Q1781.निम्नलिखित में से ‘उल्लास’ का विलोम शब्द है-
- Aविषाद
- Bप्रसन्नता
- Cहर्ष
- Dआनंद
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अवधारणा: ‘उल्लास’ = मन की उमंग, खुशी से भर जाना।
- विलोम चाहिए दुःख/उदासी वाला भाव → ‘विषाद’ (खिन्नता, शोक)।
- प्रसन्नता, हर्ष, आनंद – तीनों खुशी के ही शब्द (पर्याय) हैं।
ट्रिक: तीन विकल्प एक ही अर्थ के हों तो अलग अर्थ वाला ही विलोम – यहाँ विषाद।
उत्तर: (A) विषाद
Q1782.निम्नलिखित वाक्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और क्रिया संबंधी त्रुटि की पहचान कर शुद्ध वाक्य का चयन करें।
वह क्रिकेट खेलते हैं।
- Aवह क्रिकेट खेलता है।
- Bवह क्रिकेट खेलते हैं।
- Cवह वहीं क्रिकेट खेलते हैं।
- Dवह क्रिकेट खेलता हैं।
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अवधारणा: क्रिया कर्ता के वचन, लिंग और पुरुष के अनुसार बदलती है।
- कर्ता ‘वह’ (अन्य पुरुष, एकवचन) → क्रिया ‘खेलता है’।
- (B) ‘खेलते हैं’ बहुवचन है; (D) ‘खेलता हैं’ में आधा एकवचन, आधा बहुवचन; (C) में ‘वहीं’ जोड़ने से अर्थ बदलता है।
ट्रिक: एकवचन कर्ता + ‘ता है’, बहुवचन/आदरसूचक + ‘ते हैं’ – दोनों हिस्से एक जैसे वचन में हों।
उत्तर: (A) वह क्रिकेट खेलता है।
Q1783.व्यक्ति को पहले स्वार्थ त्यागना चाहिए। इस वाक्य में ‘स्वार्थ’ शब्द का कौन-सा विलोम होगा?
- Aअर्थ
- Bनिःस्वार्थ
- Cपरार्थ
- Dसामर्थ्य
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अवधारणा: स्वार्थ = स्व + अर्थ (अपना हित)।
- उल्टा भाव: पर + अर्थ = परार्थ (दूसरों का हित)।
- ‘निःस्वार्थ’ विशेषण है (‘स्वार्थी’ का विलोम); ‘अर्थ’ = धन/मतलब; ‘सामर्थ्य’ = शक्ति।
ट्रिक: संज्ञा का विलोम संज्ञा ही होगा: स्वार्थ ↔ परार्थ, जैसे स्वदेश ↔ परदेश।
उत्तर: (C) परार्थ
Q1784.‘आपने यह इंतजाम माल बेचने आए कितने ____ के लिए किया है।’ वाक्य के रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त गैर-विशेषण शब्द का चुनाव कीजिए।
- Aहाकिमों
- Bरिश्तेदारों
- Cमेहमानों
- Dव्यापारियों
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अवधारणा: रिक्त स्थान में ऐसा संज्ञा शब्द चाहिए जो वाक्य के प्रसंग से मेल खाए; ‘कितने’ के बाद बहुवचन तिर्यक रूप (-ओं) आता है।
- वाक्य में ‘माल बेचने आए’ लोगों की बात है — माल बेचने का काम व्यापारी करते हैं।
- हाकिम (अधिकारी), रिश्तेदार (संबंधी), मेहमान (अतिथि) — इनका माल बेचने से कोई संबंध नहीं।
- अतः रिक्त स्थान में ‘व्यापारियों’ उपयुक्त है।
याद रखें: रिक्त स्थान भरते समय वाक्य के संकेत-शब्द (यहाँ ‘माल बेचने’) पर ध्यान दें।
उत्तर: (D) व्यापारियों
