Q121.‘हमें अच्छे साहित्य का अध्यन करना चाहिए।’ वाक्य में रेखांकित शब्द की शुद्ध वर्तनी है-
- Aअध्यान
- Bअध्यन
- Cअध्यययन
- Dअध्ययन
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अवधारणा: संधि से बने शब्द की वर्तनी मूल खंडों से तय होती है।
- अधि + अयन (यण् संधि) → इ का य बनता है: अध् + य + अयन = अध्ययन।
- इसलिए 'ध्य' के बाद फिर 'य' आता है — दो 'य'।
- 'अध्यन' में एक 'य' कम, 'अध्यययन' में एक अधिक, 'अध्यान' में आ की मात्रा गलत।
ट्रिक: अध्ययन में 'य' दो बार — 'अध्-य-यन' बोलकर लिखें।
उत्तर: (D) अध्ययन
SSC GDHindiSpelling – adhyayanSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q122.हिमालय पर्वत भारत की उत्तर दिशा में स्थित है। रेखांकित शब्द में कौन-सी संज्ञा है?
- Aव्यक्तिवाचक
- Bभाववाचक
- Cजातिवाचक
- Dसमूहवाचक
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अवधारणा: जो शब्द किसी एक ख़ास नाम (जैसे एक ही पर्वत, नदी, शहर) को बताए, उसे व्यक्तिवाचक कहते हैं।
- 'हिमालय' एक खास पर्वत का नाम है → व्यक्तिवाचक।
- 'पर्वत' शब्द जातिवाचक है, पर पूछा केवल 'हिमालय' के लिए गया है।
ट्रिक: नदियों, पर्वतों, शहरों, देशों के नाम (गंगा, हिमालय, दिल्ली) = व्यक्तिवाचक।
उत्तर: (A) व्यक्तिवाचक
SSC GDHindiNoun type – proper nounSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q123.‘गर्मी के मौसम में ____ लगना स्वाभाविक है।’ प्रस्तुत वाक्य के रिक्त स्थान में उचित तत्सम शब्द क्या होगा?
- Aपिपासा
- Bपुष्प
- Cप्यास
- Dपुच्छ
Show answer
अवधारणा: संस्कृत से बिना बदले लिए गए शब्द तत्सम कहलाते हैं।
- प्यास का तत्सम रूप 'पिपासा' है; 'प्यास' उसका तद्भव है।
- शेष दो विकल्प भी संस्कृत रूप हैं, किंतु गर्मी में 'लगने' वाली चीज़ से उनका संबंध नहीं।
ट्रिक: तत्सम → तद्भव: पिपासा → प्यास, पुच्छ → पूँछ, पुष्प → फूल।
उत्तर: (A) पिपासा
SSC GDHindiTatsam word – pipasaSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q124.‘दरिद्र’ का पर्याय है-
- Aबलवान
- Bअमीर
- Cधनी
- Dअकिंचन
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अवधारणा: दरिद्र = निर्धन, गरीब।
- 'अकिंचन' = जिसके पास किंचित् (ज़रा भी) धन न हो → दरिद्र का पर्याय।
- 'अमीर', 'धनी' इसके उलटे अर्थ वाले हैं; 'बलवान' शक्ति से जुड़ा है।
ट्रिक: दरिद्र के पर्याय: निर्धन, कंगाल, अकिंचन, रंक।
उत्तर: (D) अकिंचन
SSC GDHindiSynonym – daridraSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q125.दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
जिसका अंग दुरुस्त न हो
- Aअपात्र
- Bउपांग
- Cअपात
- Dअपंग
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अवधारणा: अप (हीन) + अंग = अपंग।
- जिसका कोई अंग ठीक न हो या विकृत हो → अपंग।
- 'अपात्र' = अयोग्य; 'उपांग' = अंग का छोटा भाग; 'अपात' मानक शब्द नहीं।
ट्रिक: वाक्यांश में 'अंग' है तो उत्तर में भी 'अंग' + हीनता वाला उपसर्ग खोजें → अप + अंग।
उत्तर: (D) अपंग
SSC GDHindiOne-word substitution – apangSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q126.‘तिमिरमय रात अधिक भयप्रद थी।’ इस वाक्य में प्रयुक्त ‘तिमिर’ शब्द का विलोम निम्न में से कौन-सा शब्द है?
