Q401.‘जो विद्यार्थी पास हो गए हों, वे इस कक्षा में बैठ जाएँ।’ ‘पास हो गए हों’ वाक्यांश के स्थान पर उचित शब्द होगा-
- Aअसफल
- Bकामयाब
- Cउत्तीर्ण
- Dअनुत्तीर्ण
Show answer
अवधारणा: परीक्षा में सफल होने के लिए मानक शब्द 'उत्तीर्ण' है।
- 'पास हो गए हों' = परीक्षा पार कर ली हो → उत्तीर्ण।
- असफल, अनुत्तीर्ण उल्टे अर्थ के हैं; 'कामयाब' उर्दू मूल का सामान्य शब्द, परीक्षा-परिणाम का औपचारिक शब्द नहीं।
याद रखें: उत्तीर्ण ↔ अनुत्तीर्ण – विलोम युग्म के रूप में भी पूछा जाता है।
उत्तर: (C) उत्तीर्ण
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – उत्तीर्णSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q402.‘हाथ के कागज उड़ना।’ मुहावरे में रेखांकित शब्द के स्थान पर उपयुक्त शब्द होगा-
- Aबाजू
- Bकोने
- Cतोते
- Dकबूतर
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अवधारणा: मुहावरे के शब्द निश्चित होते हैं, उन्हें बदला नहीं जा सकता।
- शुद्ध रूप: हाथ के तोते उड़ना।
- अर्थ: अचानक बुरी खबर से घबरा जाना, होश गुम हो जाना।
- उदाहरण: नतीजा देखते ही सोनू के हाथ के तोते उड़ गए।
याद रखें: ऐसे ही: 'चेहरे का रंग उड़ना', 'होश उड़ना' – सब घबराहट के भाव वाले।
उत्तर: (C) तोते
SSC GDHindiमुहावरा – हाथ के तोते उड़नाSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q403.‘संसार में असंख्य शिशुओं का जन्म प्रतीक्षण होता है।’ उपर्युक्त वाक्य में अशुद्ध शब्द है-
- Aअसंख्य
- Bशिशुओं
- Cजन्म
- Dप्रतीक्षण
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अवधारणा: 'प्रति' उपसर्ग में 'ति' ह्रस्व रहता है।
- अर्थ है 'हर क्षण' → प्रति + क्षण = प्रतिक्षण।
- 'प्रतीक्षण' (दीर्घ ई) अशुद्ध; दीर्घ 'ई' वाला शब्द 'प्रतीक्षा' (इंतज़ार) अलग है।
- असंख्य, शिशुओं, जन्म – सही वर्तनी।
ट्रिक: प्रति + दिन = प्रतिदिन, प्रति + वर्ष = प्रतिवर्ष – 'प्रति' हमेशा छोटी इ।
उत्तर: (D) प्रतीक्षण
SSC GDHindiवर्तनी – प्रतिक्षणSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q404.‘अनाथ’ शब्द का विलोम क्या होगा?
- Aनाथ
- Bस्वामी
- Cदास
- Dसनाथ
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अवधारणा: 'अ' (रहित) का विलोम 'स' (सहित) उपसर्ग से बनता है।
- अनाथ – बिना सहारे/संरक्षक वाला।
- उलटा भाव: 'स' जोड़कर सनाथ – जिसे सहारा प्राप्त हो।
- नाथ, स्वामी, दास – विलोम युग्म नहीं।
ट्रिक: अ/अन् ↔ स जोड़ी: अनाथ–सनाथ, अजीव–सजीव, अकर्मक–सकर्मक।
उत्तर: (D) सनाथ
SSC GDHindiविलोम – अनाथ / सनाथSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q405.मयंक ने भाभी के लिए कंकण खरीदे। इस वाक्य में ‘कंकण’ शब्द का तद्भव रूप प्रयुक्त कर वाक्य पूर्ण कीजिए।
- Aमयंक ने भाभी के लिए कंगन खरीदे।
- Bमयंक ने भाभी के लिए कंचन खरीदे।
- Cमयंक ने भाभी के लिए पायल खरीदे।
- Dमयंक ने भाभी के लिए कर्णफूल खरीदे।
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अवधारणा: संस्कृत का मूल रूप तत्सम, बोलचाल में बदला रूप तद्भव।
- तत्सम 'कंकण' → तद्भव कंगन (क → ग)।
- कंचन का अर्थ स्वर्ण; पायल (पैर) व कर्णफूल (कान) अलग आभूषण।
याद रखें: ऐसे ही: कर्ण → कान, हस्त → हाथ, स्वर्ण → सोना।
उत्तर: (A) मयंक ने भाभी के लिए कंगन खरीदे।
SSC GDHindiतत्सम–तद्भव – कंकण / कंगनSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q406.‘इच्छा’ शब्द का विलोम क्या होगा?
