जोड़ा याद करें – जन्म बनाम कर्म।
उत्तर: (A) कर्म
SSC GDHindiPassage – karma vs janmaSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
Q399.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aमहर्षि
- Bदेवर्षि
- Cसंन्यासी
- Dसाधु
Show answer
अवधारणा: वाल्मीकि के चरित्र-परिवर्तन (लुटेरा → सज्जन) का भाव चाहिए।
- ज्ञानियों की संगति से लुटेरा सदाचारी बन गया → ‘साधु’।
- ‘महर्षि’ उपाधि अगले ही वाक्य में दूसरे ऋषि हेतु आई है, इसलिए यहाँ उसे दोहराना ठीक नहीं।
- देवर्षि = नारद की उपाधि; संन्यासी = आश्रम/वेश का बोध।
ट्रिक: ‘लुटेरा’ का स्वाभाविक विपरीत ‘साधु’ (सज्जन) है – चरित्र बदला, पद नहीं।
उत्तर: (D) साधु
SSC GDHindiPassage – sadhuSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतीय संस्कृति का वह महावाक्य __(76)__ कहीं गुम हो गया है। सच तो यह है कि जातिप्रथा के बिगुल की भोंड़ी आवाज़ में __(77)__ की सरसता कहीं खो गई है। जिस भारत में आज जातियों-उपजातियों की असीमित श्रृंखला पनपती जा रही है उसी भारत में जातिवाद का अस्तित्व भी नहीं था। एक बार वर्ण जिन्हें हम जाति की संज्ञा दें भी तो उसका आधार __(78)__ था, जन्म नहीं। इसका सशक्त प्रमाण है वाल्मीकि एवं विश्वामित्र। वाल्मीकि सेवक वर्ग में जन्मे एक निरक्षर लुटेरे थे किन्तु ज्ञानियों के सान्निध्य ने उन्हें __(79)__ बना दिया। इसी प्रकार विश्वामित्र क्षत्रिय कुल में जन्मे किन्तु उनकी रुचि ने उन्हें महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस युग में भी क्या बाबा साहेब अम्बेडकर को उनकी प्रतिभा का समुचित __(80)__ नहीं मिला?
Q400.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aअभिमान
- Bसत्कार
- Cस्थान
- Dसम्मान
Show answer
अवधारणा: ‘प्रतिभा का समुचित ___ मिलना’ – स्वाभाविक शब्द-युग्म चुनें।
- प्रतिभा को उचित आदर मिलना = ‘प्रतिभा का सम्मान’।
- अभिमान = अपना घमंड; सत्कार = अतिथि-सेवा; स्थान = जगह – भाव पूरा नहीं होता।
याद रखें: सहप्रयोग याद रखें – प्रतिभा का सम्मान, अतिथि का सत्कार।
उत्तर: (D) सम्मान
SSC GDHindiPassage – sammanSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 2