Q641.निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान करें। हाथी सूखी टहनीयां खा रहा है।
- Aहाथी
- Bखा
- Cसूखी
- Dटहनीयां
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अवधारणा: जो स्त्रीलिंग शब्द 'ई' पर खत्म हों, उनके बहुवचन में अंत 'इयाँ' हो जाता है।
- टहनी → टहन + इयाँ = टहनियाँ (ई की मात्रा छोटी 'ि' हो जाती है)।
- 'टहनीयां' में बड़ी ई और बिंदु — दोनों गलत; चंद्रबिंदु चाहिए।
- हाथी, सूखी, खा — सही वर्तनी।
ट्रिक: चिट्ठी → चिट्ठियाँ, रोटी → रोटियाँ — 'ी' हटकर 'ियाँ'।
उत्तर: (D) टहनीयां
SSC GDHindiSpelling – plural of टहनीSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q642.निम्नलिखित वाक्य में अशुद्ध शब्द या वाक्यांश है- मैं मेरा कलम से लिखता हूँ।
- Aसे
- Bकलम
- Cलिखता
- Dमेरा
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अवधारणा: कर्ता अपनी ही वस्तु की बात करे तो 'मेरा' नहीं, 'अपना/अपनी' आता है।
- कर्ता 'मैं' है और कलम भी उसी की है → निजवाचक सर्वनाम चाहिए।
- 'कलम' स्त्रीलिंग → 'अपनी कलम'।
- शुद्ध रूप: मैं अपनी कलम से लिखता हूँ।
ट्रिक: कर्ता = स्वामी हो तो मेरा/तेरा/उसका की जगह 'अपना'।
उत्तर: (D) मेरा
SSC GDHindiPronoun – अपना (reflexive)SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q643.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द का चयन कीजिए- ‘इन्द्रियों को वश में करने वाला’
- Aइन्द्रियजित
- Bइन्द्रजीत
- Cइन्द्रियनिग्रह
- Dइन्द्रियातीत
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अवधारणा: इन्द्रिय + जित (जीतने वाला) = जिसने इन्द्रियाँ जीत ली हों।
- इन्द्रियजित = इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति।
- इन्द्रजीत = मेघनाद (इन्द्र को जीतने वाला) — भ्रम वाला विकल्प।
- इन्द्रियनिग्रह = नियंत्रण की क्रिया; इन्द्रियातीत = इन्द्रियों से परे।
ट्रिक: 'वाला' (व्यक्ति) पूछा हो तो क्रिया/भाव वाले शब्द (निग्रह) हटा दें।
उत्तर: (A) इन्द्रियजित
SSC GDHindiOne-word substitution – इन्द्रियजितSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q644.‘रात्रि में गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए।’ वाक्य में रेखांकित शब्द की शुद्ध वर्तनी है-
- Aगरीष्ट
- Bगरीश्ठ
- Cगरीष्ठ
- Dगरिष्ठ
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अवधारणा: 'इष्ठ' प्रत्यय वाले शब्दों में छोटी 'ि' और अंत में 'ष्ठ' आता है।
- गरिष्ठ = भारी, देर से पचने वाला।
- 'रि' में छोटी इ, अंत में ष + ठ = 'ष्ठ'।
- बाकी विकल्पों में बड़ी ई, 'ष्ट' या 'श्ठ' की गलती है।
ट्रिक: श्रेष्ठ, वरिष्ठ, कनिष्ठ, घनिष्ठ — सबमें 'ष्ठ'।
उत्तर: (D) गरिष्ठ
SSC GDHindiSpelling – गरिष्ठSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q645.निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित पद के बदले कौन-सा विकल्प उपयुक्त है? निराला को अभिनंदन ग्रंथ प्रदान किया गया।
- Aउपहार किया गया
- Bपुरस्कृत की गई
- Cभेंट किया गया
- Dदान की गई
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अवधारणा: सम्मान में ग्रंथ सौंपने के लिए 'भेंट करना' उपयुक्त प्रयोग है।
- अभिनंदन ग्रंथ आदरपूर्वक दिया जाता है → 'भेंट किया गया'।
- 'ग्रंथ' पुल्लिंग है, अतः 'की गई' वाले विकल्प (B, D) गलत।
- 'उपहार किया' नहीं, 'उपहार दिया' बोलते हैं।
