Q101.रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित विकल्प चुनिए-
आज के नेताओं और स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले के नेताओं की कोई बराबरी नहीं हो सकती।
- Aसमरूपता
- Bसमीपता
- Cतुलना
- Dसमता
Show answer
अवधारणा: रेखांकित शब्द की जगह वह शब्द रखें जो वाक्य के भाव में सबसे सही बैठे।
- वाक्य दो युगों के नेताओं को एक-दूसरे के सामने रखकर परख रहा है – यह 'तुलना' है।
- 'कोई तुलना नहीं हो सकती' एक स्वाभाविक प्रयोग है।
- समता/समरूपता = एक जैसा होना (परिणाम); समीपता = निकटता – प्रसंग से मेल नहीं।
ट्रिक: प्रत्येक विकल्प को 'की कोई ___ नहीं हो सकती' में रखकर बोलें – सबसे सहज वाक्य 'तुलना' से बनता है।
उत्तर: (C) तुलना
SSC GDHindiशब्द प्रतिस्थापन – प्रसंगानुसार शब्दSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q102.‘सरस’ शब्द का विलोम शब्द क्या होगा?
- Aनीरस
- Bरसिक
- Cकठोर
- Dसरल
Show answer
अवधारणा: 'स' (सहित) का विलोम 'नि:' (रहित) उपसर्ग से बनता है।
- सरस = रस से भरा हुआ।
- नीरस (निः + रस) = जिसमें रस न हो।
- रसिक समान भाव वाला है; कठोर ↔ कोमल, सरल ↔ कठिन।
ट्रिक: स- वाले शब्द का विलोम प्रायः नि-/निर्- से: सगुण–निर्गुण, सजीव–निर्जीव, सरस–नीरस।
उत्तर: (A) नीरस
SSC GDHindiविलोम शब्द – सरसSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q103.निम्न में से ‘होनी’ का विलोम है-
- Aअसर
- Bअनहोनी
- Cअहोनी
- Dहोनहार
Show answer
अवधारणा: 'अन' उपसर्ग लगाकर निषेध वाला विलोम बनता है।
- होनी = जो होकर रहे, भवितव्य।
- अनहोनी = जो सामान्यतः न हो सके।
- 'अहोनी' मानक शब्द नहीं; 'होनहार' का अर्थ प्रतिभाशाली है।
याद रखें: प्रसिद्ध लोकोक्ति – 'होनी को कौन टाल सकता है'; इसी जोड़े में 'होनी-अनहोनी' बोला जाता है।
उत्तर: (B) अनहोनी
SSC GDHindiविलोम शब्द – होनीSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q104.‘मेज पर एक डिब्बा रखा है, जिसमें मिठाई रखी है।’ वाक्य में प्रयुक्त कौन-सा शब्द देशज है?
- Aमिठाई
- Bडिब्बा
- Cरखी
- Dमेज
Show answer
अवधारणा: देशज शब्द स्थानीय बोलियों से बने होते हैं – न संस्कृत मूल, न विदेशी।
- मेज – पुर्तगाली/फ़ारसी से आया विदेशी शब्द।
- मिठाई (मिष्ट से) और रखी – तद्भव।
- डिब्बा – लोकभाषा से उपजा देशज शब्द।
याद रखें: अन्य देशज शब्द: लोटा, पगड़ी, खिड़की, झोला, ठेठ, जूता।
उत्तर: (B) डिब्बा
SSC GDHindiशब्द-भेद (उत्पत्ति) – देशजSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q105.निम्नलिखित में से किस वाक्य में एक-दूसरे के उचित विलोम शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है?