Q1785.निम्न वाक्य में रेखांकित पद को संशोधित कीजिए।
यदि उन्हें लकड़ी मिल जाएँ तो वे पोस्टर बनाएँगे।
- Aसीमेंट
- Bकागज
- Cपतंग
- Dकलम
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अवधारणा: वाक्य का अर्थ तर्कसंगत बनाने वाला शब्द चुनें।
- पोस्टर बनाने के लिए सामग्री चाहिए – पोस्टर कागज पर बनता है, लकड़ी पर नहीं।
- सीमेंट से मकान बनते हैं; पतंग और कलम तो बनी-बनाई चीज़ें हैं।
ट्रिक: पूछें – ‘पोस्टर किस पर बनता है?’ – उत्तर तुरंत: कागज।
उत्तर: (B) कागज
Q1786.निम्न वाक्य में वर्तनीगत त्रुटि पहचानिए।
लेखिका की यह किताब पुनरीक्षिता हो चुकी है।
- Aकिताब
- Bपुनरीक्षिता
- Cलेखिका
- Dचुकी है
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अवधारणा: संस्कृत से आए ‘-इत’ वाले विशेषण लिंग के अनुसार रूप नहीं बदलते।
- गलत रूप: ‘पुनरीक्षिता’; सही रूप: ‘पुनरीक्षित’ (पुनः + ईक्षित = दोबारा जाँचा गया)।
- ‘किताब’ स्त्रीलिंग होने पर भी विशेषण ‘पुनरीक्षित’ ही रहेगा।
- बाकी तीनों खंडों की वर्तनी ठीक है।
ट्रिक: प्रकाशित, संशोधित, पुनरीक्षित – ‘किताब’ के साथ भी इनमें ‘-आ’ नहीं लगता।
उत्तर: (B) पुनरीक्षिता
Q1787.मेरा मित्र बहुत कपटी है। इसमें प्रयुक्त ‘कपटी’ शब्द का विलोम चयन कीजिए।
- Aनिष्कपट
- Bअकपट
- Cनिर्मल
- Dछल
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अवधारणा: कपटी = धोखा/छल करने वाला।
- विलोम: निः + कपट = निष्कपट (छल-रहित, सरल)।
- ‘छल’ तो कपट का पर्याय है; ‘निर्मल’ = स्वच्छ; ‘अकपट’ प्रचलित मानक रूप नहीं।
ट्रिक: ‘निः/निर्’ उपसर्ग से विलोम: कपटी → निष्कपट, दोषी → निर्दोष।
उत्तर: (A) निष्कपट
Q1788.वाक्य में रेखांकित शब्द के स्थान पर सर्वोचित शब्द का चयन कीजिए।
इस कक्ष का निर्माण रोटरी क्लब की दया से हुआ है।
- Aइच्छा
- Bआकांक्षा
- Cविवशता
- Dसुजनता
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अवधारणा: किसी क्लब/संस्था की भलाई भरी मदद को ‘दया’ (तरस) कहना ठीक नहीं; इसके लिए ‘सौजन्य/सुजनता’ शब्द प्रयुक्त होता है।
- सुजनता = सज्जनता, भलमनसाहत — संस्था की उदारता के लिए ठीक बैठता है (‘…के सौजन्य से’)।
- इच्छा व आकांक्षा मन की चाह हैं; विवशता = मजबूरी — तीनों प्रसंग में अर्थ नहीं देते।
- अतः ‘दया’ की जगह ‘सुजनता’ रखें।
याद रखें: दया/कृपा में ऊँच-नीच का भाव है; बराबरी के सौजन्य के लिए ‘सुजनता/सौजन्य’।
उत्तर: (D) सुजनता
Q1789.‘काशी नरेश ने अपनी पुत्रियों के विवाह के लिए सबयंवर का आयोजन किया।’ वाक्य में रेखांकित शब्द की शुद्ध वर्तनी है-
- Aस्वयंवर
- Bशुभंवर
- Cस्वयंबर
- Dस्वयम्वर
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अवधारणा: स्वयं + वर = स्वयंवर (कन्या द्वारा स्वयं वर चुनना)।