- Aतामसिक
- Bप्रकाश
- Cतम
- Dअंधकार
Show answer
अवधारणा: तिमिर = अंधेरा।
- अंधेरे का उलटा = 'प्रकाश'।
- 'तम', 'अंधकार' — तिमिर के ही समानार्थी हैं; 'तामसिक' भी तम से बना है।
ट्रिक: तीन विकल्प एक ही अर्थ (अँधेरा) के हैं → अलग अर्थ वाला 'प्रकाश' विलोम।
उत्तर: (B) प्रकाश
SSC GDHindiAntonym – timirSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q127.इनमें से किस वाक्य में त्रुटि है?
- Aउनके रहस्य प्रकट हो गए।
- Bयह तो नए प्रकार की वस्तु है।
- Cपानी में कौन पड़ गया।
- Dमेरी तो जान पर बन आई।
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अवधारणा: 'कौन' सजीव (प्राणी) के लिए, 'क्या' निर्जीव वस्तु के लिए प्रयुक्त होता है।
- विकल्प (C) में जल में गिरने वाली चीज़ अचेतन है, अतः 'कौन' के स्थान पर 'क्या' होना चाहिए — शुद्ध: पानी में क्या पड़ गया?
- (A) 'उनके रहस्य प्रकट हो गए' और (B) 'नए प्रकार की वस्तु' शुद्ध वाक्य हैं।
- (D) में प्रयुक्त मुहावरा 'जान पर बन आना' अपने सही रूप में है।
ट्रिक: सर्वनाम प्रश्नों में पहले देखें — प्राणी है तो 'कौन', वस्तु है तो 'क्या'।
उत्तर: (C) पानी में कौन पड़ गया।
SSC GDHindiSentence error – use of 'kaun'SSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q128.निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए-
सौरभ जो ने भाषण दिया, वह तथ्यपूर्ण था।
- Aभाषण दिया जो
- Bने भाषण दिया जो
- Cभाषण दिया ने जो
- Dने जो भाषण दिया
Show answer
अवधारणा: कर्ता के साथ 'ने' तुरंत लगता है और 'जो' उपवाक्य के शुरू में आता है।
- कर्ता + ने: 'सौरभ ने'।
- फिर संबंधवाचक: 'जो भाषण दिया'।
- इस क्रम से पूरा वाक्य शुद्ध व स्पष्ट बन जाता है।
ट्रिक: 'जो … वह' जोड़ी में 'जो' और 'वह' दोनों अपने-अपने खंड के आरंभ में।
उत्तर: (D) ने जो भाषण दिया
SSC GDHindiWord order – relative clauseSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q129.‘दसवीं के विद्यार्थियों को हिन्दी पढ़ना ____ है।’ वाक्य के रिक्त स्थान के लिए ‘अनिवार्य’ शब्द का सर्वाधिक उपयुक्त विलोम शब्द चुनिए-
- Aऐच्छिक
- Bअपरिहार्य
- Cजरूरी
- Dअनावश्यक
Show answer
अवधारणा: अनिवार्य = जो करना ही पड़े।
- इसका उलटा 'ऐच्छिक' = अपनी इच्छा पर निर्भर।
- 'अपरिहार्य', 'जरूरी' पर्याय हैं; 'अनावश्यक' = जिसकी ज़रूरत न हो (विषय के लिए उपयुक्त नहीं)।
ट्रिक: स्कूल के विषय: अनिवार्य ↔ ऐच्छिक (compulsory ↔ optional)।
उत्तर: (A) ऐच्छिक
SSC GDHindiAntonym – anivaryaSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q130.निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और सकर्मक क्रिया संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें-
मोहन अब शहर में नहीं रहता अतः राम पत्र लिखता है।
- Aराम और मोहन पत्र लिखते हैं।
- Bराम मोहन को पत्र लिखता है।
- Cराम पत्र पढ़ता है।
- Dराम संदेश लिखता है।
Show answer
अवधारणा: 'लिखना' जैसी द्विकर्मक क्रिया को मुख्य कर्म के साथ गौण कर्म (किसे) भी चाहिए।
- पहला भाग बताता है कि मोहन अब दूर है, पर दूसरे भाग में पत्र पाने वाला गायब है।
- 'किसे?' का उत्तर 'मोहन को' देने पर वाक्य सार्थक बनता है।
- (c), (d) क्रिया/कर्म बदल देते हैं; (a) में मोहन कर्ता बन गया।
ट्रिक: द्विकर्मक क्रियाएँ (देना, लिखना, पढ़ाना) — 'क्या' और 'किसे' दोनों पूछें।
उत्तर: (B) राम मोहन को पत्र लिखता है।
SSC GDHindiTransitive verb – object completenessSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q131.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
जिसे लाज नहीं आती
- Aनिर्लज्जित
- Bलज्ज
- Cनिर्लज्ज
- Dलज्जित
Show answer