- Aश्रृंगार के दो भेद हैं-संयोग और वियोग।
- Bविशिष्ट-शिष्ट मेहमान के लिए विशेष प्रबंध है।
- Cयश-अपयश कर्म पर निर्भर करता है।
- Dस्थावर और जंगम एक-दूसरे के विलोम शब्द हैं।
Show answer
अवधारणा: वह वाक्य खोजें जिसमें जोड़ा सही विलोम नहीं है।
- संयोग–वियोग, यश–अपयश, स्थावर–जंगम (अचल–चल) – तीनों उचित विलोम।
- विशिष्ट का विलोम 'सामान्य' है और शिष्ट का 'अशिष्ट'।
- अतः 'विशिष्ट–शिष्ट' विलोम युग्म नहीं।
ट्रिक: जिस जोड़े में दोनों शब्दों का भाव सकारात्मक हो, वह विलोम नहीं हो सकता।
उत्तर: (B) विशिष्ट-शिष्ट मेहमान के लिए विशेष प्रबंध है।
SSC GDHindiविलोम शब्द युग्म – अशुद्ध प्रयोगSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
- Aतोते का
- Bमुर्गे का
- Cकोयल का
- Dमोर का
Show answer
अवधारणा: सुआ, संस्कृत 'शुक' से बना तद्भव शब्द है।
- सुआ = सुग्गा = तोता।
- तोते के पर्याय: शुक, कीर, सुग्गा।
याद रखें: कोयल – पिक, कोकिल; मोर – मयूर, केकी; मुर्गा – कुक्कुट, ताम्रचूड़।
उत्तर: (A) तोते का
SSC GDHindiपर्यायवाची – सुआSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q107.‘मैंने अपने पूज्य पिताजी को एक पत्र लिखकर यहाँ की स्थिती से अवगत करा दिया है।’ उपरोक्त वाक्य के किस भाग में वर्तनी संबंधी अशुद्धि है?
- Aअवगत करा दिया है
- Bयहाँ की स्थिती से
- Cएक पत्र लिखकर
- Dमैंने अपने पूज्य पिताजी को
Show answer
अवधारणा: '-ति' से अंत होने वाले संस्कृत स्त्रीलिंग शब्दों में अंत में छोटी इ लगती है।
- 'स्थिती' अशुद्ध है; शुद्ध रूप 'स्थिति' है।
- बाकी तीन भाग शुद्ध हैं।
ट्रिक: गति, मति, नीति, रीति, स्थिति, प्रकृति – सबका अंत छोटी 'इ' से।
उत्तर: (B) यहाँ की स्थिती से
SSC GDHindiवर्तनी शुद्धि – स्थितिSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q108.‘अरे भगवान! मेरी रक्षा करो।’ वाक्य-शुद्धि हेतु रेखांकित स्थान पर उचित कारक होगा-
- Aसे
- Bपर
- Cहे
- Dके लिए
Show answer
अवधारणा: किसी को पुकारने के लिए संबोधन कारक के चिह्न – हे, अरे, ओ – प्रयुक्त होते हैं।
- ईश्वर को आदरपूर्वक पुकारना है, इसलिए 'हे' उचित है।
- 'अरे' में अनादर/आश्चर्य का भाव है।
- से, पर, के लिए अन्य कारकों के चिह्न हैं।
ट्रिक: ईश्वर व बड़ों के लिए 'हे', बराबर या छोटों के लिए 'अरे'।
उत्तर: (C) हे
SSC GDHindiसंबोधन कारकSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q109.‘गाल फुलाना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
- Aगुस्सा करना
- Bअधिक खा लेना
- Cभूख लगना
- Dरूठ जाना
Show answer
अवधारणा: मुहावरे का लाक्षणिक अर्थ लिया जाता है, शाब्दिक नहीं।
- गाल फुलाना = रूठ जाना, नाराज़ होकर चुप हो जाना।
- उदाहरण: खिलौना न मिलने पर मुन्नी गाल फुलाकर बैठ गई।
- 'गुस्सा करना' में क्रोध खुलकर दिखता है, यहाँ भाव रूठने का है।
याद रखें: मिलता-जुलता मुहावरा – 'मुँह फुलाना' (नाराज़ होना)।
उत्तर: (D) रूठ जाना
SSC GDHindiमुहावरा – गाल फुलानाSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q110.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
जो चिरकाल तक रहे
- Aअस्थाई
- Bचिरस्थायी
- Cलगातार
- Dनिरंतर
Show answer
अवधारणा: चिर = लंबे समय तक; स्थायी = टिकने वाला।
- चिर + स्थायी = चिरस्थायी, जो बहुत समय तक बना रहे।
- अस्थाई इसका उल्टा है; लगातार/निरंतर बिना रुके होने का भाव देते हैं, लंबी आयु का नहीं।
ट्रिक: वाक्यांश में 'चिर' है, तो उत्तर में भी 'चिर' खोजें।
