Q3981.भारत गुटों से अलग रहने वाले देशों में शामिल है। ‘गुटों से अलग रहने वाले’ वाक्यांश के स्थान पर उचित शब्द होगा-
- Aस्वतंत्र
- Bविकासशील
- Cसापेक्ष
- Dतटस्थ
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अवधारणा: जो किसी भी गुट या पक्ष में शामिल न हो, उसे 'तटस्थ' कहते हैं।
हल:
- भारत की गुटनिरपेक्ष नीति = किसी गुट में न रहना = तटस्थ।
- स्वतंत्र = किसी के अधीन नहीं; विकासशील = विकास की ओर बढ़ता; सापेक्ष = किसी अन्य पर आधारित।
ट्रिक: तट पर स्थित (तट + स्थ) = बीच धारा में न उतरने वाला → किसी पक्ष में नहीं।
उत्तर: (D) तटस्थ
Q3982.सरल वाक्य ‘दुर्भाग्य से वह परीक्षा में बैठ न सका।’ निम्नलिखित विकल्पों में से इस वाक्य के लिए कौन-सा एक उचित संयुक्त वाक्य होगा?
- Aउसका दुर्भाग्य था और इसलिए वह परीक्षा में बैठ न सका।
- Bउसका दुर्भाग्य कि परीक्षा में बैठ न सका।
- Cउसका दुर्भाग्य था और परीक्षा में पास न हुआ।
- Dइसलिए वह परीक्षा में उसका दुर्भाग्य था और बैठ न सका।
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अवधारणा: संयुक्त वाक्य में दो स्वतंत्र उपवाक्य 'और, इसलिए, किंतु, या' से जुड़ते हैं।
हल:
- (A): 'उसका दुर्भाग्य था' + 'वह परीक्षा में बैठ न सका' – दोनों स्वतंत्र, 'और इसलिए' से जुड़े; अर्थ वही।
- (B) में 'कि' → मिश्र वाक्य; (C) में अर्थ बदला (पास न हुआ); (D) का क्रम अशुद्ध।
ट्रिक: 'कि, जो, जब, क्योंकि' दिखे तो मिश्र; 'और, इसलिए, परंतु' दिखे तो संयुक्त।
उत्तर: (A) उसका दुर्भाग्य था और इसलिए वह परीक्षा में बैठ न सका।
Q3983.निम्न में से किस वाक्य में सम्बन्धवाचक सर्वनाम नहीं है?
- Aजिसकी लाठी उसकी भैंस।
- Bउसने कुछ नहीं खाया।
- Cवह कौन है जो जा रहा है।
- Dजो सोएगा सो खोएगा।
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अवधारणा: जो सर्वनाम दो उपवाक्यों को आपस में जोड़ें (जो-सो, जिसकी-उसकी) वे सम्बन्धवाचक हैं।
हल:
- (A) जिसकी–उसकी, (C) जो, (D) जो–सो → सम्बन्धवाचक।
- (B) 'उसने' पुरुषवाचक, 'कुछ' अनिश्चयवाचक – सम्बन्धवाचक नहीं।
ट्रिक: सम्बन्धवाचक प्रायः जोड़ी में आते हैं: जो–सो, जैसा–वैसा, जिसकी–उसकी; जोड़ी नहीं तो जाँचें।
उत्तर: (B) उसने कुछ नहीं खाया।
Q3984.दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा-
किसी शुभ कार्य को विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक करना
- Aअर्चना
- Bश्रद्धा
- Cयज्ञ
- Dअनुष्ठान
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अवधारणा: विधिपूर्वक, श्रद्धा से किया जाने वाला शुभ कार्य 'अनुष्ठान' है।
हल:
- अर्चना = पूजा-आराधना; श्रद्धा = मन का भाव, कार्य नहीं।
- यज्ञ = अग्नि में आहुति वाला एक विशेष कर्म; 'किसी भी शुभ कार्य' के लिए व्यापक शब्द अनुष्ठान।
याद रखें: अनु + स्थान = नियम के अनुसार स्थापित कर्म; विवाह, पूजा, संस्कार सब अनुष्ठान हैं।
उत्तर: (D) अनुष्ठान
Q3985.‘हाथ का मैल होना’ मुहावरे का सही अर्थ इनमें से क्या होगा?
