Q621.‘बहुत परिश्रम करना’ के लिए निम्नलिखित में से उपयुक्त मुहावरा है।
- Aअत्यधिक जुगाड़ लगाना
- Bआकाश-पाताल एक करना
- Cदिन-रात न होना
- Dआग में घी डालना
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अवधारणा: दिए गए भाव के लिए प्रचलित मुहावरा पहचानना।
- ‘आकाश-पाताल एक करना’ = किसी काम के लिए जी-तोड़ मेहनत करना, हर उपाय आज़माना।
- ‘आग में घी डालना’ = झगड़ा या गुस्सा और भड़काना – परिश्रम से संबंध नहीं।
- ‘अत्यधिक जुगाड़ लगाना’, ‘दिन-रात न होना’ मानक मुहावरे नहीं हैं।
याद रखें: इसी भाव के अन्य मुहावरे – एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना, दिन-रात एक करना, पसीना बहाना।
उत्तर: (B) आकाश-पाताल एक करना
SSC GDHindiIdiom – very hard workSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q622.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए- आकाश में विचरण करने वाला
- Aनभचर
- Bभूमिचर
- Cनिशाचर
- Dजलचर
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अवधारणा: ‘-चर’ प्रत्यय = चलने/विचरण करने वाला; पहला भाग स्थान बताता है।
- नभ (आकाश) + चर = नभचर – आकाश में विचरने वाला।
- जलचर = पानी में, भूमिचर/थलचर = ज़मीन पर रहने वाला।
- निशाचर = रात (निशा) में घूमने वाला – स्थान नहीं, समय बताता है।
ट्रिक: ‘चर’ से पहले वाला शब्द देखें – नभ = आकाश, तुरंत उत्तर।
उत्तर: (A) नभचर
SSC GDHindiOne-word substitution – नभचरSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q623.‘अभ्यागत’ का पर्याय है-
- Aअतीत
- Bअतिरिक्त
- Cमेहमान
- Dआगत
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अवधारणा: अभ्यागत = घर आया हुआ अतिथि।
- अतिथि का पर्याय – मेहमान, पाहुना।
- ‘आगत’ केवल ‘आया हुआ’ बताता है, अतिथि-भाव नहीं।
- अतीत = बीता समय; अतिरिक्त = अधिक/अलग।
याद रखें: अतिथि के पर्याय – अभ्यागत, आगंतुक, पाहुना, मेहमान।
उत्तर: (C) मेहमान
SSC GDHindiSynonym – अभ्यागतSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q624.निम्नलिखित मुहावरे के उचित अर्थ का चयन करें- ‘आँखों के आगे नाचना’
- Aहर समय याद रहना
- Bप्रतीक्षा करना
- Cदेखने को जी चाहना
- Dक्रोध करना
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अवधारणा: मुहावरे का लाक्षणिक अर्थ समझें।
- ‘आँखों के आगे नाचना’ = कोई दृश्य या व्यक्ति बार-बार स्मृति में आना, हर समय याद रहना।
- ‘देखने को जी चाहना’ इच्छा है, स्मृति नहीं।
- प्रतीक्षा करना, क्रोध करना – असंबंधित।
याद रखें: मिलते-जुलते मुहावरे – आँखें बिछाना (प्रतीक्षा/स्वागत), आँखें दिखाना (क्रोध करना)।
उत्तर: (A) हर समय याद रहना
SSC GDHindiIdiom meaning – आँखों के आगे नाचनाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q625.‘निंदा’ का विलोम शब्द है-
- Aबुराई
- Bस्तुति
- Cप्रताप
- Dस्फूर्ति
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अवधारणा: निंदा = किसी की बुराई करना।
- विपरीत भाव – प्रशंसा करना = स्तुति।
- ‘बुराई’ निंदा का समानार्थी है, विलोम नहीं।
- प्रताप = तेज/प्रभाव; स्फूर्ति = फुर्ती।
ट्रिक: विलोम पूछे जाने पर पहले समानार्थी विकल्प (बुराई) हटा दें।
उत्तर: (B) स्तुति
SSC GDHindiAntonym – निंदाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q626.‘तालाब का किनारा अत्यन्त सुंदर दिख रहा है।’ इस वाक्य में प्रयुक्त ‘किनारा’ शब्द का अनेकार्थी शब्द निम्न में से कौन-सा है?
