- Aलक्ष्मी का
- Bअप्सरा का
- Cनदी का
- Dस्त्री का
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अवधारणा: सरिता = बहती जलधारा, यानी नदी।
हल:
- नदी के अन्य पर्याय: तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निम्नगा।
- लक्ष्मी = कमला/रमा; स्त्री = नारी/वनिता – इनका पर्याय सरिता नहीं।
याद रखें: 'सर' धातु = बहना → सरिता (बहने वाली)।
उत्तर: (C) नदी का
Q1582.निम्नलिखित में से बहुवचन से संबंधित वाक्य है-
- Aकुछ अधिकारियों ने एक मीटिंग की।
- Bछात्र विद्यालय जा रहा है।
- Cमजदूर को उसकी मजदूरी दे दो।
- Dहिंदी के शिक्षक कक्षा में नहीं गए हैं।
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अवधारणा: जिस वाक्य का कर्ता वास्तव में एक से अधिक हो, वही बहुवचन वाक्य है।
हल:
- (A) 'कुछ अधिकारियों ने' – 'कुछ' और '-यों' रूप स्पष्ट बहुवचन।
- (B), (C) में कर्ता एक ही है।
- (D) में 'गए हैं' आदर के कारण है, संख्या के कारण नहीं।
ट्रिक: आदरसूचक बहुवचन (गुरुजी आए हैं) को संख्या वाला बहुवचन न समझें।
उत्तर: (A) कुछ अधिकारियों ने एक मीटिंग की।
Q1583.निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और बताएँ कि प्रस्तुत विकल्पों में से कौन-सा विकल्प चिह्नित शब्द का विलोम शब्द है?
खेल में उत्तम प्रदर्शन के कारण ही खिलाड़ी को पुरस्कृत किया गया।
- Aतिरस्कृत
- Bअपकृत
- Cपुरस्कार
- Dपदक
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अवधारणा: पुरस्कृत यानी सम्मानित/इनाम पाने वाला; उल्टा भाव = अनादर पाने वाला।
हल:
- पुरस्कृत का विलोम ‘तिरस्कृत’ (अपमानित) है।
- अपकृत (हानि पहुँचाया हुआ), पुरस्कार (संज्ञा रूप), पदक (मेडल) – इनमें उल्टा भाव नहीं।
याद रखें: पुरस्कृत ↔ तिरस्कृत, पुरस्कार ↔ तिरस्कार – जोड़ी में याद करें।
उत्तर: (A) तिरस्कृत
Q1584.निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित खंड के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए-
विनोबा भावे आंदोलन के भूदान प्रवर्तक थे।
- Aके आंदोलन भूदान
- Bआंदोलन भूदान
- Cभूदान आंदोलन के
- Dआंदोलन भूदान के
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अवधारणा: नाम-सूचक शब्द संज्ञा से पहले और संबंध-सूचक 'के' उसके बाद आता है।
हल:
- 'भूदान' नाम-सूचक है, अतः पहले आएगा।
- उसके बाद 'के' लगकर 'प्रवर्तक' से जुड़ता है → क्रम: भूदान → आंदोलन → के।
याद रखें: विनोबा भावे ने 1951 में तेलंगाना के पोचमपल्ली से भूदान आंदोलन शुरू किया।
उत्तर: (C) भूदान आंदोलन के
Q1585.‘इन तीनों में आपस में घनिष्ट मित्रता है।’ उपरोक्त वाक्य में वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ हैं। अशुद्धि रहित वाक्य का चयन करें-
- Aइन तीनों में आपस में घनिष मित्रता है।
- Bइन तीनों में आपस में घनिष्ट मित्रता है।
- Cइन तीनों में आपस में घनिष्ठ मित्रता है।
- Dइन तीनों में आपस में घनिषठ मित्रता है।
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अवधारणा: सही शब्द 'घनिष्ठ' है; अंत में ष् + ठ जुड़ते हैं (ट नहीं)।
हल:
- 'घन' + 'इष्ठ' प्रत्यय = घनिष्ठ।
- केवल (C) में यह शुद्ध रूप प्रयुक्त है; (A) अधूरा, (B) ष्ट वाला, (D) बिना संयुक्ताक्षर।
ट्रिक: इसी प्रकार: श्रेष्ठ, ज्येष्ठ, कनिष्ठ, वरिष्ठ – सभी में 'ष्ठ'।
उत्तर: (C) इन तीनों में आपस में घनिष्ठ मित्रता है।
Q1586.निम्न वाक्य में वर्तनीगत अशुद्धि छाँटिए।
योगीराज कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