ट्रिक: लिंग जाँचें: ग्रंथ (पुल्लिंग) → 'किया गया'; दो विकल्प तुरंत हटते हैं।
उत्तर: (C) भेंट किया गया
SSC GDHindiAppropriate usage – भेंट किया गयाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q646.‘वृक्ष’ का पर्याय निम्न में से है-
- Aइषु
- Bझख
- Cभर्ता
- Dगाछ
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अवधारणा: समान अर्थ वाला शब्द पहचानें।
- वृक्ष के पर्याय: गाछ, तरु, द्रुम, पादप, विटप।
- इषु = बाण, झख = मछली, भर्ता = पति।
- अतः 'गाछ' सही।
याद रखें: 'गाछ' पूर्वी बोलियों (बंगाल/बिहार) में पेड़ के लिए प्रचलित है।
उत्तर: (D) गाछ
SSC GDHindiSynonym – वृक्षSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q647.मुहावरे और उसके अर्थ के लिए सही विकल्प चुनें। कलम तोड़ना
- Aकलम तोड़ देना
- Bजैसा-तैसा लिखना
- Cअच्छा नहीं लिखना
- Dबढ़िया लिखना
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अवधारणा: मुहावरे का अर्थ लाक्षणिक होता है, शाब्दिक नहीं।
- कलम तोड़ना = अत्यंत उत्कृष्ट लेखन करना।
- विकल्प (A) केवल शाब्दिक अर्थ है।
- (B) और (C) उल्टा अर्थ देते हैं।
ट्रिक: मुहावरे के प्रश्न में शब्दशः अर्थ वाला विकल्प प्रायः गलत होता है।
उत्तर: (D) बढ़िया लिखना
SSC GDHindiIdiom – कलम तोड़नाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q648.दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्दों के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
- Aआपकी समझ तो अपूर्व है।
- Bहर व्यक्ति में देवत्व और पशुत्व दोनों ही रहते हैं।
- Cगीता तेजी से लम्बी हो रही है।
- Dबातचीत में मिठास रखो, सब काम बनते जाएँगे।
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अवधारणा: जहाँ संज्ञा चाहिए वहाँ विशेषण का प्रयोग अशुद्ध है।
- समझ, मिठास आदि भाव/गुण के नाम हैं — तीनों वाक्य ठीक।
- 'लम्बी' विशेषण है; संज्ञा रूप 'लम्बाई' होगा।
- संज्ञा के रूप में: गीता की ऊँचाई (लम्बाई) में तेज़ वृद्धि।
ट्रिक: -त्व, -आस, -आई जैसे प्रत्यय भाववाचक संज्ञा बनाते हैं (लम्ब → लम्बाई)।
उत्तर: (C) गीता तेजी से लम्बी हो रही है।
SSC GDHindiNoun – abstract noun usageSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q649.दिए गए शब्द का सही पर्यायवाची शब्द पहचानिए- विनीत
- Aप्रणत
- Bहितय
- Cअजय
- Dविजय
Show answer
अवधारणा: समान अर्थ वाला शब्द चुनें।
- विनीत = नम्र, शिष्ट।
- प्रणत (प्र + नत) = झुका हुआ, विनम्र → समानार्थी।
- अजय = अजेय, विजय = जीत; 'हितय' मानक शब्द नहीं।
ट्रिक: 'नत' (झुका) वाला शब्द विनम्रता दर्शाता है: प्रणत, विनत, नत।
उत्तर: (A) प्रणत
SSC GDHindiSynonym – विनीतSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q650.‘कबीर _____ काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं।’ रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त तद्भव शब्द है-
- Aनिर्गुण
- Bभक्त
- Cसगुण
- Dनिरगुन
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अवधारणा: तत्सम (संस्कृत रूप) बदलकर सरल बोलचाल रूप बने तो तद्भव कहलाता है।
- कबीर निर्गुण भक्ति धारा के कवि हैं।
- 'निर्गुण' तत्सम है, उसका तद्भव 'निरगुन'।
- प्रश्न तद्भव माँग रहा है → निरगुन।
ट्रिक: संयुक्त अक्षर टूटे और 'ण' → 'न' हो जाए, तो तद्भव: कर्ण → कान, निर्गुण → निरगुन।
उत्तर: (D) निरगुन