- Aहाशिया
- Bअंदाज
- Cसलीका
- Dमाध्यम
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अवधारणा: एक शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं।
- ‘किनारा’ के अर्थ – तट, छोर, सिरा, तथा कागज़ का हाशिया।
- दिए गए चार शब्दों में से यह अर्थ ‘हाशिया’ ही देता है।
- अंदाज (अटकल), सलीका (शऊर), माध्यम (ज़रिया) – ‘किनारा’ से मेल नहीं।
याद रखें: ‘किनारा करना’ मुहावरा = अलग हो जाना, दूरी बना लेना।
उत्तर: (A) हाशिया
SSC GDHindiMultiple meanings – किनाराSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q627.‘चिंता यह है की देश का पुनरुथान कैसे होगा?’ उपरोक्त वाक्य में वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ हैं। अशुद्धि रहित वाक्य का चयन करें-
- Aचिंता यह है की देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
- Bचिंता यह है कि देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
- Cचिंता यह है कि देश का पुनरुथान कैसे होगा।
- Dचिंता यह है की देश का पुनरुथान कैसे होगा।
Show answer
अवधारणा: दो उपवाक्यों को जोड़ने के लिए ‘कि’; संबंध बताने के लिए ‘की’।
- ‘चिंता यह है ___ देश…’ – दो वाक्य जुड़ रहे हैं → ‘कि’।
- पुनः + उत्थान = पुनरुत्थान (‘त्थ’ आवश्यक) – ‘पुनरुथान’ गलत।
- दोनों सुधार केवल विकल्प (B) में हैं।
ट्रिक: ‘कि’ के बाद पूरा वाक्य आता है; ‘की’ के बाद संज्ञा (राम की किताब)।
उत्तर: (B) चिंता यह है कि देश का पुनरुत्थान कैसे होगा।
SSC GDHindiSpelling – कि/की, पुनरुत्थानSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q628.‘उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग तेईस ____ है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तत्सम शब्द है-
- Aकच्छज
- Bकोटि
- Cकुक्कुर
- Dकरोड़
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अवधारणा: संस्कृत से बिना बदले आए शब्द तत्सम; बदले रूप तद्भव।
- ‘करोड़’ का तत्सम रूप ‘कोटि’ है → ‘तेईस कोटि’।
- ‘करोड़’ अर्थ में सही है पर तद्भव है।
- कच्छज = कछुआ, कुक्कुर = कुत्ता – संख्या नहीं।
याद रखें: तत्सम–तद्भव जोड़े: कोटि–करोड़, अग्नि–आग, दुग्ध–दूध, हस्त–हाथ।
उत्तर: (B) कोटि
SSC GDHindiTatsam word – कोटिSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q629.‘स्वामी’ के लिए विलोम शब्द होगा-
- Aश्रद्धा
- Bश्रीमान
- Cदास
- Dदाता
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अवधारणा: स्वामी = मालिक।
- मालिक का उल्टा – सेवा करने वाला = दास।
- श्रीमान = आदरसूचक शब्द; दाता का विलोम याचक; श्रद्धा का विलोम घृणा/अश्रद्धा।
याद रखें: समान जोड़े – स्वामी–सेवक/दास, राजा–रंक, गुरु–शिष्य।
उत्तर: (C) दास
SSC GDHindiAntonym – स्वामीSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q630.‘जो शिव की उपासना करता हो’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द इनमें से कौन-सा है?
- Aशैव
- Bवैष्णव
- Cशाक्त
- Dभक्त
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अवधारणा: उपास्य देव से उपासक का नाम बनता है।
- शिव का उपासक → शैव।
- विष्णु का उपासक → वैष्णव; शक्ति (देवी) का उपासक → शाक्त।
- ‘भक्त’ सामान्य शब्द है, किसी विशेष देव का बोध नहीं।
ट्रिक: शिव → शैव, विष्णु → वैष्णव, शक्ति → शाक्त, गणपति → गाणपत्य – पहले स्वर में वृद्धि।
उत्तर: (A) शैव
SSC GDHindiOne-word substitution – शैवSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q631.निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए- सीमा की लिखावट हिंदी की बहुत सुंदर है।
- Aहिंदी की लिखावट
- Bहिंदी की
- Cहिंदी लिखावट की
- Dलिखावट की हिंदी
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अवधारणा: हिंदी में ‘का/की/के’ वाला शब्द अपने संबंधित संज्ञा से पहले आता है।
- ‘लिखावट हिंदी की’ पदक्रम दोष है।
- सही क्रम – ‘हिंदी की लिखावट’।
ट्रिक: पहले किसकी (हिंदी की), फिर क्या (लिखावट) – जैसे ‘राम की पुस्तक’।
उत्तर: (A) हिंदी की लिखावट
SSC GDHindiWord order – संबंधवाचक पदबंधSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q632.निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द पुल्लिंग नहीं है-
- Aकार्य
- Bजड़ता
- Cपोषण
- Dशोषण
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अवधारणा: जिन भाववाचक शब्दों के अंत में ‘ता’ लगा हो, वे प्रायः स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होते हैं (सरलता, मधुरता)।
- जड़ता → स्त्रीलिंग शब्द (उसकी जड़ता टूटी)।
- कार्य, पोषण, शोषण → पुल्लिंग (कार्य हुआ, शोषण होता है)।
ट्रिक: क्रिया लगाकर देखें – ‘बढ़ती है’ लगे तो स्त्रीलिंग, ‘होता है’ लगे तो पुल्लिंग।
उत्तर: (B) जड़ता
SSC GDHindiGender – words ending in -ताSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q633.‘हमारे संविधान में स्त्री के अधिकारों के सम्बन्ध में क्या प्रविधान है?’ उपरोक्त वाक्य के किस शब्द की वर्तनी अशुद्ध है?