- ‘सबयंवर’ में ‘स्व’ की जगह ‘सब’ – अशुद्ध।
- ‘स्वयंबर’ में व → ब की गलती; ‘स्वयम्वर’ में अनुस्वार की जगह म्; ‘शुभंवर’ निरर्थक।
ट्रिक: शब्द को तोड़कर लिखें: स्वयं + वर – दोनों हिस्से शुद्ध, तो पूरा शब्द शुद्ध।
उत्तर: (A) स्वयंवर
Q1790.निम्नलिखित वाक्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और वाक्यांश हेतु सार्थक शब्द प्रस्तुत करें।
जो परस्पर एक-दूसरे पर आश्रित हों।
- Aअन्योन्याश्रित
- Bअन्त्याश्रय
- Cआश्रय
- Dआश्रित
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अवधारणा: अन्योन्य (परस्पर) + आश्रित (निर्भर) = अन्योन्याश्रित।
- ‘आश्रित’ में बस एक पक्ष दूसरे पर टिका होता है, आपसी भाव नहीं।
- ‘आश्रय’ का मतलब सहारा है; ‘अन्त्याश्रय’ प्रचलित ही नहीं।
ट्रिक: ‘एक-दूसरे’ का भाव आए तो ‘अन्योन्य’ वाला शब्द चुनें।
उत्तर: (A) अन्योन्याश्रित
Q1791.निम्नलिखित में से ‘मुख्य’ का विलोम शब्द है-
- Aगौण
- Bप्रधान
- Cविशिष्ट
- Dखास
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अवधारणा: मुख्य = सबसे प्रमुख, प्रधान।
- विलोम: गौण = कम महत्त्व वाला, सहायक।
- खास, विशिष्ट या प्रधान – ये सब ‘मुख्य’ जैसे ही अर्थ देते हैं।
याद रखें: युग्म याद करें: मुख्य ↔ गौण, प्रधान ↔ अप्रधान।
उत्तर: (A) गौण
Q1792.प्रेरणार्थक क्रिया की दृष्टि से शुद्ध वाक्य है-
- Aरमेश इस किताब को पढ़ सकता है।
- Bठेकेदार मजदूर से ईंटें उठवाता है।
- Cवह कल बनारस चला गया।
- Dमैं खाना खाता हूँ।
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अवधारणा: प्रेरणार्थक क्रिया में कर्ता स्वयं काम न करके दूसरे से करवाता है।
- विकल्प (B) में ईंटें मजदूर उठाता है, पर काम करवाने वाला ठेकेदार है।
- उठाना → उठवाना, यानी किसी और से उठाने का काम करवाना (दूसरा प्रेरणार्थक रूप)।
- पढ़ सकता है, चला गया, खाता हूँ – किसी में करवाने का भाव नहीं।
ट्रिक: ‘-वाना/-वाता’ रूप और ‘से’ के साथ दूसरा कर्ता दिखे → प्रेरणार्थक।
उत्तर: (B) ठेकेदार मजदूर से ईंटें उठवाता है।
Q1793.निम्नलिखित वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द चुनिए-
जो कभी बूढ़ा न हो
- Aअगर
- Bअमर
- Cअजर
- Dमगर
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अवधारणा: अ (नहीं) + जर (बुढ़ापा) = अजर।
- जो कभी बूढ़ा न हो → अजर।
- अमर = जो कभी न मरे; अगर = सुगंधित लकड़ी; मगर = घड़ियाल/किंतु।
ट्रिक: ‘अजर-अमर’ जोड़ी: अजर = बुढ़ापा नहीं, अमर = मृत्यु नहीं।
उत्तर: (C) अजर
Q1794.‘राम बाजार में अलग-थलग खड़ा था।’ वाक्य में प्रयुक्त ‘अलग-थलग’ किस प्रकार के शब्द-युग्म के अंतर्गत आएँगे?