उत्तर: (B) चिरस्थायी
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – चिरस्थायीSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q111.रिक्त स्थान की पूर्ति तत्सम शब्द से करें-
प्राचीन काल से पानी के घड़ों का निर्माण ____ से होता है।
- Aसोना
- Bमिट्टी
- Cमृत्तिका
- Dलोहा
Show answer
अवधारणा: तत्सम = संस्कृत से बिना बदले आए शब्द; तद्भव = बदले हुए रूप।
- घड़े मिट्टी से बनते हैं; 'मिट्टी' तद्भव है, तत्सम रूप 'मृत्तिका'।
- सोना (स्वर्ण) और लोहा (लौह) भी तद्भव हैं और अर्थ में भी नहीं बैठते।
ट्रिक: तत्सम शब्दों में प्रायः ऋ, क्ष, श्र, संयुक्त अक्षर (त्त) दिखते हैं – मृत्तिका।
उत्तर: (C) मृत्तिका
SSC GDHindiतत्सम शब्द – मृत्तिकाSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q112.‘आधे से अधिक लोगों की मिलकर एक राय।’ उपरोक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
- Aलोकतंत्र
- Bबहुमत
- Cअल्पमत
- Dबहुमूल
Show answer
अवधारणा: बहु (अधिक) + मत (राय) = बहुमत।
- आधे से ज़्यादा लोगों की साझा राय = बहुमत।
- अल्पमत = आधे से कम लोगों की राय; लोकतंत्र एक शासन प्रणाली है।
याद रखें: सर्वसम्मति = सबकी एक राय; बहुमत = अधिकांश की; अल्पमत = कम लोगों की।
उत्तर: (B) बहुमत
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – बहुमतSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q113.निम्नलिखित में से किस विकल्प में उभयलिंगी शब्द उपस्थित है?
- Aमंद-मंद पवन का चलना अच्छा लगता है।
- Bहमारी आकाशगंगा में पुष्कल तारा भी है।
- Cप्रत्येक वस्तु का एक निश्चित मूल्य होता है।
- Dसभी अक्षर ठीक से लिखे गए हैं।
Show answer
अवधारणा: उभयलिंगी शब्द दोनों लिंगों में प्रयोग होते हैं।
- 'पवन' – पवन चलता है / पवन चलती है, दोनों मान्य।
- तारा, मूल्य, अक्षर – केवल पुल्लिंग।
याद रखें: प्रमुख उभयलिंगी शब्द: पवन, वायु, आत्मा, ऋतु, दही, सांस।
उत्तर: (A) मंद-मंद पवन का चलना अच्छा लगता है।
SSC GDHindiलिंग – उभयलिंगी शब्दSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q114.निम्नलिखित वाक्य के किस खंड में अशुद्धि है?
शत्रु उस पर टूट गए।
- Aउस
- Bटूट
- Cशत्रु
- Dगए
Show answer
अवधारणा: मुहावरे के शब्द बदले नहीं जाते।
- अचानक हमला करना = 'टूट पड़ना'।
- 'टूट गए' का अर्थ खंडित होना है, जो यहाँ बेमेल है।
- शुद्ध वाक्य: शत्रु उस पर टूट पड़े। अतः 'गए' वाला खंड अशुद्ध।
ट्रिक: हमले के अर्थ में हमेशा 'टूट पड़ना' – जैसे 'भूखे लोग खाने पर टूट पड़े'।
उत्तर: (D) गए
SSC GDHindiवाक्य शुद्धि – मुहावरा 'टूट पड़ना'SSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
Q115.दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
आगे बढ़कर स्वागत करना
- Aअगुआना
- Bअगुआ
- Cअग्रगामी
- Dअगवानी
Show answer
अवधारणा: वाक्यांश एक क्रिया/कार्य बता रहा है, व्यक्ति नहीं।
- आगे जाकर किसी का स्वागत करना = अगवानी (जैसे बारात की अगवानी)।
- अगुआ = आगे चलने वाला व्यक्ति; अग्रगामी = आगे बढ़ने वाला – दोनों व्यक्ति के लिए।
ट्रिक: '-करना' वाले वाक्यांश का उत्तर भाववाचक संज्ञा होगी (अगवानी), व्यक्तिवाचक नहीं (अगुआ)।
उत्तर: (D) अगवानी
SSC GDHindiवाक्यांश के लिए एक शब्द – अगवानीSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
Q116.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aउपाय
- Bकार्य
- Cअर्थ
- Dउद्देश्य
Show answer