अवधारणा: 'निर्' उपसर्ग = बिना, रहित।
- निर् + लज्जा → निर्लज्ज = जिसे शर्म न आए।
- 'लज्जित' = जिसे शर्म आई हो (उलटा)।
- 'निर्लज्जित', 'लज्ज' शुद्ध शब्द नहीं हैं।
ट्रिक: निर् + गुण = निर्गुण, निर् + धन = निर्धन — इसी ढाँचे से निर्लज्ज।
उत्तर: (C) निर्लज्ज
SSC GDHindiOne-word substitution – nirlajjSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q132.‘तुम्हारी कोई मान-मर्यादा है कि नहीं, हर वक्त ____।’ उचित सार्थक शब्द-युग्म युक्त विकल्प से वाक्य पूर्ण करें-
- Aमार-पीट करना तुम्हें शोभा नहीं देता
- Bझगड़ा-वगड़ा तुम्हें शोभा नहीं देता
- Cरोना-वोना ठीक नहीं है
- Dगाली-वाली देना तुम्हें शोभा नहीं देता
Show answer
अवधारणा: सार्थक युग्म में दोनों शब्दों का अपना-अपना अर्थ होता है।
- 'मार-पीट' — 'मार' और 'पीट' दोनों अर्थवान।
- बाकी तीन युग्मों का दूसरा हिस्सा अपने आप में कोई अर्थ नहीं रखता — वह केवल तुक मिलाने के लिए जुड़ा है।
ट्रिक: 'व' से शुरू होने वाला दूसरा शब्द प्रायः निरर्थक युग्म का संकेत है।
उत्तर: (A) मार-पीट करना तुम्हें शोभा नहीं देता
SSC GDHindiMeaningful word pairSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q133.‘दाल में काला होना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
- Aदाल खराब होना
- Bगलत कार्य होना
- Cआशंका होना
- Dदाल जल जाना
Show answer
अवधारणा: मुहावरों में शब्दों का सीधा अर्थ नहीं, छिपा हुआ भाव देखा जाता है।
- इस मुहावरे का भाव = किसी बात पर संदेह या शक होना।
- गलत काम सिद्ध होना नहीं, केवल उसकी आशंका।
- 'दाल खराब होना', 'दाल जल जाना' शाब्दिक अर्थ हैं।
ट्रिक: प्रयोग: उसकी घबराहट देखकर लगा कि दाल में कुछ काला है।
उत्तर: (C) आशंका होना
SSC GDHindiIdiom – daal mein kalaSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
- Aअमूर्त
- Bनिर्गुण
- Cजड़
- Dविभूत
Show answer
अवधारणा: स (सहित) ↔ निर् (रहित) उपसर्ग से विलोम बनते हैं।
- सगुण = गुणों सहित, साकार।
- निर्गुण = गुणों से रहित, निराकार → विलोम।
- अमूर्त ↔ मूर्त, जड़ ↔ चेतन।
ट्रिक: भक्ति काल: सगुण धारा (तुलसी, सूर) ↔ निर्गुण धारा (कबीर)।
उत्तर: (B) निर्गुण
SSC GDHindiAntonym – sagunSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
Q135.निम्न वाक्य में रेखांकित पद को संशोधित कर लिखिए-
वे सब कालचक्र के पहिए के नीचे पिस गए।
- Aसे
- Bपहिए के साथ
- Cके पहिए पर
- Dमें
Show answer
अवधारणा: एक ही अर्थ को दोबारा लिखना पुनरुक्ति दोष है।
- 'कालचक्र' में 'चक्र' का अर्थ पहिया ही है।
- इसलिए 'के पहिए के नीचे' अनावश्यक; केवल 'में' रखें।
- शुद्ध: वे सब कालचक्र में पिस गए।
ट्रिक: जिस विकल्प में 'पहिए' फिर आए, उसे तुरंत हटाएँ — दोष वहीं बना रहेगा।
उत्तर: (D) में
SSC GDHindiRedundancy – kaalchakraSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुगठित रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गये। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसको जानने की __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यही उक्ति __(80)__ ही है।
Q136.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aनियतांक
- Bबंधक
- Cचालक
- Dनियंता
Show answer
अवधारणा: संसार की अनुशासित व्यवस्था देखकर उसे चलाने वाले को जानने की इच्छा।
- 'नियंता' = नियंत्रण/नियमन करने वाला (ईश्वर/ब्रह्म)।
- 'नियतांक' (स्थिरांक), 'बंधक' (गिरवी), 'चालक' (गाड़ी चलाने वाला) प्रसंग से बाहर।
ट्रिक: 'अनुशासित … सुगठित' शब्द नियम का संकेत देते हैं → नियम + ता = नियंता।
उत्तर: (D) नियंता