- Aअत्यंत खट्टा होना
- Bअत्यंत बड़ा होना
- Cअत्यंत तुच्छ होना
- Dअत्यंत मीठा होना
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अवधारणा: 'हाथ का मैल' = बहुत तुच्छ/मामूली वस्तु (प्रायः धन के लिए)।
हल:
- वाक्य: पैसा तो हाथ का मैल है, फिर आ जाएगा।
- खट्टा/मीठा स्वाद के अर्थ हैं; 'बड़ा होना' उल्टा भाव।
ट्रिक: मैल धो दिया जाता है – यानी जिसकी कोई कीमत नहीं।
उत्तर: (C) अत्यंत तुच्छ होना
Q3986.‘आपने चाय-वाय पी ली होगी।’ वाक्य में प्रयुक्त चाय-वाय किस प्रकार का शब्द-युग्म है?
- Aपर्यायवाची
- Bएकार्थी-अनेकार्थी
- Cसार्थक-निरर्थक
- Dविलोम शब्द
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अवधारणा: अर्थवान शब्द + उसी की तुक पर बना बेमतलब शब्द = सार्थक-निरर्थक जोड़ा।
हल:
- 'चाय' एक पेय है (अर्थवान); 'वाय' अकेले कुछ नहीं बताता।
- समानार्थी या विपरीतार्थी जोड़ों में दोनों शब्दों का अर्थ होता है, इसलिए वे कटते हैं।
ट्रिक: दूसरा शब्द 'व' से तुक मिलाए (कपड़े-वपड़े, खाना-वाना) तो ऐसा जोड़ा प्रायः इसी श्रेणी का।
उत्तर: (C) सार्थक-निरर्थक
Q3987.‘आसक्ति’ का उपयुक्त एकार्थक शब्द है-
- Aघृणा
- Bगहरी चाह
- Cनिर्गुण
- Dकुशल
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अवधारणा: आसक्ति = किसी के प्रति गहरा लगाव/तीव्र चाह।
हल:
- गहरी चाह = आसक्ति ✔
- घृणा = विपरीत भाव; निर्गुण = गुणरहित; कुशल = निपुण।
याद रखें: आसक्ति का विलोम 'विरक्ति/अनासक्ति' है – गीता का 'अनासक्त कर्म' याद रखें।
उत्तर: (B) गहरी चाह
Q3988.‘यहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालुम नहीं है।’
उपरोक्त वाक्य में वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धि है। इसके शुद्ध रूप का चयन करें-
- Aयहां किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नहीं है।
- Bयहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालुम नहीं है।
- Cयहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नहीं है।
- Dयहाँ किसी को भी इस कार्यालय का पता मालूम नही है।
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अवधारणा: सही वर्तनी 'मालूम' (दीर्घ ऊ) है।
हल:
- मूल वाक्य में 'मालुम' अशुद्ध।
- (A) में 'यहां' (चंद्रबिंदु की जगह बिंदु), (B) में 'मालुम', (D) में 'नही' अशुद्ध।
- (C) में यहाँ, मालूम, नहीं – सब शुद्ध।
ट्रिक: एक-एक शब्द तीन जगह जाँचें: यहाँ (ँ), मालूम (ू), नहीं (ं) – तीनों सही केवल (C) में।
उत्तर: (C) विकल्प (C) – यहाँ, मालूम, नहीं तीनों शुद्ध
Q3989.दिए गए शब्द का सही पर्यायवाची शब्द पहचानिए-
ब्रह्म
- Aलोकेश
- Bपशुपति
- Cनीलकंठ
- Dमहेश्वर
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अवधारणा: ब्रह्मा के पर्याय: लोकेश, विधि, विधाता, पितामह, चतुरानन, विरंचि।
हल:
- लोकेश अर्थात् समस्त लोकों के रचयिता-स्वामी → ब्रह्मा ✔
- पशुपति, नीलकंठ, महेश्वर – भगवान शंकर के नाम।
ट्रिक: जब तीन विकल्प शंकर के नाम हों, तो बचा नाम ही ब्रह्मा का पर्याय होगा।
उत्तर: (A) लोकेश
Q3990.निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएं कि चिह्नित वाक्यांश में किस प्रकार की त्रुटि है?