- Aअभिलाषा
- Bआराम
- Cअनिच्छा
- Dलिप्सा
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अवधारणा: 'अन्' उपसर्ग अभाव बताता है।
- अन् + इच्छा = अनिच्छा (चाह न होना)।
- अभिलाषा, लिप्सा – पर्यायवाची (जाल वाले विकल्प); आराम – असंबंधित।
ट्रिक: विलोम प्रश्न में पहले पर्यायवाची विकल्प हटाएँ – अक्सर दो विकल्प ऐसे ही होते हैं।
उत्तर: (C) अनिच्छा
SSC GDHindiविलोम – इच्छा / अनिच्छाSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q407.निम्नलिखित वाक्य के शुद्ध रूप का चयन करें- ‘कृपया हमें उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दें।’
- Aकृपया हमें उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दें।
- Bकृपया हमें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दें।
- Cकृपया हमें उज्जवल भविष्य का आशिर्वाद दें।
- Dकृपया हमें उज्जवल भविष्य का आर्शीवाद दें।
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अवधारणा: दो शब्दों की शुद्ध वर्तनी जाँचनी है।
- उत् + ज्वल = उज्ज्वल (ज् + ज्व); 'उज्जवल' अशुद्ध।
- शुद्ध: आशीर्वाद – 'शी' दीर्घ, रेफ 'वा' पर; आशिर्वाद, आर्शीवाद अशुद्ध।
ट्रिक: उज्ज्वल में 'ज्व' जोड़ा है, आशीर्वाद में 'र्' वाद के ऊपर – दोनों एक साथ केवल B में।
उत्तर: (B) कृपया हमें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दें।
SSC GDHindiवर्तनी – उज्ज्वल, आशीर्वादSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q408.‘जिसके हृदय में दया नहीं है’ वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द होगा-
- Aनिर्दय
- Bनिर्भीक
- Cनिरंकुश
- Dनिर्भय
Show answer
अवधारणा: 'निर्' उपसर्ग = रहित।
- निर् + दय = निर्दय = दया से रहित।
- निर्भीक/निर्भय = भय रहित; निरंकुश = बिना नियंत्रण।
ट्रिक: मूल शब्द देखें: दया → निर्दय, भय → निर्भय, अंकुश → निरंकुश।
उत्तर: (A) निर्दय
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – निर्दयSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q409.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए- जिसकी उत्पत्ति स्वयं हो
- Aपरस्वयंभू
- Bदुस्स्वयंभू
- Cस्वयंभू
- Dअस्वयंभू
Show answer
अवधारणा: 'भू' धातु = होना/जन्म लेना।
- अपने-आप जन्मा = स्वयंभू।
- बाकी तीन विकल्पों में उपसर्ग जोड़कर गढ़े गए शब्द हैं – हिंदी में इनका कोई प्रयोग नहीं।
याद रखें: 'स्वयंभू' ब्रह्मा और शिव के विशेषण के रूप में आता है।
उत्तर: (C) स्वयंभू
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – स्वयंभूSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q410.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए- जिसके हाथ में वीणा हो
- Aवीणापाणि
- Bपाणिवीणा
- Cचक्रपाणि
- Dपाणिचक्र
Show answer
अवधारणा: पाणि = हाथ; हाथ में रखी वस्तु पहले लिखी जाती है।
- वीणा + पाणि = वीणापाणि (सरस्वती)।
- चक्रपाणि = विष्णु (हाथ में चक्र); पाणिवीणा, पाणिचक्र – गलत क्रम।
याद रखें: इसी प्रकार: चक्रपाणि (विष्णु), शूलपाणि (शिव), वज्रपाणि (इंद्र)।
उत्तर: (A) वीणापाणि
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – वीणापाणिSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q411.निम्न में से किस वाक्य में ‘चेतन’ के सही विलोम शब्द का प्रयोग हुआ है?