अवधारणा: रिक्त स्थान में वह शब्द आएगा जो उत्सव का लक्ष्य बताए।
- 'उत्सवों का एकमात्र ___ आनंद-प्राप्ति है' – यहाँ प्रयोजन की बात है।
- प्रयोजन/लक्ष्य = उद्देश्य।
- उपाय व कार्य साधन बताते हैं; 'अर्थ' यहाँ भाव नहीं देता।
ट्रिक: 'एकमात्र उद्देश्य' एक प्रचलित शब्द-युग्म है – सुनने में भी सहज।
उत्तर: (D) उद्देश्य
SSC GDHindiगद्यांश पूर्ति – उद्देश्यSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
Q117.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aप्राप्ति
- Bपूर्ण
- Cपूर्ति
- Dपूरा
Show answer
अवधारणा: परसर्ग 'की' से जुड़ने वाला शब्द संज्ञा होगा, और यहाँ स्त्री-वाचक रूप चाहिए।
- पूर्ण और पूरा विशेषण हैं – व्याकरण से बाहर।
- आवश्यकता के साथ प्रचलित प्रयोग 'आवश्यकता की पूर्ति' है; गद्यांश में भी पहले यही आया है।
ट्रिक: रिक्त से ठीक पहले वाले वाक्य में 'आवश्यकता की पूर्ति के लिए' मौजूद है – उत्तर वहीं छिपा है।
उत्तर: (C) पूर्ति
SSC GDHindiगद्यांश पूर्ति – पूर्तिSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
Q118.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aआवश्यकता
- Bरास्ता
- Cमहत्ता
- Dचीज
Show answer
अवधारणा: पूरा गद्यांश 'आवश्यकता' और उसकी पूर्ति पर टिका है।
- क्रिया 'रह गई' स्त्री-वाचक है, इसलिए शब्द भी वैसा ही हो।
- आगे लेखक कहता है कि मनुष्य को लगातार नई-नई चीज़ों की फ़िक्र रहती है – ज़रूरतें कभी खत्म नहीं होतीं।
- अतः 'आवश्यकता' सही।
ट्रिक: गद्यांश का मुख्य शब्द (keyword) ही प्रायः रिक्त स्थान भरता है।
उत्तर: (A) आवश्यकता
SSC GDHindiगद्यांश पूर्ति – आवश्यकताSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
Q119.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aस्थायी
- Bसंतोषप्रद
- Cपूर्ण
- Dक्षणिक
Show answer
अवधारणा: वाक्य का 'क्योंकि' वाला भाग उत्तर का कारण बता देता है।
- एक ज़रूरत पूरी होते ही नई ज़रूरत सामने आ जाती है – यानी सुख ज़्यादा देर नहीं टिकता।
- थोड़े समय का = क्षणिक।
- स्थायी, पूर्ण, संतोषप्रद – सब तर्क के उलट हैं।
ट्रिक: 'तुरंत' शब्द देखें → उत्तर 'क्षणिक'।
उत्तर: (D) क्षणिक
SSC GDHindiगद्यांश पूर्ति – क्षणिकSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
मनुष्य उल्लासित होते हैं। उत्सवों का एकमात्र __(76)__ आनंद-प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की __(77)__ होने पर सभी को सुख होता है पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमारे किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई __(78)__ नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत __(79)__ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यहाँ नहीं, उस दिन हम अपने काम-काज छोड़कर विशुद्ध __(80)__ की प्राप्ति करते हैं।
Q120.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसंतोष
- Bसुख
- Cआनंद
- Dदुःख
Show answer
अवधारणा: लेखक 'सुख' (आवश्यकता-पूर्ति से) और 'आनंद' (उत्सव से) में भेद करता है।
- पहली ही पंक्ति: उत्सवों का लक्ष्य आनंद-प्राप्ति है।
- अंतिम वाक्य उसी बात पर लौटता है – उत्सव के दिन हम विशुद्ध आनंद पाते हैं।
- 'सुख' रखने से लेखक का भेद मिट जाएगा; दुःख/संतोष बेमेल।
ट्रिक: गद्यांश का पहला और आखिरी वाक्य प्रायः एक ही विचार दोहराते हैं।
उत्तर: (C) आनंद
SSC GDHindiगद्यांश पूर्ति – आनंदSSC GD 2025 · 21 Feb Shift 1