वह बहुत ज्ञानी व्यक्ति है। उसने अनेकों ग्रन्थों की रचना की है।
- Aलिंग
- Bअव्यय
- Cविशेषण
- Dवचन
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अवधारणा: 'अनेक' स्वयं बहुवचन है; उस पर 'ओं' लगाना वचन की अशुद्धि है।
हल:
- अशुद्ध: अनेकों ग्रन्थों
- शुद्ध रूप: '…अनेक ग्रन्थ रचे हैं' या 'अनेक ग्रन्थों की' (ओं केवल ग्रन्थ पर)।
ट्रिक: अनेक, सब, कई, बहुत जैसे शब्दों पर बहुवचन चिह्न नहीं लगता।
उत्तर: (D) वचन
Q3991.‘सारे कलाकार ऊपर हैं।’ उपर्युक्त वाक्य का सार्थक किस क्रिया-विशेषण से है?
- Aस्थानवाचक क्रिया-विशेषण
- Bकालवाचक क्रिया-विशेषण
- Cरीतिवाचक क्रिया-विशेषण
- Dपरिमाणवाचक क्रिया-विशेषण
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अवधारणा: 'कहाँ?' का उत्तर देने वाला अविकारी शब्द – स्थानसूचक क्रिया-विशेषण।
हल:
- 'ऊपर' बताता है कि कलाकार कहाँ हैं।
- कब (काल), कैसे (रीति), कितना (परिमाण) का बोध नहीं।
ट्रिक: प्रश्न पूछें: कहाँ? → स्थान, कब? → काल, कैसे? → रीति, कितना? → परिमाण।
उत्तर: (A) स्थान बताने वाला क्रिया-विशेषण
Q3992.‘जलजीवन’ पर्याय है-
- Aपानी का
- Bनदी का
- Cसमुद्र का
- Dमछली का
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अवधारणा: जलजीवन = जल ही जिसका जीवन हो = मछली।
हल:
- मछली के पर्याय: मीन, मत्स्य, झष, जलजीवन।
- अकेला 'जीवन' जल का पर्याय है, पर 'जलजीवन' जल में रहने वाले जीव का।
ट्रिक: समास-विग्रह करें: जल है जीवन जिसका (बहुव्रीहि) → मछली।
उत्तर: (D) मछली का
Q3993.दिए गए वाक्य में शब्द या वाक्य खंड को बदलिए।
मेरे पीछे आप आये।
- Aमेरे पीछे ही आप आये।
- Bआप आये मेरे पीछे।
- Cमेरे बाद आप आये।
- Dमेरे आने के पीछे आप आये।
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अवधारणा: 'पीछे' स्थान बताता है, समय-क्रम के लिए 'बाद' का प्रयोग होता है।
हल:
- आप मेरे आने के बाद आए – यह समय का क्रम है।
- शुद्ध वाक्य: मेरे बाद आप आये।
- (A), (B) में 'पीछे' बना रहा; (D) व्यर्थ लंबा।
ट्रिक: स्थान = आगे/पीछे; समय = पहले/बाद।
उत्तर: (C) मेरे बाद आप आये।
Q3994.निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा एक विलोम युग्म सही नहीं है?
- Aखग-मृग
- Bगमन-लाघव
- Cगुप्त-प्रकट
- Dगमन-आगमन
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अवधारणा: सही विलोम जोड़ी के दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ दें।
हल:
- गमन (जाना) का विलोम आगमन (आना) ✔
- लाघव (हल्कापन) का विलोम गौरव है, गमन नहीं ✘
- गुप्त–प्रकट ✔; खग (पक्षी)–मृग (पशु) परीक्षा में विलोम माना जाता है।
ट्रिक: एक ही शब्द (गमन) दो विकल्पों में हो तो उसका सही विलोम पहचानकर दूसरे को काटें।
उत्तर: (B) गमन-लाघव
Q3995.‘रक्षिका आज अपने घर-वर गयी होगी।’ वाक्य में प्रयुक्त घर-वर किस प्रकार के शब्द-युग्म के अंतर्गत आएँगे?
- Aसार्थक-सार्थक
- Bनिरर्थक-निरर्थक
- Cशब्द विलोम
- Dसार्थक-निरर्थक
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अवधारणा: पहला शब्द अर्थवान, दूसरा केवल तुक के लिए – सार्थक-निरर्थक युग्म।
हल:
- 'घर' = निवास (सार्थक); यहाँ 'वर' कोई अर्थ नहीं देता।
- सार्थक-सार्थक का उदाहरण: माता-पिता; निरर्थक-निरर्थक: ऊल-जलूल।
ट्रिक: 'घर-वर, चाय-वाय, पानी-वानी' – 'आदि' के भाव वाले युग्म सार्थक-निरर्थक होते हैं।
उत्तर: (D) सार्थक-निरर्थक
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
Q3996.महात्मा फुले के अनुसार-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, उस परिवार को किस प्रकार के परिवार की संज्ञा दी है?
