Q3581.‘गृहस्थ’ का विलोम शब्द नीचे दिए विकल्पों में से चुनिए-
- Aब्रह्मचर्य
- Bसंन्यासी
- Cग्रामवासी
- Dवानप्रस्थ
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अवधारणा: विलोम शब्द विपरीत अर्थ देता है और उसी शब्द-भेद (यहाँ व्यक्तिवाचक) का होता है।
हल:
- गृहस्थ = घर-परिवार बसाकर सांसारिक जीवन जीने वाला व्यक्ति।
- संन्यासी = घर-संसार त्यागकर विरक्त जीवन जीने वाला – ठीक उल्टा।
- ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थ आश्रमों के नाम हैं; ग्रामवासी का विलोम नगरवासी है।
ट्रिक: व्यक्ति का विलोम व्यक्ति: गृहस्थ ↔ संन्यासी; आश्रम का नाम (ब्रह्मचर्य/वानप्रस्थ) देखते ही हटा दें।
उत्तर: (B) संन्यासी
Q3582.‘कौआ डाली से उड़ गया।’ इस वाक्य में ‘कौआ’ शब्द का तत्सम रूप प्रयुक्त कर वाक्य पूर्ण कीजिए।
- Aकाग डाली से उड़ गया।
- Bपिक डाली से उड़ गया।
- Cकोकिल डाली से उड़ गई।
- Dकलघोष डाली से उड़ गया।
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अवधारणा: तद्भव शब्द का मूल संस्कृत रूप तत्सम कहलाता है।
हल:
- 'कौआ' तद्भव है; संस्कृत मूल 'काक', जो 'काग' रूप में भी चलता है।
- इसलिए वाक्य में 'काग' रखना होगा।
- पिक, कोकिल, कलघोष – तीनों कोयल के पर्याय हैं।
याद रखें: कुछ तत्सम-तद्भव: काक – कौआ, काष्ठ – काठ, कर्ण – कान, सर्प – साँप।
उत्तर: (A) काग डाली से उड़ गया।
Q3583.निम्नलिखित वाक्य में वर्तनी संबंधी त्रुटि की पहचान करें। रेलगाड़ी अपनी रफ्तार में जंगलों और नदीयों को पार करते हुए दौड़े जा रही थी।
- Aरेलगाड़ी
- Bजंगलों
- Cनदीयों
- Dरफ्तार
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अवधारणा: ई-कारांत शब्दों का बहुवचन बनाते समय 'ई' ह्रस्व 'इ' हो जाती है।
हल:
- नदी + यों = नदियों (न कि 'नदीयों')।
- इसी प्रकार: लड़की → लड़कियों, सखी → सखियों।
- रेलगाड़ी, जंगलों, रफ्तार – शुद्ध।
ट्रिक: 'ई' + यों/याँ आए तो 'ई' छोटी 'इ' बन जाती है – 'ीय' दिखे तो गलत समझें।
उत्तर: (C) नदीयों
Q3584.मेरी माँ अत्यन्त ____ व्यंजन बनाती हैं। रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उचित सार्थक शब्द है-
- Aभोजन
- Bमिष्ट
- Cस्वादिष्ट
- Dपकवान
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अवधारणा: खाली जगह संज्ञा 'व्यंजन' की विशेषता बताने वाले शब्द की है।
हल:
- स्वादिष्ट = स्वाद में उत्तम → माँ के बनाए व्यंजनों की प्रशंसा।
- 'भोजन', 'पकवान' – वस्तु के नाम हैं, गुण नहीं बताते।
- 'मिष्ट' केवल मिठास बताता है, सभी व्यंजनों पर लागू नहीं।
ट्रिक: रिक्त स्थान के बाद संज्ञा हो तो पहले संज्ञा वाले विकल्प हटा दें।
उत्तर: (C) स्वादिष्ट
Q3585.‘गार्ड ने सीटी बजायी और ट्रेन चल दी।’ निम्नलिखित विकल्पों में से इस वाक्य के लिए कौन-सा एक उचित सरल वाक्य होगा?