- Aदूध भी सजीव होते हैं।
- Bचालक को सदैव जागरूक रहना चाहिए।
- Cदुर्घटना के कुछ समय तक करुणा सचेत अवस्था में था।
- Dये सभी जड़ पदार्थ हैं।
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अवधारणा: चेतन = चेतना वाला; विलोम जड़ = चेतना रहित।
- (D) में 'जड़ पदार्थ' – सही विलोम।
- सजीव, जागरूक, सचेत – सब 'चेतन' के निकट अर्थ वाले, विलोम नहीं।
याद रखें: जोड़ी याद रखें: चेतन–जड़, सजीव–निर्जीव।
उत्तर: (D) ये सभी जड़ पदार्थ हैं।
SSC GDHindiविलोम – चेतन / जड़SSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q412.रमेश ने गैस के गोदाम पर काम करना शुरू कर दिया है। वाक्य में ‘गैस’ शब्द है।
- Aतत्सम
- Bतद्भव
- Cविदेशी
- Dदेशज
Show answer
अवधारणा: स्रोत की दृष्टि से हिंदी शब्दों के चार वर्ग – तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी।
- 'गैस' अंग्रेज़ी से बिना बदले हिंदी में आया → विदेशी (आगत)।
- तत्सम/तद्भव संस्कृत से जुड़े; देशज स्थानीय बोलियों के।
याद रखें: अन्य अंग्रेज़ी आगत शब्द: बस, स्टेशन, डॉक्टर, रेडियो।
उत्तर: (C) विदेशी
SSC GDHindiशब्द-भेद (स्रोत) – विदेशी शब्दSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q413.‘मोहन’ शब्द में कौन-सी संज्ञा है?
- Aसमूहवाचक
- Bजातिवाचक
- Cव्यक्तिवाचक
- Dभाववाचक
Show answer
अवधारणा: जो संज्ञा एक ख़ास नाम बताए, वह व्यक्तिवाचक।
- 'मोहन' किसी एक ही आदमी का नाम → व्यक्तिवाचक।
- जातिवाचक – पूरी जाति (लड़का); समूहवाचक – झुंड (भीड़); भाववाचक – गुण/भाव (प्रेम)।
ट्रिक: जो नाम एक ही को बताए = व्यक्तिवाचक; पूरे वर्ग को = जातिवाचक।
उत्तर: (C) व्यक्तिवाचक
SSC GDHindiसंज्ञा – व्यक्तिवाचकSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q414.निम्नलिखित विकल्पों में से ‘मरण’ शब्द के लिए किस एक वाक्य में उचित विलोम का प्रयोग हुआ है?
- Aउसने अपना जीवन अच्छे से जिया है।
- Bकिसी पर जरूरत से ज्यादा विश्वास घातक होता है।
- Cतुमने किस विषय से स्नातक किया है?
- Dउसने सबकी मदद की है।
Show answer
अवधारणा: मरण = मृत्यु; विलोम = जीवन।
- (A) में 'जीवन' शब्द आया है – सही विलोम।
- घातक (जानलेवा) मरण जैसा ही भाव; स्नातक बस सुनने में मिलता-जुलता; मदद वाले वाक्य में कोई विलोम नहीं।
याद रखें: जोड़ी: जन्म–मरण, जीवन–मरण, अमर–मर्त्य।
उत्तर: (A) उसने अपना जीवन अच्छे से जिया है।
SSC GDHindiविलोम – मरण / जीवनSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
Q415.वह घर ____ बाहर आया। रिक्त स्थान के लिए उचित कारक चिह्न है-
- Aसे
- Bने
- Cमें
- Dपर
Show answer
अवधारणा: अलग होने का भाव = अपादान कारक, चिह्न 'से'।
- घर से बाहर आया – घर से अलगाव।
- 'ने' – कर्ता; 'में', 'पर' – अधिकरण (स्थान)।
याद रखें: 'से' दो कारकों का चिह्न है: करण (साधन – कलम से) और अपादान (अलगाव – पेड़ से गिरा)।
उत्तर: (A) से
SSC GDHindiकारक चिह्न – अपादान 'से'SSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रकृति के इस __(76)__ से पंत प्रारम्भ से ही खिंचते रहे। प्रकृति के स्वतंत्र परन्तु संयत, नियंत्रित, नियमित वातावरण ने ही उनके छंदों और भाषा का __(77)__ करके उनकी कला का भी निर्माण किया है। पंत ने स्वयं लिखा है कि ‘कविता करने की __(78)__ मुझे सबसे पहले प्रकृति निरीक्षण से मिली है, जिसका श्रेय मेरी जन्मभूमि कूर्मांचल प्रदेश को है; कवि जीवन से भी पहले, मुझे याद है, मैं घंटों एकान्त में बैठा, प्राकृतिक दृश्यों को एकटक देखा करता था और कोई अज्ञात आकर्षण मेरे भीतर एक अव्यक्त __(79)__ का जाल बुनकर मेरी चेतना को तन्मय कर देता था।’ प्रकृति से नातृत्व का परिचय स्थापित होने के कारण कवि की दृष्टि __(80)__ नहीं गयी और यही कारण है कि प्रकृति के साथ पंत की रागात्मकता बढ़ जाती है।