- Aअर्जुन
- Bकृष्ण
- Cयोगीराज
- Dगीता
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अवधारणा: इन्-अंत शब्द (योगिन्) समास में ह्रस्व 'इ' वाले रूप में आते हैं।
हल:
- योगी + राज = योगिराज (ह्रस्व 'ि')।
- कृष्ण, अर्जुन, गीता शुद्ध हैं।
ट्रिक: ऐसे ही: मंत्रिपरिषद, शशिकांत, प्राणिमात्र – सब में छोटी इ।
उत्तर: (C) योगीराज
Q1587.मुहावरे और उसके अर्थ के लिए सही विकल्प चुनें।
घर बसाना
- Aघर सजाना
- Bघर में रहना
- Cघर बना लेना
- Dविवाह करना
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अवधारणा: मुहावरे में शब्दों का सीधा नहीं, विशेष (छिपा) अर्थ लेते हैं।
हल:
- 'घर बसाना' = शादी करके गृहस्थी शुरू करना।
- घर सजाना/रहना/बनाना – शब्दों का सीधा अर्थ है।
ट्रिक: जो विकल्प मुहावरे के शब्द ही दोहराए, वह प्रायः गलत होता है।
उत्तर: (D) विवाह करना
Q1588.निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति सार्थक शब्द के माध्यम से करें।
मेरे कहने का ____ है कि मुझे ____ की प्राप्ति हुई है।
- Aबल
- Bतात्पर्य
- Cअर्थ
- Dमतलब
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अवधारणा: दो खाली जगहों के लिए एक ही शब्द – ऐसा शब्द जिसके दो अर्थ हों।
हल:
- 'अर्थ' = (1) आशय, (2) धन।
- पहली जगह आशय वाला 'अर्थ', दूसरी जगह धन वाला 'अर्थ'।
- तात्पर्य/मतलब धन का अर्थ नहीं देते।
याद रखें: अर्थशास्त्र = धन का शास्त्र – यही 'अर्थ' का दूसरा अर्थ है।
उत्तर: (C) अर्थ
Q1589.रमेश मेरा सच्चा मित्र है। रेखांकित शब्द के उचित विलोम शब्द का चयन कीजिए।
- Aविरोधी
- Bशत्रु
- Cदुश्मन
- Dदुश्मनी
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अवधारणा: विलोम उसी शब्द-भेद और स्रोत (तत्सम) का होना चाहिए।
हल:
- मित्र (तत्सम) ↔ शत्रु (तत्सम)।
- दुश्मन फ़ारसी है, दुश्मनी भाववाचक संज्ञा, विरोधी का अर्थ अलग।
ट्रिक: तत्सम का विलोम तत्सम, संज्ञा का विलोम संज्ञा – यह नियम याद रखें।
उत्तर: (B) शत्रु
Q1590.निम्नलिखित वाक्य में अशुद्ध शब्द है-
मैं मंदिर दर्शन देने आया था।
- Aदर्शन
- Bदेने
- Cमें
- Dआया
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अवधारणा: भक्त दर्शन 'करता' है; देवता दर्शन 'देते' हैं।
हल:
- 'दर्शन देने' यहाँ गलत प्रयोग।
- शुद्ध: मैं मंदिर दर्शन करने आया था।
ट्रिक: कौन किसे दर्शन दे रहा है – यह सोचें; बोलने वाला भक्त है।
उत्तर: (B) देने
Q1591.इनमें से ‘अनुराग’ का विलोम शब्द कौन-सा है?
- Aराग
- Bविराग
- Cदुराग
- Dसुराग
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अवधारणा: अनुराग = प्रेम/लगाव; विलोम = विरक्ति।
हल:
- अनुराग ↔ विराग।
- राग पर्याय है; सुराग = सुराख/पता; दुराग मान्य शब्द नहीं।
ट्रिक: उपसर्ग बदलकर विलोम: अनुराग ↔ विराग, आसक्ति ↔ विरक्ति।
उत्तर: (B) विराग
Q1592.निम्न वाक्य में रेखांकित पद को संशोधित कीजिए।
अमावस की रातें बड़ी रमणीय होती हैं।
- Aकाली
- Bबादलों
- Cचाँदनी
- Dअंधेरी
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अवधारणा: 'रमणीय' (सुंदर) रातों के साथ उजाले वाला विशेषण चाहिए।
हल:
- अमावस की रात अंधेरी होती है – रमणीय से मेल नहीं।
- 'अमावस' हटाकर 'चाँदनी' रखने से भाव सुंदर और संगत हो जाता है।
ट्रिक: काली/अंधेरी भी अमावस जैसे ही अर्थ देते हैं – दोनों साथ ही हट जाते हैं।
उत्तर: (C) चाँदनी
Q1593.प्रेम करना तलवार की नोक पर चलना है। उपरोक्त वाक्य में रेखांकित पद के बदले कौन-सा विकल्प उपयुक्त है?