- Aपरिपूर्ण परिवार
- Bशिक्षित परिवार
- Cस्वतंत्र परिवार
- Dआदर्श परिवार
Show answer
अवधारणा: उत्तर सीधे गद्यांश की पंक्ति से मिलता है।
हल:
- गद्यांश के अनुसार चारों सदस्य अलग धर्म के (बौद्ध, ईसाई, इस्लाम, सत्यधर्म) – ऐसा परिवार 'आदर्श' है।
- परिपूर्ण, शिक्षित, स्वतंत्र परिवार शब्द गद्यांश में नहीं हैं।
ट्रिक: गद्यांश में प्रश्न का मुख्य शब्द (बौद्ध, ईसाई) खोजें, उत्तर उसी वाक्य में है।
उत्तर: (D) आदर्श परिवार
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
Q3997.‘महात्मा’ शब्द में किस संधि का प्रयोग हुआ है?
- Aमहा + आत्मा
- Bमह + आत्मा
- Cमहा + अत्मा
- Dमहात् + आ
Show answer
अवधारणा: महा + आत्मा: आ + आ = आ → दीर्घ स्वर संधि।
हल:
- महा (आ) + आत्मा (आ) = महात्मा
- उदाहरण: विद्या + आलय = विद्यालय, हिम + आलय = हिमालय।
- 'मह', 'अत्मा', 'महात् + आ' अशुद्ध विच्छेद।
ट्रिक: दोनों भाग अपने-आप में शुद्ध शब्द होने चाहिए – 'महा' और 'आत्मा' दोनों सार्थक।
उत्तर: (A) महा + आत्मा
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
Q3998.महात्मा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से कब सम्मानित किया गया?
- A1888
- B1886
- C1887
- D1889
Show answer
अवधारणा: तथ्य वाला प्रश्न गद्यांश की संख्या से मिलाएँ।
हल:
- गद्यांश: 1888 में 'महात्मा' उपाधि मिली।
- 1886, 1887, 1889 गद्यांश में नहीं।
याद रखें: ज्योतिबा फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' बनाया था।
उत्तर: (A) 1888
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
Q3999.ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी क्या विशेषता थी?
- Aजो देखते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
- Bजो सुनते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
- Cजो कहते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
- Dजो कहते थे वह अपने आचरण एवं व्यवहार में कभी नहीं उतारते थे।
Show answer
अवधारणा: अंतिम पंक्ति: वे जो कहते थे, उसे आचरण में उतारते थे।
हल:
- अर्थात् कथनी और करनी एक।
- (A), (B) में 'देखते/सुनते' – शब्द बदला; (D) उल्टा अर्थ।
ट्रिक: विकल्पों में केवल एक शब्द बदला हो तो गद्यांश का मूल शब्द ('कहते') मिलाएँ।
उत्तर: (C) जो कहते थे वही अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारते थे।
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
महात्मा ज्योतिबा फुले के मौलिक विचार ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकऱ्यांचा आसूड’ (किसानों का प्रतिरोध), ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’ आदि पुस्तकों में संगृहीत हैं। उनके विचार अपने समय से बहुत आगे थे। आदर्श परिवार के बारे में उनकी अवधारणा है-जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है। 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया तो उन्होंने कहा-“मुझे महात्मा कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।” महात्मा ज्योतिबा फुले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे कहते थे, उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारते थे।
Q4000.उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक होगा?
- Aज्योतिबा फुले के राजनीतिक विचार
- Bज्योतिबा फुले के जाति सम्बन्धी विचार
- Cज्योतिबा फुले के आदर्श विचार
- Dज्योतिबा फुले के नारी सम्बन्धी विचार
Show answer
अवधारणा: अच्छा शीर्षक पूरे अंश के मुख्य विचार को समेटता है।
हल:
- अंश में: पुस्तकें, आदर्श परिवार, विनम्रता, कथनी-करनी की एकता – ये सब फुले के ऊँचे आदर्श हैं।
- राजनीति, जाति या नारी पर अलग से चर्चा नहीं है।
ट्रिक: जो शीर्षक सभी वाक्यों को समेटे वही सही; एक पहलू वाला शीर्षक छोटा पड़ता है।
उत्तर: (C) फुले के आदर्श विचार (विकल्प C)