- Aप्रविधान
- Bसम्बन्ध
- Cअधिकारों
- Dसंविधान
Show answer
अवधारणा: उपसर्ग + शब्द में संधि से शुद्ध रूप बनता है।
- प्र + अवधान → अ + अ = आ → प्रावधान।
- ‘प्रविधान’ अशुद्ध है।
- संविधान, सम्बन्ध (संबंध), अधिकारों – सब शुद्ध।
याद रखें: दीर्घ संधि के समान उदाहरण – प्र + आचार्य = प्राचार्य, प्र + अर्थना = प्रार्थना।
उत्तर: (A) प्रविधान
SSC GDHindiSpelling – प्रावधानSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q634.‘आपके यहाँ मेरे लिए कुछ ____ हो तो बताइये, मैं इस समय बेकार हूँ।’ उचित सार्थक और निरर्थक शब्द-युग्म वाले विकल्प का चयन करके उपरोक्त वाक्य पूर्ण करें-
- Aराशन-पानी
- Bमीठा-सीठा
- Cकपड़ा-लत्ता
- Dकाम-वाम
Show answer
अवधारणा: ऐसे युग्म में पहला शब्द सार्थक, दूसरा केवल तुक मिलाने वाला निरर्थक शब्द होता है।
- ‘काम-वाम’ – ‘काम’ सार्थक, ‘वाम’ यहाँ निरर्थक तुक।
- वाक्य में वक्ता बेकार है, अतः उसे काम चाहिए – अर्थ भी मेल खाता है।
- राशन-पानी, कपड़ा-लत्ता, मीठा-सीठा – दोनों शब्द सार्थक।
ट्रिक: दूसरा शब्द प्रायः ‘व/श/स’ से तुक मिलाता है – चाय-वाय, पानी-वानी, काम-वाम।
उत्तर: (D) काम-वाम
SSC GDHindiMeaningful + meaningless word pairSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
Q635.दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्दों के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
- Aज़िया ने चतुराई से दुश्मन को परास्त कर दिया।
- Bगोपाल और रहीम की मित्रता बहुत पुरानी है।
- Cकोई अपना ही कई बार आपका सबसे बड़ा नुकसान कर देता है।
- Dअच्छा मित्र मिल जाना किस्मत की बात है।
Show answer
अवधारणा: संज्ञा किसी वस्तु, गुण या भाव का नाम है; सर्वनाम नाम के स्थान पर आता है।
- चतुराई, मित्रता, किस्मत – भाववाचक संज्ञाएँ।
- ‘अपना’ – निजवाचक सर्वनाम, संज्ञा नहीं।
- अतः संज्ञा की दृष्टि से वाक्य (C) अशुद्ध है।
ट्रिक: ‘-आई, -ता’ जैसे प्रत्यय (चतुराई, मित्रता) भाववाचक संज्ञा के संकेत हैं; ‘अपना, आप, स्वयं’ निजवाचक सर्वनाम।
उत्तर: (C) कोई अपना ही कई बार आपका सबसे बड़ा नुकसान कर देता है।
SSC GDHindiNoun vs pronoun identificationSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
Q636.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aशिकंजे
- Bअधीन
- Cअंतर्गत
- Dअनाधीन
Show answer
अवधारणा: परसर्ग ‘के’ के साथ बैठने वाला और प्रसंग से मेल खाने वाला शब्द चुनें।
- अस्तित्ववाद: मनुष्य किसी बाहरी सत्ता पर निर्भर नहीं → ‘के अधीन नहीं मानते’।
- ‘अंतर्गत’ = किसी वर्ग/सीमा के भीतर – निर्भरता का भाव नहीं।
- ‘शिकंजे’ से पहले ‘के’ नहीं, बाद में ‘में’ जमता है; ‘अनाधीन’ मानक शब्द नहीं।
ट्रिक: आगे ‘भाग्य का निर्माता स्वयं’ कहा गया है – यानी स्वतंत्रता; इसका उल्टा ‘अधीनता’ है जिसे नकारा गया।
उत्तर: (B) अधीन
SSC GDHindiCloze – के अधीनSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
Q637.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aविकासकर्ता
- Bव्याख्याता