Q416.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसौंदर्य
- Bआकर्षण
- Cलागत
- Dमोह
Show answer
अवधारणा: खाली जगह के तुरंत बाद आई क्रिया 'खिंचते रहे' पर ध्यान दें।
- खींचने का गुण = आकर्षण → 'आकर्षण से खिंचते रहे'।
- सौंदर्य व मोह मिलते-जुलते लगते हैं, लेकिन खिंचाव सीधे 'आकर्षण' से जुड़ता है; लागत बेमेल।
ट्रिक: क्रिया के साथ बैठने वाला शब्द चुनें: आकर्षण → खिंचना।
उत्तर: (B) आकर्षण
SSC GDHindiगद्यांश रिक्त स्थान – आकर्षणSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रकृति के इस __(76)__ से पंत प्रारम्भ से ही खिंचते रहे। प्रकृति के स्वतंत्र परन्तु संयत, नियंत्रित, नियमित वातावरण ने ही उनके छंदों और भाषा का __(77)__ करके उनकी कला का भी निर्माण किया है। पंत ने स्वयं लिखा है कि ‘कविता करने की __(78)__ मुझे सबसे पहले प्रकृति निरीक्षण से मिली है, जिसका श्रेय मेरी जन्मभूमि कूर्मांचल प्रदेश को है; कवि जीवन से भी पहले, मुझे याद है, मैं घंटों एकान्त में बैठा, प्राकृतिक दृश्यों को एकटक देखा करता था और कोई अज्ञात आकर्षण मेरे भीतर एक अव्यक्त __(79)__ का जाल बुनकर मेरी चेतना को तन्मय कर देता था।’ प्रकृति से नातृत्व का परिचय स्थापित होने के कारण कवि की दृष्टि __(80)__ नहीं गयी और यही कारण है कि प्रकृति के साथ पंत की रागात्मकता बढ़ जाती है।
Q417.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aपरिष्कार
- Bनिर्माण
- Cशुद्धिकरण
- Dआविष्कार
Show answer
अवधारणा: 'भी निर्माण' बताता है कि रिक्त में निर्माण से अलग क्रिया है।
- छंद-भाषा पहले से मौजूद थे; प्रकृति ने उन्हें निखारा-सुधारा = परिष्कार।
- निर्माण – बाद में 'भी' के साथ आ चुका; शुद्धिकरण – सिर्फ़ गंदगी/दोष दूर करना; आविष्कार – कुछ नया खोजना।
ट्रिक: वाक्य में 'भी' से पता चलता है कि वही शब्द दोबारा नहीं आएगा।
उत्तर: (A) परिष्कार
SSC GDHindiगद्यांश रिक्त स्थान – परिष्कारSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रकृति के इस __(76)__ से पंत प्रारम्भ से ही खिंचते रहे। प्रकृति के स्वतंत्र परन्तु संयत, नियंत्रित, नियमित वातावरण ने ही उनके छंदों और भाषा का __(77)__ करके उनकी कला का भी निर्माण किया है। पंत ने स्वयं लिखा है कि ‘कविता करने की __(78)__ मुझे सबसे पहले प्रकृति निरीक्षण से मिली है, जिसका श्रेय मेरी जन्मभूमि कूर्मांचल प्रदेश को है; कवि जीवन से भी पहले, मुझे याद है, मैं घंटों एकान्त में बैठा, प्राकृतिक दृश्यों को एकटक देखा करता था और कोई अज्ञात आकर्षण मेरे भीतर एक अव्यक्त __(79)__ का जाल बुनकर मेरी चेतना को तन्मय कर देता था।’ प्रकृति से नातृत्व का परिचय स्थापित होने के कारण कवि की दृष्टि __(80)__ नहीं गयी और यही कारण है कि प्रकृति के साथ पंत की रागात्मकता बढ़ जाती है।
Q418.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aप्रेरणा
- Bइच्छा
- Cलालसा