- Aसार्थक-निरर्थक
- Bसार्थक-सार्थक
- Cपर्यायवाची शब्द
- Dशब्द विलोम
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अवधारणा: शब्द-युग्म के प्रकार: सार्थक-सार्थक, सार्थक-निरर्थक, निरर्थक-निरर्थक।
- ‘अलग’ का अर्थ है, पर ‘थलग’ अकेले कोई अर्थ नहीं देता।
- इसलिए ‘अलग-थलग’ सार्थक-निरर्थक युग्म है (अर्थ: सबसे कटा हुआ)।
- यह न पर्यायवाची जोड़ा है, न विलोम।
ट्रिक: दूसरा शब्द अकेले बोलकर देखें – अर्थ न बने तो सार्थक-निरर्थक (चाय-वाय, पानी-वानी)।
उत्तर: (A) सार्थक-निरर्थक
Q1795.‘आग में घी डालना’ मुहावरे का अर्थ है-
- Aसमझौता कराना
- Bबीच-बचाव करना
- Cक्रोध बढ़ाना
- Dशांत करना
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अवधारणा: घी पड़ने से आग और भड़कती है – वैसे ही क्रोध या झगड़ा बढ़ाना।
- अर्थ: क्रोध/विवाद को और भड़काना।
- समझौता कराना, बीच-बचाव, शांत करना – तीनों उल्टे भाव हैं।
ट्रिक: शाब्दिक दृश्य सोचें – आग बढ़ती है, तो अर्थ भी ‘बढ़ाना’।
उत्तर: (C) क्रोध बढ़ाना
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्रभाषा से यह अभिप्राय है कि वह अंतरप्रांतीय व्यापार और __(76)__ व्यवहार में सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा बरती जाए और बद्रीनाथ से रामेश्वरम् तक तथा अमृतसर से कटक तक सभी स्थानों में परस्पर बातचीत करने और __(77)__ में काम लाई जाए। राष्ट्रभाषा होने की आधिकारिक योग्यता हिंदी में आनी और लानी चाहिए। आज के युग में जब वैज्ञानिक आविष्कार के कारण दुनिया से स्थान और समय की दूरी समाप्त होती जा रही है, कोई भी भाषा दूसरी भाषा के संपर्क से अपने को __(78)__ नहीं रख सकती। हिंदी का यह एक विशेष गुण है कि उसने हिंदुओं की भाषा होते हुए भी अरबी, फारसी, अंग्रेजी इत्यादि के शब्दों को अछूत नहीं समझा। __(79)__ की नीति तो वह कतई स्वीकार नहीं कर सकती और न विदेशी शब्दों को ही बाहर रखकर वह अपनी उन्नति कर सकती है। हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख इत्यादि सभी बसते हैं, तो भी वह __(80)__ है। इसी प्रकार, यदि हम सभी भाषाओं से उत्तम और आवश्यक शब्द लें, तो भी हिंदी ही रहेगी।
Q1796.रिक्त स्थान (76) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aसार्विक
- Bसार्वत्रिक
- Cसार्वलौकिक
- Dसार्वजनिक
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अवधारणा: ‘व्यवहार’ के साथ ऐसा विशेषण चाहिए जो ‘सब लोगों का’ अर्थ दे।
- सार्वजनिक = जनता का, सबका – ‘व्यवहार’ के साथ यही जोड़ी प्रचलित है।
- सार्वत्रिक = हर जगह; सार्वलौकिक = पूरे संसार का; सार्विक – यहाँ ठीक नहीं बैठते।
ट्रिक: ‘सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा’ – लोगों की बात है, तो ‘जन’ वाला शब्द।
उत्तर: (D) सार्वजनिक