- Aसीटी बजाते ही ट्रेन चल दी गार्ड की।
- Bगार्ड की सीटी से ट्रेन चल दी।
- Cज्यों ही गार्ड ने सीटी दी ट्रेन चल दी।
- Dगार्ड के सीटी बजाते ही ट्रेन चल दी।
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अवधारणा: सरल वाक्य = एक उद्देश्य + एक समापिका क्रिया।
हल:
- दिए वाक्य में 'और' दो स्वतंत्र उपवाक्य जोड़ रहा है।
- 'बजायी' को 'बजाते ही' (कृदंत) बना देने से समापिका क्रिया केवल 'चल दी' रह जाती है।
- 'ज्यों ही…' वाला रूप मिश्र वाक्य है; (a) का पदक्रम बिगड़ा है।
ट्रिक: सरल वाक्य पहचानें: 'और/ज्यों ही/कि' जैसे योजक न हों और समापिका क्रिया एक हो।
उत्तर: (D) गार्ड के सीटी बजाते ही ट्रेन चल दी।
Q3586.निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला सबसे उपयुक्त विकल्प चुनिए- सिंह बड़ों की सेवा के तत्पर लिए है।
- Aतत्पर है
- Bहै के लिए तत्पर
- Cके लिए तत्पर है
- Dका तत्पर है
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अवधारणा: परसर्ग 'के लिए' एक साथ आता है; उसके बीच कोई शब्द नहीं रखा जाता।
हल:
- दिए खंड में 'के' और 'लिए' के बीच 'तत्पर' आ गया है।
- उचित क्रम: परसर्ग → विशेषण → क्रिया।
- इस प्रकार खंड बनता है – परसर्ग के तुरंत बाद 'तत्पर', अंत में 'है'।
ट्रिक: पहले परसर्ग, फिर विशेषण, अंत में क्रिया।
उत्तर: (C) के लिए तत्पर है
Q3587.शब्द या वाक्यखंड बदलें और उत्तर के रूप में सही विकल्प चुनें। मैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा देखी।
- Aमैंने सिर्फ वर्ष उनकी प्रतीक्षा देखी।
- Bमैं एक वर्ष उसकी प्रतीक्षा किया।
- Cमैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा की।
- Dमैंने एक वर्ष उनकी प्रतीक्षा की।
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अवधारणा: 'प्रतीक्षा' के साथ क्रिया 'करना' आती है, 'देखना' नहीं।
हल:
- 'प्रतीक्षा देखी' गलत सहप्रयोग → 'प्रतीक्षा की'।
- समय-सीमा दिखाने को 'तक' बना रहना चाहिए।
- (b) में 'मैं…किया' कर्ता-क्रिया मेल नहीं; (d) में 'तक' गायब।
याद रखें: प्रचलित प्रयोग: प्रतीक्षा करना, बाट जोहना, राह देखना।
उत्तर: (C) मैंने एक वर्ष तक उनकी प्रतीक्षा की।
Q3588.निम्नलिखित मुहावरे के रेखांकित अशुद्ध भाग को उचित विकल्प से बदलें- ‘छाती पर चना दलना।’
- Aजौ
- Bउड़द
- Cचावल
- Dमूँग
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अवधारणा: मुहावरे के शब्द बदले नहीं जाते; उसका रूढ़ रूप ही शुद्ध है।
हल:
- शुद्ध मुहावरा: छाती पर मूँग दलना।
- अर्थ: पास रहकर किसी को लगातार कष्ट देना/चिढ़ाना।
- जौ, उड़द, चावल इस मुहावरे में प्रयुक्त नहीं होते।
याद रखें: अन्य अनाज वाले मुहावरे: लोहे के चने चबाना, आटे-दाल का भाव मालूम होना।
उत्तर: (D) मूँग
Q3589.‘महाभारत के युद्ध में कौरवों के ____ का नाश हो गया।’ ‘तुम्हारे पास ____ कितने रुपये हैं?’ उपर्युक्त वाक्यों में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त अनेकार्थी शब्द है-
- Aपरिवार
- Bवंश
- Cकूल
- Dकुल
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अवधारणा: एक ही शब्द दोनों वाक्यों में भिन्न अर्थ के साथ बैठना चाहिए।
हल:
- पहला वाक्य: कुल = वंश/ख़ानदान।
- दूसरा वाक्य: कुल = सब मिलाकर, योग।
- कूल = नदी का किनारा; परिवार, वंश दूसरे वाक्य में नहीं बैठते।
ट्रिक: रुपये वाले वाक्य में जो शब्द बैठे, वही जाँचें – केवल 'कुल'।
उत्तर: (D) कुल
Q3590.‘निहत्था’ का विलोम है-
- Aहथियारविहीन
- Bहत्यारा
- Cहथियारबंद
- Dहथियारहीन
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अवधारणा: विलोम शब्द ठीक उल्टा अर्थ देता है।
हल:
- निहत्था = जिसके पास हथियार न हो।
- हथियारबंद = हथियारों से लैस – विलोम।