SSC GDHindiTadbhav word – निरगुनSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q651.‘कोयल’ का पर्याय है-
- Aकांता
- Bसुता
- Cश्यामा
- Dपरहेज
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अवधारणा: कोयल के पर्यायवाची पहचानें।
- कोयल = पिक, कोकिल, श्यामा, परभृत।
- श्यामा = काले रंग वाली — कोयल के रंग से।
- कांता = पत्नी, सुता = बेटी, परहेज = संयम।
याद रखें: 'परभृत' = जिसे दूसरे (कौआ) ने पाला — कोयल के लिए प्रसिद्ध पर्याय।
उत्तर: (C) श्यामा
SSC GDHindiSynonym – कोयलSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q652.‘आम के बागों में ______ बोल रही है।’ रिक्त स्थान की पूर्ति तत्सम शब्द द्वारा कीजिए।
- Aकोकिला
- Bकोयल
- Cकोयलिया
- Dकोकिल
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अवधारणा: तत्सम = संस्कृत से बिना बदले आया शब्द; लिंग भी वाक्य से मिलना चाहिए।
- कोकिला — तत्सम और स्त्रीलिंग।
- कोयल तद्भव, कोयलिया लोकरूप।
- कोकिल तत्सम है पर पुल्लिंग; 'बोल रही है' स्त्रीलिंग क्रिया से मेल नहीं।
ट्रिक: दो जाँच — तत्सम + स्त्रीलिंग — दोनों केवल 'कोकिला' में।
उत्तर: (A) कोकिला
SSC GDHindiTatsam word – कोकिलाSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q653.निम्नलिखित में से कौन-सा स्थानवाचक क्रिया-विशेषण नहीं है?
- Aअभी
- Bकिधर
- Cयहाँ
- Dवहाँ
Show answer
अवधारणा: जगह बताने वाले क्रियाविशेषण 'कहाँ?' का और समय बताने वाले 'कब?' का उत्तर देते हैं।
- यहाँ, वहाँ, किधर → जगह बताते हैं।
- 'अभी' → समय बताता है (कालवाचक)।
- अतः 'अभी' जगह नहीं बताता।
ट्रिक: शब्द से पहले 'कहाँ?' पूछें — जो उत्तर न दे, वह अलग।
उत्तर: (A) अभी
SSC GDHindiAdverb of place vs timeSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q654.‘इस वर्ष इस्पात के ______ में इजाफा हुआ है।’ वाक्य के रिक्त स्थान के लिए आयात शब्द का सर्वाधिक उपयुक्त विलोम शब्द चुनिए-
- Aखरीद
- Bबिक्री
- Cखपत
- Dनिर्यात
Show answer
अवधारणा: विलोम = विपरीत अर्थ वाला शब्द।
- आयात = दूसरे देश से माल मँगाना।
- निर्यात = अपने देश से बाहर माल भेजना → विलोम।
- खरीद, बिक्री, खपत — व्यापार के शब्द हैं, पर विलोम नहीं।
ट्रिक: 'आ' (अंदर आना) ↔ 'निर्' (बाहर जाना): आगमन ↔ निर्गमन, आयात ↔ निर्यात।
उत्तर: (D) निर्यात
SSC GDHindiAntonym – आयातSSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
Q655.दिए गए वाक्य में शब्द या वाक्य खण्ड को बदलिए। उसके चाचा को लड़की हुई है।
- Aउसके चाचा के लड़की हुई है।
- Bउसके चाचा की लड़की हुई है।
- Cउसके चाचा को लड़की हुई है।
- Dउसके चाचा की सिर्फ लड़की हुई है।
Show answer
अवधारणा: संतान-जन्म की सूचना में 'के' का प्रयोग होता है: किसी के बेटा/बेटी होना।
- 'को' संप्रदान/कर्म का चिह्न — यहाँ उचित नहीं।
- 'की लड़की' लिखने से अर्थ 'उनकी बेटी' हो जाता है।
- अतः शुद्ध: उसके चाचा के लड़की हुई है।
ट्रिक: जन्म हुआ = 'के' (राम के पुत्र हुआ); संबंध दिखाना = 'की/का'।
उत्तर: (A) उसके चाचा के लड़की हुई है।
SSC GDHindiSentence correction – के (birth news)SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
Q656.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aअनुभवों
- Bकष्ट
- Cस्वरूप
- Dसत्य
Show answer
अवधारणा: रिक्त स्थान के बाद/पहले के संकेत शब्द देखें।
- 'जीवन के ___ का निचोड़' → बहुवचन संज्ञा चाहिए।