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्रभाषा से यह अभिप्राय है कि वह अंतरप्रांतीय व्यापार और __(76)__ व्यवहार में सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा बरती जाए और बद्रीनाथ से रामेश्वरम् तक तथा अमृतसर से कटक तक सभी स्थानों में परस्पर बातचीत करने और __(77)__ में काम लाई जाए। राष्ट्रभाषा होने की आधिकारिक योग्यता हिंदी में आनी और लानी चाहिए। आज के युग में जब वैज्ञानिक आविष्कार के कारण दुनिया से स्थान और समय की दूरी समाप्त होती जा रही है, कोई भी भाषा दूसरी भाषा के संपर्क से अपने को __(78)__ नहीं रख सकती। हिंदी का यह एक विशेष गुण है कि उसने हिंदुओं की भाषा होते हुए भी अरबी, फारसी, अंग्रेजी इत्यादि के शब्दों को अछूत नहीं समझा। __(79)__ की नीति तो वह कतई स्वीकार नहीं कर सकती और न विदेशी शब्दों को ही बाहर रखकर वह अपनी उन्नति कर सकती है। हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख इत्यादि सभी बसते हैं, तो भी वह __(80)__ है। इसी प्रकार, यदि हम सभी भाषाओं से उत्तम और आवश्यक शब्द लें, तो भी हिंदी ही रहेगी।
Q1797.रिक्त स्थान (77) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aविचार-कम
- Bविचार-स्वातंत्र्य
- Cविचार-विज्ञ
- Dविचार-विनिमय
Show answer
अवधारणा: ‘परस्पर बातचीत’ के साथ विचारों का आदान-प्रदान वाला शब्द मेल खाता है।
- विचार-विनिमय = विचारों का लेन-देन।
- विचारों की आज़ादी वाला विकल्प प्रसंग से हटकर है; बाकी दो शब्द ही गढ़े हुए हैं।
याद रखें: विनिमय = अदला-बदली (जैसे विदेशी मुद्रा विनिमय)।
उत्तर: (D) विचार-विनिमय
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्रभाषा से यह अभिप्राय है कि वह अंतरप्रांतीय व्यापार और __(76)__ व्यवहार में सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा बरती जाए और बद्रीनाथ से रामेश्वरम् तक तथा अमृतसर से कटक तक सभी स्थानों में परस्पर बातचीत करने और __(77)__ में काम लाई जाए। राष्ट्रभाषा होने की आधिकारिक योग्यता हिंदी में आनी और लानी चाहिए। आज के युग में जब वैज्ञानिक आविष्कार के कारण दुनिया से स्थान और समय की दूरी समाप्त होती जा रही है, कोई भी भाषा दूसरी भाषा के संपर्क से अपने को __(78)__ नहीं रख सकती। हिंदी का यह एक विशेष गुण है कि उसने हिंदुओं की भाषा होते हुए भी अरबी, फारसी, अंग्रेजी इत्यादि के शब्दों को अछूत नहीं समझा। __(79)__ की नीति तो वह कतई स्वीकार नहीं कर सकती और न विदेशी शब्दों को ही बाहर रखकर वह अपनी उन्नति कर सकती है। हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख इत्यादि सभी बसते हैं, तो भी वह __(80)__ है। इसी प्रकार, यदि हम सभी भाषाओं से उत्तम और आवश्यक शब्द लें, तो भी हिंदी ही रहेगी।
Q1798.रिक्त स्थान (78) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aअछोह
- Bअछूता
- Cअचिति
- Dअचूक
Show answer
अवधारणा: ‘अपने को ___ नहीं रख सकती’ – अर्थ है प्रभाव से बचा हुआ रहना।
- अछूता = जिसे छुआ न गया हो, अप्रभावित।
- अगला वाक्य (‘शब्दों को अछूत नहीं समझा’) भी यही संकेत देता है।
- अचूक = जो न चूके; अछोह, अचिति – प्रसंगहीन।
ट्रिक: रिक्त स्थान के आस-पास के शब्द (संपर्क, अछूत) देखें – सुराग वहीं है।
उत्तर: (B) अछूता