- Aधार
- Bतीक्ष्ण
- Cपार्श्व
- Dकिनारे
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अवधारणा: मुहावरों के शब्द निश्चित होते हैं, बदले नहीं जाते।
हल:
- मूल मुहावरा 'धार' शब्द वाला है, अर्थ – अत्यंत जोखिम का काम करना।
- 'नोक' बदलकर 'धार' करना ही उचित है।
याद रखें: समान अर्थ: लोहे के चने चबाना, आग से खेलना।
उत्तर: (A) धार
Q1594.‘होली ____।’ शुद्ध तद्भव शब्दयुक्त विकल्प से वाक्य पूर्ण करें-
- Aफाल्गुनी में मनाई जाती है
- Bफागन में मनाई जाती है
- Cफागुन में मनाई जाती है
- Dफाल्गुन में मनाई जाती है
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अवधारणा: तद्भव = तत्सम शब्द का बदला हुआ बोलचाल रूप।
हल:
- फाल्गुन (तत्सम) → फागुन (तद्भव)।
- फागन अशुद्ध है; फाल्गुनी विशेषण/नक्षत्र नाम।
ट्रिक: संयुक्त व्यंजन (ल्ग) हटकर सरल हो जाए तो प्रायः तद्भव: कर्म → काम, अग्नि → आग।
उत्तर: (C) फागुन में मनाई जाती है
Q1595.‘मैंने हरि बुलाया।’ किस कारक का प्रयोग नहीं करने से इस वाक्य में त्रुटि है?
- Aकरण
- Bसंप्रदान
- Cकर्ता
- Dकर्म
Show answer
अवधारणा: प्राणी-वाचक कर्म हो तो उसके बाद 'को' लगाना ज़रूरी है।
हल:
- किसे बुलाया? – हरि; यही कर्म है, पर इसके बाद 'को' छूट गया है।
- 'हरि' के बाद 'को' जोड़ते ही वाक्य शुद्ध।
- कर्ता की 'ने' मौजूद है।
याद रखें: कर्म = 'को'; करण = 'से/के द्वारा'; संप्रदान = 'को/के लिए'।
उत्तर: (D) कर्म
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यदि अपने समय के प्रत्येक पल की चिंता __(76)__ रखे तो थोड़ी आयु को भी बहुत बढ़ा सकता है, जिसे वह एक मास में कर सकेगा उसी को बहुतों का जीवन __(77)__ भी नहीं करेंगे। यदि उसका ध्यान उचित और उत्तम कृत्यों में निमग्न है तो समय सुख से व्यतीत करता, नहीं तो बहुतों का __(78)__ भरसक-सा हुआ रहता है। दिन-रात जगते बीतते हैं। इनकी दीर्घ-सूत्रता और रात-दिन के बर्ताव को देखने से यही जान पड़ेगा कि मानो वे अपने को अमर समझे हुए हैं। बड़ेरों खूब खाकर पेट पर हाथ फेरते, पान कुतरे, तकिया आश्रय ले पलंग पर जा सो जाते हैं और बारह-चौदह घंटा अपना समय नींद में खोते हैं। वैद्यों और डॉक्टरों का मत है कि छह घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित सोना उपयुक्त __(79)__। यदि इतना ही सोने का अभ्यास किया जाए तो कितना समय बच सकता है। अधिक सोने से केवल समय हानि ही नहीं होती, शरीर के जितने अवयव हैं, शिथिल और अयोग्य हो जाते हैं और बारह घंटे सोने के बाद उतनी ही व्याकुलता और अकुशलता कार्य करने में होती है। शरीर और __(80)__ दोनों को इससे हानि पहुँचती है। फिर खाने के पश्चात तुरंत सो जाने से आलस्य, हाइपरएसिडिटी, अपच, दीनता और शिरोव्यथा होती है, यद्यपि नींद झटपट आ जाती है।
Q1596.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aनीर
- Bवृक्ष
- Cवाहन
- Dमनुष्य
Show answer
अवधारणा: चिंता रखना और आयु बढ़ाना – ये कार्य केवल सचेत प्राणी के हैं।
हल:
- गद्यांश समय के सदुपयोग की सीख मनुष्य को देता है।
- नीर, वृक्ष, वाहन अचेतन हैं।
ट्रिक: रिक्त के बाद वाली क्रिया (रखे, बढ़ा सकता है) देखकर कर्ता चुनें।
उत्तर: (D) मनुष्य