- Cप्रस्तुतकर्ता
- Dनिर्माता
Show answer
अवधारणा: अस्तित्ववादी सोच में इंसान अपनी तक़दीर ख़ुद गढ़ता है।
- निर्माता = बनाने वाला; तक़दीर गढ़ने वाले के लिए सबसे उचित शब्द।
- व्याख्याता, प्रस्तुतकर्ता – भाग्य के साथ अर्थ नहीं बनता।
- ‘विकासकर्ता’ भी अटपटा – भाग्य बनाया जाता है, विकसित नहीं।
ट्रिक: आगे ‘उत्तरदायी स्वयं’ लिखा है – जो ज़िम्मेदार है वही बनाने वाला भी है।
उत्तर: (D) निर्माता
SSC GDHindiCloze – भाग्य का निर्माताSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
Q638.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aजीवित
- Bपरतंत्र
- Cस्वच्छंद
- Dआनन्दित
Show answer
अवधारणा: गद्यांश का केंद्रीय भाव स्वतंत्रता और स्व-उत्तरदायित्व है।
- रिक्त स्थान ऐसा गुण माँगता है जो आत्म-बोध से ही मिलता है → आज़ादी का भाव।
- स्वच्छंद = अपनी इच्छा से चलने वाला, स्वतंत्र।
- ‘परतंत्र’ भाव उलट देगा; जीवित, आनन्दित प्रसंग से बाहर।
ट्रिक: ‘नहीं हो सकता’ नकारात्मक है – सकारात्मक गुण (स्वतंत्र) ही भरें, नकारात्मक (परतंत्र) नहीं।
उत्तर: (C) स्वच्छंद
SSC GDHindiCloze – स्वच्छंदSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
Q639.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aवार्ता
- Bयोग्यता
- Cलालसा
- Dलालच
Show answer
अवधारणा: परसर्ग ‘की’ बताता है कि अगला शब्द स्त्रीलिंग हो; साथ ही अर्थ भी बैठे।
- लालसा (स्त्रीलिंग) = गहरी चाह → ‘की’ के साथ ठीक बैठता है।
- लालच पुल्लिंग है → ‘सुख का लालच’ होता, ‘की’ नहीं।
- वार्ता (बातचीत), योग्यता (क्षमता) – प्रसंग से बाहर।
ट्रिक: परसर्ग (का/की/के) देखकर लिंग से ही आधे विकल्प हटाएँ।
उत्तर: (C) लालसा
SSC GDHindiCloze – सुख की लालसाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्तित्ववादी, व्यक्ति का अस्तित्व किसी बाह्य सत्ता के __(76)__ नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य अपने भाग्य का __(77)__ तथा अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी स्वयं है। बिना अस्तित्वबोध के मनुष्य सच्चे अर्थों में __(78)__ भी नहीं हो सकता। अस्तित्ववादी सुख की __(79)__ को ही निरर्थक मानते हैं। उनके लिए किसी प्रकार की भी सामाजिक, धार्मिक, नैतिक, राजनीतिक, अथवा वैज्ञानिक __(80)__ मनुष्य को न तो पूर्णतः संतुष्ट कर सकती है और न सुखी।
Q640.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aउन्नति
- Bखोज
- Cपराकाष्ठा
- Dअवनति
Show answer
अवधारणा: रिक्त से पहले आए विशेषणों की सूची के साथ सहज रूप से बैठने वाली संज्ञा चुनें।
- ‘वैज्ञानिक/सामाजिक उन्नति’ – सहज और प्रचलित प्रयोग।
- भाव: किसी भी क्षेत्र की प्रगति इंसान को पूर्ण संतोष नहीं दे सकती।
- अवनति अर्थ उलटती है; खोज, पराकाष्ठा इन सब विशेषणों के साथ नहीं बैठते।
ट्रिक: ‘संतुष्ट नहीं कर सकती’ – जो चीज़ सामान्यतः संतोष देती है (उन्नति) वही यहाँ नकारी जा रही है।
उत्तर: (A) उन्नति
SSC GDHindiCloze – उन्नतिSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 2