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्रभाषा से यह अभिप्राय है कि वह अंतरप्रांतीय व्यापार और __(76)__ व्यवहार में सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा बरती जाए और बद्रीनाथ से रामेश्वरम् तक तथा अमृतसर से कटक तक सभी स्थानों में परस्पर बातचीत करने और __(77)__ में काम लाई जाए। राष्ट्रभाषा होने की आधिकारिक योग्यता हिंदी में आनी और लानी चाहिए। आज के युग में जब वैज्ञानिक आविष्कार के कारण दुनिया से स्थान और समय की दूरी समाप्त होती जा रही है, कोई भी भाषा दूसरी भाषा के संपर्क से अपने को __(78)__ नहीं रख सकती। हिंदी का यह एक विशेष गुण है कि उसने हिंदुओं की भाषा होते हुए भी अरबी, फारसी, अंग्रेजी इत्यादि के शब्दों को अछूत नहीं समझा। __(79)__ की नीति तो वह कतई स्वीकार नहीं कर सकती और न विदेशी शब्दों को ही बाहर रखकर वह अपनी उन्नति कर सकती है। हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख इत्यादि सभी बसते हैं, तो भी वह __(80)__ है। इसी प्रकार, यदि हम सभी भाषाओं से उत्तम और आवश्यक शब्द लें, तो भी हिंदी ही रहेगी।
Q1799.रिक्त स्थान (79) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aबहिश्वर
- Bबधियाना
- Cबहिष्कार
- Dबहिनापा
Show answer
अवधारणा: अगला अंश कहता है – विदेशी शब्दों को ‘बाहर रखकर’ उन्नति नहीं हो सकती।
- बाहर करने की नीति = बहिष्कार (बहिः + कार)।
- बधियाना, बहिनापा अर्थ में असंगत; बहिश्वर मानक शब्द नहीं।
ट्रिक: ‘बाहर रखना’ पढ़ते ही ‘बहिः’ वाला शब्द चुनें।
उत्तर: (C) बहिष्कार
निर्देश (प्र. 96-100): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्रभाषा से यह अभिप्राय है कि वह अंतरप्रांतीय व्यापार और __(76)__ व्यवहार में सभी प्रांतों में रहने वालों द्वारा बरती जाए और बद्रीनाथ से रामेश्वरम् तक तथा अमृतसर से कटक तक सभी स्थानों में परस्पर बातचीत करने और __(77)__ में काम लाई जाए। राष्ट्रभाषा होने की आधिकारिक योग्यता हिंदी में आनी और लानी चाहिए। आज के युग में जब वैज्ञानिक आविष्कार के कारण दुनिया से स्थान और समय की दूरी समाप्त होती जा रही है, कोई भी भाषा दूसरी भाषा के संपर्क से अपने को __(78)__ नहीं रख सकती। हिंदी का यह एक विशेष गुण है कि उसने हिंदुओं की भाषा होते हुए भी अरबी, फारसी, अंग्रेजी इत्यादि के शब्दों को अछूत नहीं समझा। __(79)__ की नीति तो वह कतई स्वीकार नहीं कर सकती और न विदेशी शब्दों को ही बाहर रखकर वह अपनी उन्नति कर सकती है। हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख इत्यादि सभी बसते हैं, तो भी वह __(80)__ है। इसी प्रकार, यदि हम सभी भाषाओं से उत्तम और आवश्यक शब्द लें, तो भी हिंदी ही रहेगी।
Q1800.रिक्त स्थान (80) के लिए उचित विकल्प चुनिए।
- Aराजस्थान
- Bपाकिस्तान
- Cहिंदुस्तान
- Dहिंदुआनी
Show answer
अवधारणा: लेखक तुलना करता है – अनेक धर्मों के लोग रहने पर भी देश का नाम वही रहता है।
- वाक्य ‘हिंदुस्तान में…सभी बसते हैं, तो भी वह ___ है’ → हिंदुस्तान ही है।
- इसी तरह सभी भाषाओं के शब्द लेकर भी हिंदी, हिंदी ही रहेगी।
- राजस्थान, पाकिस्तान, हिंदुआनी – तर्क से मेल नहीं।
ट्रिक: वाक्य का पहला शब्द ही उत्तर में लौटता है – ‘हिंदुस्तान…वह हिंदुस्तान है’।
उत्तर: (C) हिंदुस्तान