- अगला वाक्य 'अनुभव…' से शुरू होता है — पुष्टि।
- अतः 'अनुभवों'।
ट्रिक: 'के' के साथ तिर्यक बहुवचन रूप (-ओं) बैठता है।
उत्तर: (A) अनुभवों
SSC GDHindiCloze – blank 76SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
Q657.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aबाधक
- Bआवश्यक
- Cव्यर्थ
- Dसहायक
Show answer
अवधारणा: लेखक का मत: यथार्थ और आदर्श एक-दूसरे के पूरक हैं।
- यथार्थ, आदर्श की संरचना में मदद करता है।
- '___ में सहायक होना' — सही प्रयोग।
- बाधक, व्यर्थ — लेखक के मत के विरुद्ध।
ट्रिक: 'करने में' के साथ स्वाभाविक जोड़ी: 'सहायक होना'।
उत्तर: (D) सहायक
SSC GDHindiCloze – blank 77SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
Q658.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसुखद
- Bकष्टप्रद
- Cआवश्यक
- Dअनावश्यक
Show answer
अवधारणा: 'एवं' से जुड़े दोनों विशेषण एक ही भाव (नकारात्मक) के होते हैं।
- आदर्श के बिना यथार्थ 'अमूर्त' (नकारात्मक भाव) बनता है।
- उसी दिशा का शब्द: कष्टप्रद (दुःख देने वाला)।
- सुखद, आवश्यक सकारात्मक; अनावश्यक लेखक की बात के विरुद्ध।
ट्रिक: 'और/एवं' के दोनों ओर समान भाव के शब्द रखें।
उत्तर: (B) कष्टप्रद
SSC GDHindiCloze – blank 78SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
Q659.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aपवित्र
- Bआदर्श
- Cउत्तक
- Dपुष्प
Show answer
अवधारणा: 'एक ओर… दूसरी ओर…' दो विरोधी पक्ष दिखाता है।
- एक ओर चरम यथार्थ → दूसरी ओर उसका प्रतिपक्ष 'आदर्श'।
- अगला वाक्य (मँझधार–किनारा) भी यथार्थ–आदर्श की जोड़ी देता है।
- पवित्र, पुष्प प्रसंग से बाहर; 'उत्तक' अमानक।
ट्रिक: पूरे गद्यांश का विषय ही 'यथार्थ बनाम आदर्श' है।
उत्तर: (B) आदर्श
SSC GDHindiCloze – blank 79SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
साहित्य में यथार्थ-चित्रण होना स्वाभाविक भी है और आवश्यक भी क्योंकि वही साहित्य उच्च कोटि का साहित्य पाया जाता है जिसमें जीवन के __(76)__ का निचोड़ हो। अनुभव यथार्थ के धरातल पर ही सम्भव होते हैं, किन्तु यही यथार्थ अन्ततः अप्रत्यक्ष रूप से आदर्श की संरचना करने में __(77)__ होता है। साहित्य का तो अर्थ ही है सबका हित करना और यथार्थ से सदैव सबका हित संभव नहीं हो सकता। अतः यथार्थ के साथ यदि आदर्श का सामंजस्य नहीं होता तो यथार्थ नितान्त अमूर्त एवं __(78)__ बन कर रह जाता। रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में यदि एक ओर जीवन के चरम यथार्थ को दर्शाया गया है, तो दूसरी ओर __(79)__ की भी प्रतिष्ठा की गई है। यथार्थ जीवन रूपी सागर की मँझधार है तो आदर्श किनारा। साहित्य का प्रयोजन वास्तविक जीवन का यथातथ्यात्मक चित्रण करना नहीं है अपितु जीवन के __(80)__ स्वरूप को चित्रित करना है।
Q660.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aअच्छा
- Bश्रेष्ठ
- Cकुछ
- Dसही
Show answer
अवधारणा: साहित्य का लक्ष्य जीवन का उत्तम (आदर्श) रूप दिखाना है।
- 'यथातथ्य चित्रण नहीं, अपितु…' → कुछ ऊँचा/आदर्श रूप।
- 'श्रेष्ठ स्वरूप' यही भाव देता है।
- अच्छा, सही — साधारण; 'कुछ' अधूरा अर्थ देता है।
ट्रिक: साहित्यिक गद्यांश में तत्सम, गंभीर शब्द (श्रेष्ठ) अधिक उपयुक्त।
उत्तर: (B) श्रेष्ठ
SSC GDHindiCloze – blank 80SSC GD 2025 · 7 Feb Shift 1