SSC GDHindiCloze – niyantaSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुगठित रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गये। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसको जानने की __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यही उक्ति __(80)__ ही है।
Q137.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aनीति-धोती
- Bचेतनकी
- Cनेक-बस्ती
- Dनेति-नेति
Show answer
अवधारणा: ब्रह्म का वर्णन न कर पाने पर उपनिषदों ने 'नेति-नेति' कहा।
- नेति = न + इति → 'यह नहीं, यह भी नहीं'।
- ऋषि हताश होकर ब्रह्म को अरूप मान बैठे — यही भाव।
- अन्य विकल्प निरर्थक शब्द हैं।
याद रखें: 'नेति-नेति' = ब्रह्म की अवर्णनीयता (बृहदारण्यक उपनिषद)।
उत्तर: (D) नेति-नेति
SSC GDHindiCloze – neti-netiSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुगठित रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गये। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसको जानने की __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यही उक्ति __(80)__ ही है।
Q138.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aउद्जनीकरण
- Bउद्गदान
- Cउद्हरण
- Dउद्घाटन
Show answer
अवधारणा: रहस्य 'खुलने/प्रकट होने' के लिए 'उद्घाटन' शब्द प्रयुक्त होता है।
- ब्रह्म को खोजते हुए कई नए भेद सामने आए — यही भाव उद्घाटन देता है।
- बाकी तीनों विकल्प शब्दकोश के प्रचलित शब्द नहीं हैं।
ट्रिक: रहस्य + उद्घाटन (रहस्योद्घाटन) एक प्रचलित संयुक्त शब्द है।
उत्तर: (D) उद्घाटन
SSC GDHindiCloze – udghatanSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुगठित रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गये। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसको जानने की __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यही उक्ति __(80)__ ही है।
Q139.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aजिज्ञासा
- Bजिहासा
- Cजिघांसा
- Dजिगीषा
Show answer
अवधारणा: 'जानने की इच्छा' = जिज्ञासा।
- जिज्ञासा = जानने की इच्छा।
- जिघांसा = मारने की, जिगीषा = जीतने की, जिहासा = छोड़ने की इच्छा।
ट्रिक: इच्छावाचक शब्द: जिज्ञासा (ज्ञान), जिगीषा (जय), जिघांसा (हनन), पिपासा (पान)।
उत्तर: (A) जिज्ञासा
SSC GDHindiCloze – jigyasaSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुगठित रूप में गतिशील देखकर उसके __(76)__ को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किंतु हताश होकर वे __(77)__ करके रह गये। उसका रूप स्थिर करने में स्वयं को असमर्थ मानकर उन्होंने उसे अरूप ही रहने दिया, किंतु उसे जानने की प्रक्रिया में कई नवीन रहस्यों के __(78)__ हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बँट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्म के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल उसको जानने की __(79)__ से संतुष्ट नहीं है, बल्कि अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है। कभी-कभी ऐसे स्थल भी अनुभूति में आते हैं, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं संपूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यही उक्ति __(80)__ ही है।
Q140.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसंगंध
- Bसंगत
- Cशकुंत
- Dसंहत
Show answer
अवधारणा: निष्कर्ष वाक्य में 'उचित/उपयुक्त' अर्थ वाला शब्द चाहिए।
- 'संगत' = उपयुक्त, तर्कपूर्ण → 'यही उक्ति संगत ही है'।
- 'संहत' = सघन/जुड़ा हुआ; 'शकुंत' = पक्षी; 'संगंध' निरर्थक।
ट्रिक: संगत ↔ असंगत — बात 'ठीक बैठती है' तो संगत।
उत्तर: (B) संगत
SSC GDHindiCloze – sangatSSC GD 2025 · 20 Feb Shift 3