- हथियारविहीन, हथियारहीन – पर्यायवाची; हत्यारा – असंबद्ध।
ट्रिक: समान अर्थ वाले दो विकल्प (विहीन/हीन) तुरंत हटाएँ – उत्तर उल्टा अर्थ देने वाला।
उत्तर: (C) हथियारबंद
Q3591.‘जिसे मारना उचित न हो’ उपर्युक्त वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
- Aअवंश
- Bअवधेय
- Cअवध्य
- Dअवक
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अवधारणा: नकारात्मक 'अ' लगाने से विपरीत भाव का शब्द बनता है।
हल:
- वध्य = वध के योग्य।
- अ + वध्य → अवध्य = वध के अयोग्य।
- अवधेय का अर्थ है जिस पर ध्यान दिया जाए; अवंश = वंशहीन।
याद रखें: इसी प्रकार: अजेय – जिसे जीता न जा सके; अभेद्य – जिसे भेदा न जा सके।
उत्तर: (C) अवध्य
Q3592.दिए गए वाक्य के रेखांकित शब्द के आधार पर संज्ञा की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान करें-
- Aलड़कपन में कई बार बड़ी गलतियाँ हो जाती हैं।
- Bजिसके व्यवहार में नम्रता नहीं वह मनुष्य सफल नहीं हो सकता।
- Cआजकल बहुत सर्दी पड़ रही है।
- Dयह पानी तो बहुत गर्म है इससे नहाना मुश्किल है।
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अवधारणा: पंक्तियों में रेखांकित शब्द भाववाचक संज्ञा होना अपेक्षित है।
हल:
- लड़कपन (-पन), नम्रता (-ता), सर्दी – गुण/दशा के नाम, अतः संज्ञा।
- 'गर्म' पानी की विशेषता बता रहा है → विशेषण।
- इसकी संज्ञा 'गर्मी' होती; अतः (d) अपेक्षा पर खरा नहीं।
ट्रिक: -पन, -ता, -ई, -त्व प्रत्यय वाले शब्द प्रायः भाववाचक संज्ञा होते हैं।
उत्तर: (D) यह पानी तो बहुत गर्म है इससे नहाना मुश्किल है।
Q3593.‘कृतज्ञ’ का विलोम शब्द है-
- Aकृपण
- Bकुटिल
- Cकपटी
- Dकृतघ्न
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अवधारणा: कृत (उपकार) से बने शब्दों का विलोम युग्म।
हल:
- कृतज्ञ = किया उपकार मानने वाला।
- कृतघ्न = उपकार न मानने वाला – विलोम।
- कृपण (कंजूस) का विलोम उदार; कुटिल, कपटी असंबद्ध।
ट्रिक: 'ज्ञ' (जानने वाला) ↔ 'घ्न' (नष्ट करने वाला) – कृतज्ञ ↔ कृतघ्न।
उत्तर: (D) कृतघ्न
Q3594.निम्न में से किस वाक्य में कारक चिह्न का अशुद्ध प्रयोग हुआ है?
- Aउसे पत्र द्वारा सूचित कर दिया गया है।
- Bपेट के वास्ते मनुष्य क्या नहीं करता।
- Cयमुना यमुनोत्री द्वारा निकलती है।
- Dहे भगवान! मुझे दुखों से बचाइए।
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अवधारणा: अलग होने/निकलने का भाव अपादान कारक है, जिसका चिह्न 'से' है।
हल:
- नदी का उद्गम-स्थान से निकलना = अलगाव → 'से' चाहिए।
- (c) में 'द्वारा' (करण का चिह्न) गलत प्रयुक्त।
- पत्र 'द्वारा' (साधन), पेट 'के वास्ते' (हेतु), दुखों 'से' (अलगाव) – ठीक।
ट्रिक: निकलना, गिरना, डरना, अलग होना – इन क्रियाओं के साथ 'से' (अपादान)।
उत्तर: (C) यमुना यमुनोत्री द्वारा निकलती है।
Q3595.वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध वाक्य की पहचान कीजिए।
- Aअगामी दिनों में हम घुमने चलेंगे।
- Bकार्यक्रम शुरू किया जाए।
- Cगणित पढ़ना अच्छा होता है।
- Dउसे क्षमा कर दो।
Show answer
अवधारणा: मात्राओं की शुद्धता जाँचें।
हल:
- 'अगामी' अशुद्ध → 'आगामी' (आ + गामी)।
- 'घुमने' अशुद्ध → 'घूमने' (क्रिया घूमना, दीर्घ ऊ)।
- बाकी तीनों वाक्यों की वर्तनी ठीक है।
याद रखें: घूमना (स्वयं चलना) और घुमाना (किसी को घुमाना) – दोनों की मात्रा अलग है।
उत्तर: (A) अगामी दिनों में हम घुमने चलेंगे।
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
Q3596.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aऐतिहासिक
- Bऔद्योगिक
- Cकाल्पनिक
- Dसामाजिक
Show answer
अवधारणा: 'और' से जुड़े शब्द समान प्रकार के होने चाहिए।
हल:
- देश की तरक्की में विज्ञान का स्वाभाविक साथी उद्योग है।
- आगे अमीर देशों से मुकाबले की बात है – यह भी उद्योग की ओर संकेत।
- ऐतिहासिक, काल्पनिक में 'आशातीत प्रगति' का अर्थ नहीं बनता।
ट्रिक: रिक्त स्थान के बाद वाले वाक्य में संकेत ढूँढें – 'अर्थव्यवस्था' → औद्योगिक।
उत्तर: (B) औद्योगिक
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
Q3597.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aस्वाधीनता
- Bछुटकारा
- Cपलायन
- Dरक्षा
Show answer
अवधारणा: 'जिससे हम ___ चाहते हैं' – किसी बुराई से मुक्त होने का भाव।
हल:
- धुँधला पहलू = अनैतिकता; उससे मुक्ति चाहिए।
- 'किसी से छुटकारा चाहना' सहज प्रयोग है।
- स्वाधीनता देश की आज़ादी हेतु; पलायन 'करना' के साथ; रक्षा अर्थ उलट देता है।
याद रखें: छुटकारा, मुक्ति, निजात – तीनों के साथ 'से' परसर्ग आता है।
उत्तर: (B) छुटकारा
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
Q3598.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aबाजी
- Bशर्त
- Cहोड़
- Dपड़ी
Show answer
अवधारणा: 'घर भरने की ___ लगी है' – आपस में आगे निकलने की दौड़।
हल:
- होड़ = प्रतियोगिता, चढ़ा-ऊपरी।
- 'होड़ लगना' प्रचलित मुहावरेदार प्रयोग है।
- बाजी/शर्त जुए-दाँव से जुड़े हैं; 'पड़ी' संज्ञा नहीं।
याद रखें: होड़ लगना = प्रतिस्पर्धा होना; बाजी मारना = जीत जाना।
उत्तर: (C) होड़
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
Q3599.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aमानवीयता
- Bअलौकिकता
- Cअराजकता
- Dनैतिकता
Show answer
अवधारणा: 'पर' से वाक्य के दोनों भागों में विरोधी भाव आते हैं।
हल:
- दूसरे भाग में 'अनैतिकता' है, अतः पहले भाग में उसका उल्टा शब्द।
- अनैतिकता ↔ नैतिकता।
- पूरा गद्यांश भी इसी मूल्य की चर्चा करता है।
ट्रिक: 'पर/किन्तु' के दोनों ओर विपरीत शब्द आते हैं।
उत्तर: (D) नैतिकता
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और (76) ____ क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किन्तु इस प्रगति के उजले पहलू के साथ एक धुँधला पहलू भी है जिससे हम (77) ____ चाहते हैं। वह है नैतिकता का पहलू। यदि हमारे हृदय में सत्य, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय भावनाएँ नहीं हैं; देश के मान-सम्मान का ध्यान नहीं है; तो सारी प्रगति निरर्थक होगी। आज यह आम धारणा है कि बिना हथेली गर्म किए साधारण-सा काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट जनसेवकों में अपना घर भरने की (78) ____ लगी है। उन्हें न समाज की चिंता है, न देश की। समाचार-पत्रों में अब रोजमर्रा की घटनाएँ आम हो गई हैं। लोग मान बैठे हैं कि यही हमारा राष्ट्रीय चरित्र है, जबकि वह सच नहीं है। (79) ____ मरी नहीं है, पर प्रचार अनैतिकता का हो रहा है। लोगों में यह धारणा घर करती जा रही है कि जब बड़े लोग ही ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या करें? सबसे पहले तो इस सोच से मुक्ति पाना जरूरी है, और उसके बाद यह संकल्प कि भ्रष्टाचार से मुक्त समाज बनाएँगे। उन्हें (80) ____ करेंगे जो देश के नैतिक चरित्र को बिगाड़ रहे हैं।
Q3600.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aबेकदर
- Bबेनकाब
- Cबेकरार
- Dबेअदब
Show answer
अवधारणा: 'उन्हें ___ करेंगे' – देश बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कदम।
हल:
- बेनकाब करना = पर्दा हटाकर असली रूप सबके सामने लाना।
- यह भ्रष्टाचार मिटाने के संकल्प से मेल खाता है।
- बेकदर (कद्र-रहित), बेकरार (व्याकुल), बेअदब (बदतमीज़) – अर्थ नहीं बनता।
याद रखें: 'बे-' उपसर्ग 'बिना' का अर्थ देता है: बेनकाब = बिना नकाब।
उत्तर: (B) बेनकाब