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यदि अपने समय के प्रत्येक पल की चिंता __(76)__ रखे तो थोड़ी आयु को भी बहुत बढ़ा सकता है, जिसे वह एक मास में कर सकेगा उसी को बहुतों का जीवन __(77)__ भी नहीं करेंगे। यदि उसका ध्यान उचित और उत्तम कृत्यों में निमग्न है तो समय सुख से व्यतीत करता, नहीं तो बहुतों का __(78)__ भरसक-सा हुआ रहता है। दिन-रात जगते बीतते हैं। इनकी दीर्घ-सूत्रता और रात-दिन के बर्ताव को देखने से यही जान पड़ेगा कि मानो वे अपने को अमर समझे हुए हैं। बड़ेरों खूब खाकर पेट पर हाथ फेरते, पान कुतरे, तकिया आश्रय ले पलंग पर जा सो जाते हैं और बारह-चौदह घंटा अपना समय नींद में खोते हैं। वैद्यों और डॉक्टरों का मत है कि छह घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित सोना उपयुक्त __(79)__। यदि इतना ही सोने का अभ्यास किया जाए तो कितना समय बच सकता है। अधिक सोने से केवल समय हानि ही नहीं होती, शरीर के जितने अवयव हैं, शिथिल और अयोग्य हो जाते हैं और बारह घंटे सोने के बाद उतनी ही व्याकुलता और अकुशलता कार्य करने में होती है। शरीर और __(80)__ दोनों को इससे हानि पहुँचती है। फिर खाने के पश्चात तुरंत सो जाने से आलस्य, हाइपरएसिडिटी, अपच, दीनता और शिरोव्यथा होती है, यद्यपि नींद झटपट आ जाती है।
Q1597.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aदुर्ग
- Bनज़र
- Cपर्याप्त
- Dजीवन
Show answer
अवधारणा: भाव: जो काम वह एक महीने में करेगा, उतने के लिए दूसरों का जीवन भी काफ़ी नहीं।
हल:
- 'काफ़ी' का तत्सम पर्याय = पर्याप्त।
- 'जीवन' पहले से वाक्य में है; दुर्ग, नज़र असंगत।
ट्रिक: रिक्त से ठीक पहले आया शब्द विकल्प में हो तो प्रायः वह दोहराव है – हटा दें।
उत्तर: (C) पर्याप्त
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यदि अपने समय के प्रत्येक पल की चिंता __(76)__ रखे तो थोड़ी आयु को भी बहुत बढ़ा सकता है, जिसे वह एक मास में कर सकेगा उसी को बहुतों का जीवन __(77)__ भी नहीं करेंगे। यदि उसका ध्यान उचित और उत्तम कृत्यों में निमग्न है तो समय सुख से व्यतीत करता, नहीं तो बहुतों का __(78)__ भरसक-सा हुआ रहता है। दिन-रात जगते बीतते हैं। इनकी दीर्घ-सूत्रता और रात-दिन के बर्ताव को देखने से यही जान पड़ेगा कि मानो वे अपने को अमर समझे हुए हैं। बड़ेरों खूब खाकर पेट पर हाथ फेरते, पान कुतरे, तकिया आश्रय ले पलंग पर जा सो जाते हैं और बारह-चौदह घंटा अपना समय नींद में खोते हैं। वैद्यों और डॉक्टरों का मत है कि छह घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित सोना उपयुक्त __(79)__। यदि इतना ही सोने का अभ्यास किया जाए तो कितना समय बच सकता है। अधिक सोने से केवल समय हानि ही नहीं होती, शरीर के जितने अवयव हैं, शिथिल और अयोग्य हो जाते हैं और बारह घंटे सोने के बाद उतनी ही व्याकुलता और अकुशलता कार्य करने में होती है। शरीर और __(80)__ दोनों को इससे हानि पहुँचती है। फिर खाने के पश्चात तुरंत सो जाने से आलस्य, हाइपरएसिडिटी, अपच, दीनता और शिरोव्यथा होती है, यद्यपि नींद झटपट आ जाती है।
Q1598.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aचौखट
- Bनदी
- Cगाड़ी
- Dजीवन
Show answer
अवधारणा: पिछले भाग 'समय सुख से व्यतीत' का विपरीत भाव चाहिए।
हल:
- जो सुख या कष्ट से बीतता है, वह जीवन है।
- चौखट, नदी, गाड़ी का समय-प्रसंग से संबंध नहीं।
ट्रिक: गद्यांश का मुख्य विषय (समय/जीवन) ही प्रायः रिक्त का उत्तर होता है।
उत्तर: (D) जीवन