- Dआदत
Show answer
अवधारणा: बाहरी स्रोत से 'मिलने' वाली चीज़ चाहिए।
- कवि को कविता लिखने की प्रेरणा प्रकृति को देखने से प्राप्त हुई – यही अर्थ बनता है।
- इच्छा व लालसा मन में उपजती हैं, बाहर से प्राप्त नहीं होतीं; आदत बार-बार करने से पड़ती है।
ट्रिक: 'प्रेरणा मिलना' पक्की जोड़ी है।
उत्तर: (A) प्रेरणा
SSC GDHindiगद्यांश रिक्त स्थान – प्रेरणाSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रकृति के इस __(76)__ से पंत प्रारम्भ से ही खिंचते रहे। प्रकृति के स्वतंत्र परन्तु संयत, नियंत्रित, नियमित वातावरण ने ही उनके छंदों और भाषा का __(77)__ करके उनकी कला का भी निर्माण किया है। पंत ने स्वयं लिखा है कि ‘कविता करने की __(78)__ मुझे सबसे पहले प्रकृति निरीक्षण से मिली है, जिसका श्रेय मेरी जन्मभूमि कूर्मांचल प्रदेश को है; कवि जीवन से भी पहले, मुझे याद है, मैं घंटों एकान्त में बैठा, प्राकृतिक दृश्यों को एकटक देखा करता था और कोई अज्ञात आकर्षण मेरे भीतर एक अव्यक्त __(79)__ का जाल बुनकर मेरी चेतना को तन्मय कर देता था।’ प्रकृति से नातृत्व का परिचय स्थापित होने के कारण कवि की दृष्टि __(80)__ नहीं गयी और यही कारण है कि प्रकृति के साथ पंत की रागात्मकता बढ़ जाती है।
Q419.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसौंदर्य
- Bरस
- Cदृश्य
- Dसृष्टि
Show answer
अवधारणा: 'अव्यक्त' (जो कहा न जा सके) के साथ कोई अमूर्त भाव ही बैठेगा।
- प्रकृति को एकटक निहारते कवि के मन में जो अनकहा जाल बनता था, वह सौंदर्य का था।
- दृश्य, सृष्टि – ठोस, आँखों से दिखने वाले; रस – काव्यशास्त्रीय शब्द, यहाँ बेमेल।
ट्रिक: प्रश्न 96 के विकल्पों में भी 'सौंदर्य' था – गद्यांश प्रकृति-सौंदर्य पर ही केंद्रित है।
उत्तर: (A) सौंदर्य
SSC GDHindiगद्यांश रिक्त स्थान – सौंदर्यSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रकृति के इस __(76)__ से पंत प्रारम्भ से ही खिंचते रहे। प्रकृति के स्वतंत्र परन्तु संयत, नियंत्रित, नियमित वातावरण ने ही उनके छंदों और भाषा का __(77)__ करके उनकी कला का भी निर्माण किया है। पंत ने स्वयं लिखा है कि ‘कविता करने की __(78)__ मुझे सबसे पहले प्रकृति निरीक्षण से मिली है, जिसका श्रेय मेरी जन्मभूमि कूर्मांचल प्रदेश को है; कवि जीवन से भी पहले, मुझे याद है, मैं घंटों एकान्त में बैठा, प्राकृतिक दृश्यों को एकटक देखा करता था और कोई अज्ञात आकर्षण मेरे भीतर एक अव्यक्त __(79)__ का जाल बुनकर मेरी चेतना को तन्मय कर देता था।’ प्रकृति से नातृत्व का परिचय स्थापित होने के कारण कवि की दृष्टि __(80)__ नहीं गयी और यही कारण है कि प्रकृति के साथ पंत की रागात्मकता बढ़ जाती है।
Q420.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aअसंवेदनशील
- Bसंवेदनशील
- Cसंवेदित
- Dसंविलित
Show answer
अवधारणा: 'नहीं' के साथ ऐसा शब्द चाहिए कि अर्थ सकारात्मक बने।
- प्रकृति से माँ जैसा रिश्ता बना, इसलिए कवि का देखना कभी संवेदना-शून्य नहीं रहा → असंवेदनशील + नहीं; इसी कारण प्रकृति से लगाव बढ़ा।
- 'संवेदनशील नहीं' लिखने पर अर्थ उलट जाता है; संवेदित, संविलित असंगत।
ट्रिक: दोहरा नकार (अ + नहीं) = सकारात्मक भाव – अगले वाक्यांश से मिलान कर लें।
उत्तर: (A) असंवेदनशील
SSC GDHindiगद्यांश रिक्त स्थान – असंवेदनशीलSSC GD 2025 · 13 Feb Shift 1