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यदि अपने समय के प्रत्येक पल की चिंता __(76)__ रखे तो थोड़ी आयु को भी बहुत बढ़ा सकता है, जिसे वह एक मास में कर सकेगा उसी को बहुतों का जीवन __(77)__ भी नहीं करेंगे। यदि उसका ध्यान उचित और उत्तम कृत्यों में निमग्न है तो समय सुख से व्यतीत करता, नहीं तो बहुतों का __(78)__ भरसक-सा हुआ रहता है। दिन-रात जगते बीतते हैं। इनकी दीर्घ-सूत्रता और रात-दिन के बर्ताव को देखने से यही जान पड़ेगा कि मानो वे अपने को अमर समझे हुए हैं। बड़ेरों खूब खाकर पेट पर हाथ फेरते, पान कुतरे, तकिया आश्रय ले पलंग पर जा सो जाते हैं और बारह-चौदह घंटा अपना समय नींद में खोते हैं। वैद्यों और डॉक्टरों का मत है कि छह घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित सोना उपयुक्त __(79)__। यदि इतना ही सोने का अभ्यास किया जाए तो कितना समय बच सकता है। अधिक सोने से केवल समय हानि ही नहीं होती, शरीर के जितने अवयव हैं, शिथिल और अयोग्य हो जाते हैं और बारह घंटे सोने के बाद उतनी ही व्याकुलता और अकुशलता कार्य करने में होती है। शरीर और __(80)__ दोनों को इससे हानि पहुँचती है। फिर खाने के पश्चात तुरंत सो जाने से आलस्य, हाइपरएसिडिटी, अपच, दीनता और शिरोव्यथा होती है, यद्यपि नींद झटपट आ जाती है।
Q1599.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aहै
- Bथी
- Cथे
- Dरहेंगे
Show answer
अवधारणा: कर्ता 'सोना' पुल्लिंग एकवचन, काल वर्तमान।
हल:
- वाक्य एक सामान्य सत्य (डॉक्टरों का मत है) बता रहा है।
- अतः 'उपयुक्त है'।
ट्रिक: थी (स्त्रीलिंग), थे (बहुवचन), रहेंगे (भविष्य) – लिंग/वचन/काल से तुरंत हटाएँ।
उत्तर: (A) है
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
यदि अपने समय के प्रत्येक पल की चिंता __(76)__ रखे तो थोड़ी आयु को भी बहुत बढ़ा सकता है, जिसे वह एक मास में कर सकेगा उसी को बहुतों का जीवन __(77)__ भी नहीं करेंगे। यदि उसका ध्यान उचित और उत्तम कृत्यों में निमग्न है तो समय सुख से व्यतीत करता, नहीं तो बहुतों का __(78)__ भरसक-सा हुआ रहता है। दिन-रात जगते बीतते हैं। इनकी दीर्घ-सूत्रता और रात-दिन के बर्ताव को देखने से यही जान पड़ेगा कि मानो वे अपने को अमर समझे हुए हैं। बड़ेरों खूब खाकर पेट पर हाथ फेरते, पान कुतरे, तकिया आश्रय ले पलंग पर जा सो जाते हैं और बारह-चौदह घंटा अपना समय नींद में खोते हैं। वैद्यों और डॉक्टरों का मत है कि छह घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित सोना उपयुक्त __(79)__। यदि इतना ही सोने का अभ्यास किया जाए तो कितना समय बच सकता है। अधिक सोने से केवल समय हानि ही नहीं होती, शरीर के जितने अवयव हैं, शिथिल और अयोग्य हो जाते हैं और बारह घंटे सोने के बाद उतनी ही व्याकुलता और अकुशलता कार्य करने में होती है। शरीर और __(80)__ दोनों को इससे हानि पहुँचती है। फिर खाने के पश्चात तुरंत सो जाने से आलस्य, हाइपरएसिडिटी, अपच, दीनता और शिरोव्यथा होती है, यद्यपि नींद झटपट आ जाती है।
Q1600.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aकल
- Bजन
- Cवन
- Dमन
Show answer
अवधारणा: 'शरीर' का स्वाभाविक जोड़ीदार शब्द 'मन' है।
हल:
- अधिक सोने से शरीर शिथिल और काम में व्याकुलता – यानी मन पर भी असर।
- कल, जन, वन असंगत हैं।
ट्रिक: प्रचलित युग्म: तन-मन, शरीर और मन, मन-मस्तिष्क।
उत्तर: (D) मन